नगर निगम में महापौर एजाज़ ढेबर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, खतरे में कुर्सी।

रायपुर : नगर निगम चुनाव में एजाज़ ढेबर के निर्वाचन को लेकर उँगलियाँ उठती रही, लेकिन सत्ता के कारण कोई कुछ ना कर सका, जहाँ प्रमोद दुबे महापौर पद के लिये प्रमुख दावेदार थे, वहीँ उन्हें किनारे कर दिया गया। अब विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद नगर निगम में भी राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हो गई है। जहाँ पहले राजधानी में उलटफेर होगा उसके बाद बाकी के निगम मंडलों में उलट फेर की तैयारी है। कांग्रेस को शहर की चारों विधानसभा सीटों के 70 वार्डों में मिली हार के बाद कांग्रेस के पार्षदों में भी भारी नाराजगी है। भाजपा पार्षद दल इसे भुनाने की फिराक में लगा हुआ है। इसे लेकर मंगलवार को भाजपा पार्षद दल की बैठक आज दोपहर 12 बजे आहूत की गई है। इसमें महापौर एजाज ढेबर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के संदर्भ में चर्चा की जाएगी।

निगम की नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने कहा कि महापौर को नैतिक तौर पर इस हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस के कुछ पार्षद भी इस समय भाजपा के पक्ष में नजर आ रहे हैं। अब मंगलवार को ही तय होगा कि अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा किस तरीके से आगे बढ़ती है और कांग्रेसी पार्षदों का कितना समर्थन उसे मिलता है।

अविश्वास के लिए एक तिहाई जरूरी :

जानकारों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक तिहाई पार्षदों की सहमति जरूरी होती है। इसे पास करवाने के लिए बहुमत लाना जरूरी होता है।

कुकरेजा का निष्कासन भी बड़ा फैक्टर :

पार्टी से बगावत कर विधायक का चुनाव लड़ने वाले पार्षद अजीत कुकरेजा को कांग्रेस निष्कासित कर चुकी है। एक और कांग्रेस पार्षद चंद्र बेहरा पर भी विधानसभा चुनाव के समय अनुशासन का डंडा चलाया जा रहा है। इन दो पार्षदों के अलावा और कांग्रेस के कई पार्षद असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि महापौर को बहुमत साबित करने की िस्थतियां निर्मित हुई तो कांग्रेस को नुकसान होना तय है। क्योंकि भाजपा के 29 और दो निर्दलीय मिलाकर वर्तमान में 31 पार्षद हैं और कांग्रेस के 34 पार्षद। 5 निर्दलीय पार्षद ऐसे हैं, जो अभी पूरी तरह से कांग्रेस के समर्थन में हैं। लेकिन पाला बदलने के साथ ही भाजपा के पक्ष में 36 से ज्यादा पार्षद आ सकते हैं।

नाराजगी इसलिए है , जिसे भाजपा भुना सकती है :

पांच वर्ष से लंबित जनहित की फाइल : कुछ पार्षदों और अधिकारियों से बात में सामने आया कि कई जनहित की फाइलें ऐसी रहीं, जो पांच वर्ष से लंबित रहीं। इसकी वजह से कांग्रेसी पार्षदों में भी काफी नाराजगी है। कई ऐसे मामले हैं जिन्हें लेकर कांग्रेसी पार्षद पिछले कई दिनों से नाराज दिखाई दे रहे हैं। कई जनहित के कार्य, विकास की योजनाएं अटकी हुई हैं। इसकी वजह से कांग्रेसी पार्षद विरोध में उतर आए हैं।