कांग्रेस पार्टी की बैठक में कार्यकर्ताओं का झलका गुस्सा, कहा : 15 साल तक इसलिये मेहनत की थी, कि सत्ता में आने पर पांच-सात लोग अरबपति बन जाये।

रायपुर : राज्य में कांग्रेस जीत 15 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद हुई थी और अब फिर से हार के बाद कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव की हार की समीक्षा के लिए शनिवार को बुलाई गई तीन बैठकों में पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों और जिला अध्यक्षों का गुस्सा फूट पड़ा। पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को दो टूक कह दिया कि सत्ता और संगठन में बिलकुल तालमेल नहीं है। मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर भी तीखी नाराजगी सामने आई। एक पदाधिकारी ने पूछ लिया कि क्या 15 साल तक कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इसलिए संघर्ष किया था कि सत्ता में आने पर पांच-सात लोग अरबपति बन जाये।

कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में करीब 7-8 घंटे तक लगातार तीन बैठकें हुई। ज्यादातर बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष बैज सिर्फ पदाधिकारियों को सुनने की भूमिका में नजर आए। पहली बैठक में करीब दो दर्जन से अधिक संयुक्त महामंत्री और सचिवों ने अपनी-अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा, ज्यादातर मंत्रियों से मुलाकात ही नहीं होती थी। राजीव भवन में मंत्रियों का आना बंद हो गया था। इसका नुकसान उठाना पड़ा। हार के लिए बड़े नेता जिम्मेदार हैं, जिन्होंने लगातार कार्यकर्ताओं की अवहेलना की। सत्ता मिलने के बाद संगठन को बिल्कुल भी महत्वनहीं दिया गया। जमीनी कार्यकर्ताओं की पूछ-परख नहीं रह गई थी, सिर्फ बड़े नेता ही अपनी मनमर्जी से काम करते रहे।

प्रेमसाय टेकाम के सामने ही दिखी नाराजगी :

टिकट कटने वाले विधायकों की बैठक में पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम भी आए थे। वे भी टिकट कटने से दुखी थे। इसके बावजूद ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर उन्हें भी नाराजगी का सामना करना पड़ा था, वो खुद भी काफी दुखी लफ़ रहे थे।

जिनको सुनना था वो चले गए :

बैठक में एक पदाधिकारी ने कहा, आपको प्रदेश अध्यक्ष बने ज्यादा महीने नहीं हुए है। आप को ज्यादा कुछ बोलने से मतलब नहीं है। जिनको बोलना था, वो तो चले गए। बता दें कि इस समीक्षा बैठक में प्रदेश प्रभारी व प्रभारी सचिव कोई नहीं है। जबकि इन पर पूर्व विधायकों ने कई आरोप लगाए थे। हार को लेकर लगातार कार्यकर्ताओं में गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है।

एक विधायक के आंसू छलके :

इस बैठक में जिन विधायकों का टिकट काटा गया था, उनको भी बुलाया गया। पूर्व विधायकों ने टिकट कटने के कारण को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है था कि टिकट मिलने पर चुनाव जीत जाते हैं। इस दौरान एक पूर्व महिला विधायक जब अपनी बात रख रही थी, तो उनके आंसू भी निकल पड़े। वो काफी रुआंसा हो गई।

अन्य कार्यकर्ताओं और जिलाध्यक्षों ने भी खरा-खरा बोला :

जिलाध्यक्षों की बैठक में सत्ता और संगठन को लेकर खुलकर नाराजगी देखने को मिली। जिलाध्यक्ष ने भीतरघात करने वालों की जमकर शिकायत की। बिलासपुर और महासमुंद के जिलाध्यक्षों ने खुलकर अपनी बातों को रखा। बिलासपुर महापौर वायरल के ऑडियो का मुद्दा भी उठा। इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि उन्हें अभी तक नहीं हटाया गया है। उनका कहना था कि एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने काम नहीं किया है। इतनी मेहनत के बाद भी क्या इस तरह का बयान सही है?

अब विधानसभा प्रभारी भी लेंगे बैठक :

बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, पार्टी में हर तरह की बातें होती है, ज्यादातर बातें सकारात्मक हैं। अगर कोई बात नहीं रख पाया है तो 28 दिसंबर के बाद कार्यालय में आकर अपनी बात रख सकते है। इसके अलावा हमारे प्रभारी भी सभी जिलों की विधानसभा क्षेत्रों में जायेंगे और कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। ऊपर से खबर है कि अब सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया जा सकता है।