नीरज कामरानी की आत्महत्या मामले में पुलिस ने कमला लच्छेदानी और सविता बजाज से की पूछताछ, जवाब में बताया ये….।

रायपुर : सूदखोरों की कार्यविधि को लेकर सवाल उठ रहा है कि इन पर प्रशासन की लगाम क्यूँ नही है, ऐसी ही चार घटनायें पहले भी सामने आ चूकी है। राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में सूदखोरों से परेशान होकर आत्महत्या के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। युवक नीरज कामरानी ने सुसाइड नोट में दो महिलाओं के नाम जिक्र किया है। पुलिस ने दोनों महिलाओं को बुलाकर उनके बयान दर्ज करवाये हैं।

पुलिस के अनुसार कमला लच्छेदानी और सविता बजाज का बयान दर्ज किया गया है। उसके आधार पर आगे की जांच होगी। तेलीबांधा थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार नीरज के सुसाइड नोट और उसकी मां के द्वारा दिए गए बयान के आधार पर दोनों महिलाओं से पूछताछ की गई है। कमला लच्छेदानी और सविता बजाज ने अपने बयान में कहा है कि बीसी का पैसा था। उसी पैसे की मांग काफी दिन पहले की गई थी। हाल में अभी किसी से पैसे की मांग नहीं की गई है। इस बयान को लेकर अभी पालिक आश्वस्त नहीं है वह अपनी कार्यवाही कर रही है, वहीँ इस घटना से परिजन सकते में है।

हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से करवाई जाएगी जांच :

मृतक के कमरे से सुसाइड नोट मिला है, जिसकी जांच के लिए पुलिस हैंड राइटिंग एक्सपर्ट को जांच के लिए भेजेगी। राइटिंग मिलान के अलावा नीरज के मोबाईल फोन को भी जांच के लिए भेजा जाएगा। उसकी किससे कितनी बार बात हुई है। इस घटना में उसे किसने और कितना परेशान किया है? क्या इन महिलाओं के अलावा भी कहीं और से कर्ज लिया गया था, अथवा इन महिलाओं के पीछे कोई और भी है?

नीरज की मां ने लगाया यह आरोप :

मृतक युवक नीरज की मां कमला कामरानी ने दोनों महिलाओं पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। कमला ने कहा कि कमला लच्छेदानी और सविता बजाज द्वारा लगातार पैसे की मांग की जा रही थी। उनके बेटे को भी परेशान किया जा रहा था। 15 वर्ष पहले दो लाख रुपये कर्ज के रूप में लिए थे। जिसके एवज में तीन लाख रुपये दे चुके थे। कुल आठ लाख की मांग की जा रही थी। इसका कोई दस्तावेज भी नहीं है। बबेटा मानसिक रूप से प्रताड़ित था, लगातार परेशान भी रहता था।

रायपुर एएसपी लखन पटले ने कहा, सुसाइड नोट में जिन महिलाओं के नाम सामने आए हैं, उनके बयान थाने में दर्ज करवाए गए हैं। सुसाइड नोट को जांच के लिए भेजा जायेगा। वहीं युवक का मोबाईल भी जांच में लिया गया है। बयानों के आधार पर आगे कार्यवाही होगी। आरोप सही पाया गया तो अपराध दर्ज किया जायेगा। घटना को लेकर पुलिस अपनी कार्यवाही कर रही है।

लेनदारी की रकम दो लाख लेकिन चूकाया है मूल से ज्यादा :

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक उसके परिवार ने 2 लाख का कर्ज लिया था, जिसका हर महीने 30 हजार रुपए ब्याज देते थे। बाद में ब्याज पर ब्याज भी लेने लगे, जिससे उनका मूल कर्ज ही बढ़ता जा रहा था। चर्चा है कि कुछ माह पहले ही ब्याज का पैसा चुकाने के लिए पीड़ित परिवार ने बीसी से करीब डेढ़ लाख रुपए लिया था।

वाट्सऐप चैटिंग, रेकॉर्डिंग की तलाश : 

पुलिस को मृतक और कर्ज वसूलने वालों की वाट्सऐप चैटिँग, कोई रिकार्डिंग या लेन-देन के संबंध में किसी प्रकार के दस्तावेजों की तलाश है। सुसाइड नोट की जांच के लिए नीरज की हैंडराइटिंग का सैंपल घर में नहीं मिला है। जिस मेडिकल स्टोर में काम करता है, वहां से मांगा जायेगा।

ये तरीका अपना रहे सूदखोर :

कर्ज देने के एवज में कोरे स्टाम्प पर हस्ताक्षर करवाकर रख लेते हैं, ताकि कर्ज के संबंध में अपने मन मुताबिक बातें लिख सकें। कर्ज देते समय हस्ताक्षर करवाकर खाली चेक लेते हैं। फिर 10 से लेकर 20 फीसदी ब्याज लेते हैं। ब्याज चक्रवृद्धि में होता है। वाहन, सोना, मकान, टीवी आदि को गिरवी रखते हैं। कर्ज वसूली करने महिलाओं, युवतियों को आगे करते हैं। कर्ज का ब्याज हर माह वसूलते हैं। सरकारी नौकरी वाले कर्जदारों से बैंक का पासबुक, एटीएम कार्ड ले लेते हैं। जिससे मजबूर आदमी और ज्यादा फंस जाता है।