नई दिल्ली : भगवान राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने वाली है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसके मुख्य यजमान होंगे, पहले विरोधी पार्टियाँ मंदिर का विरोध करती हुई आई, अब जब राम मंदिर बन गया है, तो भी इनका विरोध थमने का नाम नहीं है, इनका विरोध भगवान राम के मंदिर को लेकर भी है और भाजपा को लेकर भी विरोध है, लेकिन राजनैतिक रोटी सेंकने के चक्कर ये तय नहीं कर पा रहे है कि क्या करें, इनका हर कदम मोदी के सामने सेल्फ गोल जैसा है। अब जबकि अयोध्या में 22 जनवरी के लिए रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए लाखों लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं। देश के विभिन्न वर्गों से आने वाले लोगों को प्राण प्रतिष्ठा का न्योता दिया गया था। जिसमें से हजारों लोगों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन कुछ विपक्षी दलों के नेताओं ने निमंत्रण को ठुकरा दिया है। वहीँ कुछ लोग निमंत्रण ना मिलने को लेकर भी नाराज है।
सबसे पहले कांग्रेस ने ठुकराया निमंत्रण :
निमंत्रण ठुकराने का यह सिलसिला सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने शुरू किया था। कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सबसे पहले 10 जनवरी 2024 को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि 22 जनवरी को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी अयोध्या नहीं जाएंगे। हालांकि 15 जनवरी को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कई नेता अयोध्या पहुंचे थे। वहीँ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी आलाकमान पर इस निमंत्रण को ठुकराने के लिये अपनी नाराजगी भी जाहिर की है।
लालू यादव भी 22 को नहीं जाएंगे अयोध्या :
कांग्रेस के बाद टीएमसी की तरफ से भी साफ़ कर दिया गया था कि 22 जनवरी को उनकी तरफ से कोई अयोध्या नहीं जायेगा। इसके बाद मीडिया ने जब आरजेडी प्रमुख लालू यादव से 22 जनवरी को अयोध्या जाने का सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होने नहीं जाएंगे। वहीं इनके बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को निमंत्रण मिलने या न मिलने को भी खूब बवाल हुआ। इन सभी नेताओं ने जाने को स्पष्ट मना कर दिया।
अखिलेश को लेकर खूब हुआ था विवाद :
एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अखिलेश ने पत्रकार से ही कह दिया कि आप कुरियर के द्वारा भेजे गए निमंत्रण पत्र की रसीद दिखा दीजिये। हालांकि इसके बाद उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें निमंत्रण मिल गया और वह अयोध्या जाएंगे, लेकिन 22 जनवरी को नहीं। उन्होंने ने भी एक बयान जारी करते हुए कहा कि वह 22 जनवरी के बाद सपरिवार रामलला के दर्शन करने जाएंगे। इसे बड़ा ही सेफ गेम कहा गया। इस तरीके से कुछ नेताओं अपने वोटबैंक को साधा।
शरद यादव ने भी किया इनकार :
वहीं इसके बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार का भी बयान आता है कि वह भी 22 जनवरी को होने वाले रामलला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि 22 जनवरी के बाद वह अयोध्या आएंगे और रामलाल के दर्शन लाभ लेंगे। वहीं सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक बना दिया गया है और इसलिए वह इसमें शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा भी कई विपक्षी नेताओं ने भी इस कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया है। वहीँ दूसरी ओर भाजपा क तरफ से कहा गया है, कि निमंत्रण कार्यक्रम के अनुसार दिया गया है, जबकि अयोध्या आने के लिये ना किसी को रोका गया है और ना मना किया है। आम रामभक्त तो बिना आमन्त्रण के ही आयेगा। राजनैतिक विरोध के कारण भगवान का विरोध कहाँ तक सही है?