बारूद के ढेर पर राजधानीवासी, कभी हो सकता है हरदा जैसा भयानक हादसा, 5 किमी तक असर पड़ा था हरदा हादसे का।

रायपुर : मध्य प्रदेश के हरदा में अवैध पटाखा फैक्ट्री में तेज धमाके के बाद भीषण आग लग गई थी, धमाका इतना भीषण था कि कई किलोमीटर तक इसकी आवाज सुनाई दे गई थी। इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 40 गंभीर हैं और 180 से ज्यादा लोग झुलस गए हैं। वहीँ इस भयानक हादसे का विडियो बनाने लोग पहुंचे, तो उन्हें भी फैलते हादसे के बाद 5 किलोमीटर तक अपनी जान बचाने के लिये भागना पड़ा, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गये।

वहीँ शहर के बीच में पटाखा कारोबार करने की मनाही है। सालों पहले रायपुर में श्याम टाकीज के बाजू जहाँ आज स्टेडियम बने हुये है, वहां पर पटाखों की अस्थायी दुकाने लगती थी, वहां भी उस समय भयानक हादसे में लोगों के पूरे पटाखे जलकर ख़ाक हो गये थे, आज भी उस हादसे को लेकर राजधानी वासी नहीं भूले है, उस समय राजधानी की जनसँख्या बहुत कम थी, लगभग 40 हजार , जबकि आज राजधानी में 25 लाख के आसपास की आबादी है।

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पटाखा कारोबार को शहर की घनी आबादी से दूर रखने के हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी इन दिनों शहर की कालोनियों के साथ ही मुख्य बाजार में भी पटाखा कारोबार संचालित हो रहा है। इसके बाद भी जिला प्रशासन द्वारा अवैध रूप से चल रहे इन पटाखा कारोबार को घनी आबादी से दूर ले जाने में रुचि नहीं दिखा रही है, बल्कि कारोबारियों को और मोहलत दी जा रही है।

मालूम हो कि मध्य प्रदेश के ग्राम हरदा में पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से 11 की मौत हो गई और 174 घायल हो गए। विस्फोट की भयावहता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री के पांच किमी तक के दायरे में आने वाले घरों की खिड़कियों के कांच टूटकर गिरने लगे। आस-पास का वातावरण काफी गर्म हो गया और चारों तरफ जहरीला धुँआ फ़ैल गया।

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हरदा में हुई घटना के बाद राजधानी के पटाखा दुकानों की पड़ताल की गई। इस दौरान पाया कि शहर के मुख्य बाजार से लेकर बड़े-बड़े मुहल्लों में भी पटाखा कारोबार चलाया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से गोलबाजार, फूल चौक, रामसागरपारा, गुढ़ियारी, लाखेनगर चौक, बढ़ईपारा सहित बहुत से ऐसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं, जहां अवैध रूप से पटाखा कारोबार लगातार चल रहा है।

जिला प्रशासन द्वारा पिछले दिनों इन्हें शिफ्टिंग करने का नोटिस भी जारी किया गया था। कारोबारी मनीष राठौड़ का कहना है कि पटाखा कारोबार को घनी आबादी से बाहर शिफ्ट करना चाहिए। पटाखा कारोबार के लिए भी अलग से जगह चिह्नित की जाए, जहां एक ही स्थान पर पटाखा कारोबार संचालित हो। अब तक इस मामले कोई पहल होने की खबर नहीं है।

आठ वर्ष पहले 175 दुकानों को दिया था नोटिस :

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मालूम हो कि के मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद पटाखा फैक्ट्री में वर्ष 2015 में हादसे के बाद जिला प्रशासन ने भी रायपुर में 175 पटाखा कारोबारियों को अपना कारोबार घनी आबादी से दूर ले जाने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद कारोबारियों की मांगों पर शिफ्टिंग की तारीख दो से तीन बार आगे बढ़ा दिया गया। इस मामले में लापरवाही गंभीर हादसे को आमंत्रित कर सकती है।

ऐसा करते-करते आठ वर्ष बीत गए। अभी भी शहर के बीचो-बीच पटाखा कारोबार लगातार संचालित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्टाक की भी जांच नहीं होती। लाइसेंस वाले पटाखा कारोबारियों को भी 400 किलोग्राम पटाखा रखने की अनुमति होती है, लेकिन उनके द्वारा भी इससे ज्यादा का स्टाक रखा जाता है। वहीँ गर्मी में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो जाती है।

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कलेक्टर गौरव सिंह ने कहा, पटाखा दुकानों को शहर के बाहर करने के मामले में कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। नियम का उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी।