व्यापार : भारतीय यूपीआई तकनीक की शुरुआत भारत से हुई है, यह तकनीक अब तक किसी अन्य देश के पास नहीं थी। इसकी सफलता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते है, कि जहाँ कल तक भारत तकनीक के लिये अन्य देशों पर निर्भर था, अब भारत तकनीक निर्यात करने वाला देश भी बन गया है। भारतीय पेमेंट सिस्टम यूपीआई को घरेलू स्तर के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी बड़ी सफलता मिल रही है। हाल ही में मॉरीशस और श्रीलंका में यूपीआई को लॉन्च किया गया है। इसके बाद अब ऐसे देशों की संख्या 10 से पार कर गई है। जहां यूपीआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पहले जनवरी में फ्रांस में यूपीआई को शुरू किया गया था। इसके बाद आप पेरिस के एफिल टावर का टिकट आसानी से खरीद सकते हैं। G20 सम्मिट में भारत में विदेशी अधिकारीयों ने इस तकनीक का प्रयोग किया था, जिसके बाद अन्य देश भी भारत से इस तकनीक की मांग करने लगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका और मॉरीशस में यूपीआई सर्विस शुरू होने के अवसर पर कहा कि आज हिंद महासागर क्षेत्र के तीन मित्र देशों के लिए एक विशेष दिन है। मेरा मानना है कि श्रीलंका और मॉरीशस को यूपीआई प्रणाली से लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। यूपीआई भारत के साथ साझेदारों को एकजुट करने की नई जिम्मेदारी निभा रहा है। इस तकनीक को जितने देश अपनाते जायेंगे, उतना ही भारत को इससे लाभ मिलेगा।
लेनदेन करना होगा आसान :
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यूपीआई से विदेशों में लेनदेन होने का सीधा और मुख्य लाभ भारतीय लोगों को होगा। आसानी से बिना किसी झंझट के विदेशों में लेनदेन कर सकते हैं। इससे फॉरेक्स चार्ज भी कम लगेगा, जिसका परिणाम होगा कि आपको विदेशों में लेनदेन करना सस्ता पड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो डेबिट/क्रेडिट प्रयोग करने का शुल्क लगता है उसमें कमी आयेगी।
क्या है यूपीआई तकनीक? :
यूपीआई एक भारतीय पेमेंट सिस्टम है। इसे सरकारी कंपनी नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन (NPCI) की तरफ से विकसित किया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसमें भुगतान करने के लिए ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है। आप केवल एक पिन दर्ज कर आसानी से भुगतान कर सकते हैं।
इन देशों में चलता है यूपीआई :
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- भूटान
- मलेशिया
- यूएई
- सिंगापुर
- ओमान
- कतर
- रूस
- फ्रांस
- श्रीलंका
- मॉरीशस
किन और देशों में होगा यूपीआई? :
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एक जानकारी के अनुसार भारत सरकार यूपीआई को अन्य देशों में भी शुरू करने को लेकर लगातार बातचीत कर रही है। इसमें ब्रिटेन, नेपाल, थाइलैंड, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, बहरीन, जापान और फिलीपींस जैसे देशों का नाम शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने में भी इसका लाभ मिल सकेगा।



