रायपुर : आमतौर पर निगम के सामुदायिक भवन हमेशा से ही उपेक्षा का शिकार रहते हैं। वहां न तो वहां साफ सफाई होती है और न ही बैठने के लिए अच्छी कुर्सियां ही होती हैं। लेकिन शताब्दी नगर में एक ऐसा भी सामुदायिक भवन है, जो कि किसी सचिव के कार्यालय से कम नहीं है। यहां 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से एलईडी टीवी, वार्डरोब, फ्रिज, अलमारी, वाशिंग मशीन सहित तमाम वो सुविधाएं हैं, जिसकी कल्पना निगम या फिर किसी भी शासकीय सामुदायिक भवन में नहीं की जा सकती।
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निगम की सामान्य सभा के दौरान भाजपा की नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने जोन 10 के अंतर्गत आने वाले शताब्दी नगर स्थित इस सामुदायिक भवन का मामला उठाया। जिसमें उनके द्वारा इस भवन में दी गई इन तमाम सुविधाओं के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब भारसाधक सदस्य ज्ञानेश शर्मा नहीं दे पाए। वहीँ निगम के सामुदायिक भवनों की आधिपत्य निगम के पास ही रहता है। इसे किसी अन्य को नहीं दिया जा सकता।
कांग्रेस सरकार में डॉ. शिव डहरिया नगरीय प्रशासन मंत्री थे। उनके कार्यकाल में तेलीबांधा के शताब्दी नगर में स्मार्ट सिटी कंपनी और निगम के जोन 10 ने 3 करोड़ 50 लाख रुपए में आलिशान सामुदायिक भवन लिया गया था। सामुदायिक भवन में आकर्षक चित्रकारी के साथ लॉन तैयार किया गया। माड्युलर किचन, डाइनिंग टेबल, बड़ा एलईडी टीवी, लक्जरी सोफा जैसी सुविधाएं जुटाई गईं थी, इसमें सरकारी पैसे का खर्च किया गया था। अब इस मामले में पूर्व मंत्री शिव डहरिया की पत्नी शकुन डहरिया को बड़ा झटका लगा है। इस मामले के सामने आने के बाद पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने कहा कि मुझे जबरदस्ती टारगेट बनाया जा रहा है।
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जिस आलीशान सामुदायिक भवन में शकुन डहरिया ने कब्जा कर रखा था, उसे हटाने के लिए अब जोन कमिश्नर दिनेश कोसरिया ने 72 घंटे में खाली करने का नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा है कि कब्जा नियम के विरुद्ध है। जबकि इसी जोन से इस सामुदायिक भवन में आधुनिक सुविधाएं सरकारी कोष से उपलब्ध कराई गईं थीं। यह मुद्दा निगम की सामान्य सभा में गूंजने के दूसरे दिन गुरुवार को आयुक्त अविनाश मिश्रा ने तीन अफसरों की जांच कमेटी बनाकर 10 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है। नीजी प्रयोग के आधार पर आधुनिक सुविधायें जुटाने को लेकर इस मामले तूल पकड़ लिया है।
माना जा रहा है कि इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही की जायेगी। हैरानी वाली बात ये है कि आवंटन संबंधी प्रस्ताव सामान्य सभा में भी कभी लाया नहीं गया। दस्तावेजों से यह सामने आया कि मंत्री डहरिया की पत्नी शकुन डहरिया की समिति की ओर से 3600 वर्गफीट जमीन की मांग की गई थी। जिसका अनुमोदन महापौर परिषद ने 2022 में एक लाइन प्रस्ताव पारित किया गया था।
इन्हें सौंपा जांच का जिम्मा :
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अब इस मामले की जांच करने का जिम्मा उपायुक्त श्रीकृष्णा खटिक, उपायुक्त आरके डोंगरे और कार्यपालन अभियंता राजेश राठौर को सौंपा गया है। इस जांच कमेटी से निगम आयुक्त ने 10 दिन के अंदर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जांच तथ्य सामने आने के बाद दोषियों पर कार्यवाही की बात भी कही जा रही है।
पूरा परिसर अटल आवास के दायरे का :
गुरु घासीदास वार्ड 49 के अंतर्गत तेलीबांधा का शताब्दीनगर में गरीब के लिए अटल आवास बनाए गए थे। जर्जर हो जाने पर अटल आवास परिसर को नगर निगम ने तोड़ दिया था। जिस पर लगभग 15 हजार वर्गफीट में ऊंची बाउंड्री कराने के साथ ही आलिशान सामुदायिक भवन का निर्माण सरकारी खजाने से किया गया। जबकि सामुदायिक भवन बनने पर मंत्री डहरिया की पत्नी शकुन डहरिया की राजश्री सद्भावना समिति को नगर निगम द्वारा आवंटित नहीं किया गया था। यह पूरा मामला निगम की सामान्य सभा में जमकर गूंजा।
मुझे टारगेट किया जा रहा : डहरिया
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यह मामला सामने आने के बाद पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने पत्रकारवार्ता में निगम के नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि निगम की एमआईसी से स्वीकृति मिली थी। इस मामले को लेकर उनके परिवार को राजनीतिक रूप से टारगेट किया जा रहा है। लेकिन उन्होंने इस मामले में निगम से आवंटन पत्र नहीं दिखाया।