रायपुर : आमतौर पर लगातार देश में हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा सदियों से चलता रहा है। इस मुद्दे पर देश में हमेशा कोई ना कोई विवाद खड़ा होता रहता है। भारतीय मुसलमानों को लेकर सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी अपनी प्रतिक्रिया दे चूके है, उन्होंने अपने बयान में कहा था कि जो मिस्कीन हिन्दू थे वही थे भारत में मुसलमान बने। जो सक्षम हिन्दू थे वो मुसलमान नहीं बने थे। यही बातें भारत में कई बार कही जा चुकी है। अब फिर छत्तीसगढ़ के रायपुर में आये हुये पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने राजधानी के मुरा में यही बातें की।
उन्होंने कहा कि भारत में सभी के पूर्वज सनातनी वैदिक हिंदू थे। पैगम्बर मोहम्मद, ईसा मसीह के पूर्वज भी हिंदू थे। उक्त बातें पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने राजधानी रायपुर के समीप ग्राम मुरा में पत्रकारों से बातचीत में कही।
शंकराचार्य ने कहा कि किसी धर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नेता काम करते हैं। मतांतरण के लिए कठोर कानून बनाया जाना चाहिए। यदि हिंदू अपने धर्म के गरीबों के उत्थान के लिए दान करें, मदद करे तो मतांतरण को रोका जा सकता है, फिर कोई भी गरीब पैसों की लालच में दूसरे धर्म को स्वीकार नहीं करेगा। हिंदू केवल अपना पेट भरने या अपने परिवार की चिंता तक ही सीमित न रहे। पूरे समाज की चिंता करें। धार्मिक शिक्षा को आगे बढ़ाने सामने आए।
नेताओ को धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए :
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अयोध्या में मंदिर निर्माण पर कहा कि सैकड़ों वर्षों से जो समस्या चली आ रही थी, वह खत्म हुई। बस, धर्म और अध्यात्म के जो नियम है, उनका पालन जरूरी है। इसमें राजनीतिज्ञों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
महिलाओं की रक्षा करना हमारा फर्ज :
शंकराचार्य ने कहा कि बंगाल में सनातन धर्म के खिलाफ जो कार्य कर रहे उसका परिणाम विस्फोटक है। आपराधिक तत्वों को संरक्षण देना उचित नहीं है, महिलाओं की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य, फर्ज है।
भारत में इस्लाम कब आया :
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इस्लाम भारत में सबसे पहले 7वीं शताब्दी के आसपास आया था। जब दक्षिण भारत के मालाबार कोस्ट में अरब पहली बार पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने भारत में बसना शुरू कर दिया था, भारतीय महिलाओं से शादी हुई और ऐसे में उनका परिवार बढ़ता चला गया। भारत में पहली मस्जिद भी एक अरब व्यापारी ने केरल में बनवाई थी।



