गूगल ने मरने को बोला है…? लड़की ने की आत्महत्या और फिर सामने आया ये माजरा….।

सूरत (गुजरात) : आज के तकनीकी युग में स्मार्टफोन भले ही जरूरत बन गया है, लेकिन इसकी लत जान की दुश्मन बन रही है। सूरत की 20 वर्षीय लड़की मोबाईल की लत में ऐसी उलझी कि मौत को ही गले लगा लिया। मोबाईल और कंप्यूटर की लत ने लोगों को इस तरह उलझा दिया है कि उसके बिना कोई काम भी मुश्किल है, वहीँ जब आप जरूरत के लिये मोबाईल और कंप्यूटर प्रयोग करें तो बेहतर है, लेकिन लोगों को मोबाईल और कंप्यूटर की लत लग गई है। जिससे अंगूठे से सम्बंधित नसों की दिक्कत, आँखों के सामने अँधेरा छा जाना, दिमाग भ्रमित होना, स्मृतिभ्रम,ज्यादा दिमागी दबाव, मानसिक कमजोरी जैसी समस्याओं से लोग ग्रसित हो रहे है।

घटना में पुलिस के मुताबिक विशाखा को मोबाईल की काफी लत थी। परिजनों ने बताया कि दो माह पहले मोबाईल से गूगल पर देखकर फेस एक्सरसाइज कर रही थी, तभी उसका मुंह डेढ़ा हो गया और उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। दो माह से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ था। इसी बीच परिजनों ने मनोरोग विशेषज्ञ से इलाज शुरू करवाया। एक माह से उसका मोबाईल भी ले लिया गया था। शनिवार को उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि स्मार्टफोन की लत के कारण उसे तरह-तरह की आवाजें सुनाई देने लगी। जैसे-गूगल ने खाना खाने के मना किया है, गूगल ने मरने के लिए बोला है..आदि। उसके बताने के हिसाब से उसे लगातार कोई ना कोई आवाज सुनाई देने लगती थी।

समय रहते करवा लें इलाज :

युवती को सिजोफ्रेनिया जैसी कोई साइकोटिक बीमारी की आशंका है। ऐसे रोगियों को आवाजें सुनाई देती हैं, जो पीड़ित को नियंत्रित करने लगती हैं। ऐसे रोगियों का समय रहते इलाज करवाना चाहिए। इस घटना से बच्चे और बड़े सबक लें। -डॉ. कमलेश दवे, मनोरोजग विभाग, सिविल अस्पताल सूरत

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क्या है सिजोफ्रेनिया :
यह एक मानसिक बीमारी है। इलाज में मार्डन तकनीक की वजह से पहले की तुलना में अब कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया कम पाया जाता है। सिजोफ्रेनिया की बजाय कैटेटोनिक को न्यूरोडेवलेपमेंटल (एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने के समय प्रभावित करती है), साइकोटिक बाइपोलर, और डिप्रेसिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक बीमारियों में ज्यादा देखा जाता है। कैटेटोनिया के रोगी को अत्यधिक और कम मोटर गतिविधि के बीच में देखा जा सकता है। सिजोफ्रेनिया एक ऐसी स्थिति है जो सारी जिंदगी रहती है, हालांकि कैटेटोनिक लक्षण हमेशा रहे ऐसा जरूरी नहीं है। सिजोफ्रेनिया के मरीजों को एक स्थायी आधार पर उपचार की आवश्यकता होती है ; यहां तक ​​कि जब लक्षण गायब हो जाये और रोगी को लगने लगे वे बेहतर हो गए हैं। सभी प्रकार के सिजोफ्रेनिया का इलाज एक ही तरीके से किया जाता है। बीमारी के तथ्यों, गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तरीकों में अंतर हो सकता है।

सामान्य शब्दों में लगातार बिगड़ती लाइफस्टाइल की वजह से लोग कई समस्याओं का शिकार होते जा हैं। इन दिनों कई लोग विभिन्न मानसिक विकारों से परेशान हैं। सिजोफ्रेनिया ऐसी ही एक गंभीर मानसिक बीमारी है जो व्यक्ति के लिए गंभीर हालात उत्पन्न कर सकती है।