नेपाल में हिंदू राष्ट्र या लोकतंत्र क्या है भारत के लिए फायदेमंद? क्या सोचते है आम नेपाली भारत के लिये, एक्सपर्ट ने बताया ये….।

काठमांडू (नेपाल) : इतिहास में गुप्त वंश के खत्म होने के बाद ईरान, थाइलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और तिब्बत जैसे महत्वपूर्ण देश भारत से अलग हो गए। इन देशों के अलग होने के बाद केवल श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही अखंड भारत का हिस्सा थे, जो अब भारत से अलग है। वहीँ भारत के लिये नेपाल हिंदू धर्म में आस्था का प्रमुख केंद्र हैं और भगवान राम से भी इनका गहरा नाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, राम का विवाह जनकपुर में हुआ था, जो वर्तमान में नेपाल में है। इस तरह से भारत और नेपाल के सम्बन्ध प्रगाढ़ है। वहीँ अब भारत के दोस्त और पड़ोसी नेपाल के लिए पिछले कुछ दशक उथल-पुथल भरे रहे हैं। अभी भी पूरी तरह से स्थिरता नहीं है। समय-समय पर यहां हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग भी उठती रहती है।

नेपाल में हिंदू राष्ट्र बनना भारत के लिए अच्छा साबित हो सकता है। पूर्व राजनयिक सुखदेव मुनि ने द डिप्लोमैट के साथ बातचीत में अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा कि नेपाल में राजशाही की वापसी चीन को रोकने का अच्छा साधन हो सकता है। नेपाल में लगातार राजनीतिक अस्थिरता चीन को अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद देती है। एसडी मुनि से जब इस बारे में पूछा गया कि नेपाल कई बार चीन की ओर झुकता रहा है, फिर भी भारत में एक पक्ष उसका समर्थन क्यों करता है? इस पर उन्होंने कहा, ‘परंपरागत रूप से भारत देश नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र का समर्थन करता रहा है। लेकिन दुर्भाग्य से नेपाल की राजशाही कभी भी संवैधानिक तरीके से नहीं रही। 1960 से ही यह निरंकुश रही है। यही कारण है कि यह संसदीय लोकतंत्र के साथ नहीं चल सकी।’ उन्होंने यह भी बताया कि भारत के साथ संतुलन बनाने के लिए नेपाल की राजशाही अमेरिका, पाकिस्तान और चीन का साथ लेती रही। उनके अनुसार यहाँ लगातार राजनैतिक स्थिरता बनी रही, जिसके कारण नेपाल की ओली सरकार भारत के विरोध में खड़ी रहने के बावजूद भी भारत ने नेपाल से नाराजगी नहीं पाली, राजनाथ सिंह ने कहा नेपाल के साथ रोटी बेटी का सम्बन्ध है।

चीन का नेपाल पर बढ़ रहा है प्रभाव :

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मुनि ने आगे कहा, ‘पिछले दशक में भारतीय स्टैबलिशमेंट के कुछ वर्ग नेपाल में राजशाही की बहाली का समर्थन करते रहे हैं। क्योंकि नेपाल में अस्थिरता के साथ-साथ कम्युनिस्ट ताकतें मजबूत हैं जो भारतीय कूटनीति के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। इनसे निपटना हर दिन मुश्किल होता जा रहा है। राजतंत्र में शक्ति का केंद्र एक होगा, जबकि नेपाल के लोकतंत्र में कई शक्ति केंद्र हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि चीन का पड़ोस में बढ़ता प्रभाव खतरा है और इससे निपटना भारत के लिए मुश्किल हो रहा है। हालाँकि इसके प्रभाव से निपटने के लिये भारत लगातार अपने प्रयासों में जुटा हुआ है।

भाजपा के साथ रहे राजशाही के अच्छे संबंध :

अब यह माना जा रहा है कि पारंपरिक राजशाही और हिंदू राष्ट्र चीन के बढ़ते कदमों को रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में राजशाही हमेशा भारत में भाजपा शासन के साथ मित्रवत रही है। उन्होंने कहा, ‘1970-80 के दशक के दौरान नेपाल में राजपरिवार से संसदीय चुनावों में भारत के भाजपा नेताओं को समर्थन मिलने के उदाहरण हैं। नेपाल के राजपरिवार का भारतीय शाही परिवारों के साथ वैवाहिक संबंध भी है, जिनमें से कुछ भाजपा से भी जुड़े हुये हैं।’ नेपाल की आम जनता भी भारत के पक्ष में है, नेपाल के हालात भी पाकिस्तान जैसे खस्ताहाल हो चुके है औ वहां के अधिकतर लोग भारत में रहकर अपना व्यापार कर रहे है। नेपाल के लोगों के लिये भारत में किसी प्रकार की कोई रोकटोक नहीं है। उन्हें यहाँ आम भारतीय जैसी ही सुविधायें और सम्मान प्राप्त है।