रायपुर : ED के बाद अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीमें छापा मार रही है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने दूसरे दिन शुक्रवार को भी बड़ी कार्यवाही की है। जांच एजेंसी ने कारोबारी अनवर ढेबर के भाइयों के घर पर छापेमारी की है। ईओडब्ल्यू ने रायपुर महापौर एजाज ढेबर के साथ अख्तर ढेबर और जुनैद ढेबर के घर छापा मारा है। सुबह 6 बजे से 16 अधिकारी दबिश देकर जांच में जुटे हुये हैं। शराब घोटाला मामले में अनवर ढेबर के साथ अरविंद सिंह को EOW ने 4 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। वहीं बिहार से अरुणपति त्रिपाठी को कल यानी 11 अप्रैल दिन गुरूवार को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि शराब घोटाला मामले में कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। एसीबी और ईओडब्ल्यू ने अनवर ढेबर के वेनिंगटन होटल में भी दबिश दी है। घोटाले की जांच में दोनों टीमें लगी हुई है।
अरुणपति त्रिपाठी के साथ अनवर ढेबर और अरविंद सिंह कोर्ट में पेश :
शुक्रवार को एसीबी और ईओडब्ल्यू की गिरफ्त में आए अरुणपति त्रिपाठी के साथ कारोबारी अनवर ढेबर और अरविंद सिंह को कोर्ट पेश किया गया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनवर ढेबर और अरविंद सिंह को तीसरी बार रिमांड पर लेने की पूरी तैयारी की गई है, क्योंकि बिहार से अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद उसे भी रिमांड पर लिया जायेगा। तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने के संकेत अधिकारियों ने दिए है। गुरुवार को आबकारी विभाग के पूर्व सचिव अरुणपति (एपी) त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया। त्रिपाठी, बिहार के गोपालगंज के भोरे में अपने एक रिश्तेदार के यहां छिपे थे। शराब घोटाले को लेकर जांच तेज चल रही है।
दस्तावेज किए गए जब्त :
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टीम जिन स्थानों में छापे की कार्यवाही करने पहुंची थी, उन स्थानों से उसने दस्तावेज जब्त किए हैं। किसी को भी हिरासत में अभी तक नहीं लिया गया है। दस्तावेज किस प्रवृत्ति के हैं, स्पष्ट नहीं हो सका है। ईओडब्ल्यू की टीम ने सदर बाजार स्थित हवाला कारोबारी के ठिकाने से कई महत्वपूर्ण जब्त किए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू को शराब घोटाले की रकम को विदेश में निवेश करने की जानकारी मिली है। हालांकि जांच टीम ने अभी तक प्राप्त राशि की जानकारी नहीं दी है। मामले का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
अहम पदों पर रहे त्रिपाठी :
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वर्तमान में दूरसंचार विभाग सेवा के अधिकारी एपी त्रिपाठी कई पदों पर रह चुके हैं। वह छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के पूर्व एमडी भी रहे हैं। इन्हें यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद आइटीएस कैडर मिला था। वह रमन सिंह के समय प्रतिनियुक्ति पर आए थे। वर्ष 2018 में राज्य में सरकार बदलने के बाद भूपेश बघेल सरकार में उनकी रवानगी की चर्चाएं थीं, लेकिन आबकारी विभाग के नीति नियंता के रूप में विशेष सचिव पद पर बैठा दिया गया। वह भिलाई सेक्टर-9, निवासी हैं। उन पर भी इस घोटाले को लेकर जांच चल रही है।



