पाकिस्तान में हिंदू मंदिर को गिराया, मॉल का निर्माण शुरू, यहाँ मंदिरों को कहा जाता है “काफिरों का घर”।

पेशावर (पाकिस्तान) : पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों पर अत्याचार लगातार जारी है, आज भी पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों के अत्याचारों की मानवीय सीमा पार कर दी जाती है, यहाँ सबसे ज्यादा हिन्दू प्रताड़ित है। वहीँ अब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफगानिस्तान सीमा के पास एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया है। इसकी जगह पर वाणिज्यिक परिसर का निर्माण शुरू हो गया है। खैबर मंदिर’ सीमावर्ती शहर लैंडी कोटाल बाजार में स्थित था, लेकिन कुछ साल में यह धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा था। यह मंदिर हिंदुओं के भारत चले जाने के बाद से 1947 से लेकर आज तक बंद था। मंदिर की जगह पर निर्माण करीब 10-15 दिन पहले शुरू हुआ था। विभिन्न प्रशासनिक विभागों के अधिकारियों ने या तो हिंदू मंदिर के अस्तित्व के बारे में जानकारी होने से इनकार किया या दावा किया कि निर्माण नियमों के अनुसार हो रहा है, ऐसा कहा। पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में करीब 150 साल पुराने इस हिंदू मंदिर को पुराना और खतरनाक ढांचा बताते हुए ध्वस्त कर दिया गया था।

वहीँ बाबरी विध्वंस और राम मंदिर निर्माण के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट सामने आ रही है, दूसरी तरफ सीमा अपने प्रेमी सचिन के लिए मुस्लिम धर्म को छोड़कर हिंदू बन गई है और यही बात पड़ोसी मुल्क में बैठे कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही है। वे इतनी बौखलाहट में हैं कि हिंदू मंदिरों को लगातार निशाना बना रहे हैं। इस मामले के बाद पाकिस्तान की काफी फजीहत भी हुई। पहले भी भारत से क्रिकेट हारने के बाद पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हमले की कई घटनायें सामने आई है। पाकिस्तान की घटिया सोच और आतंकवाद जगजाहिर है।

मंदिर को धीरे-धीरे कर दिया क्षतिग्रस्त :

जानकारी के अनुसार लैंडी कोटाल के एक प्रमुख कबायली पत्रकार इब्राहिम शिनवारी ने दावा किया कि यहां ऐतिहासिक मंदिर था। मंदिर लैंडी कोटाल बाजार के केंद्र में स्थित था, जिसे 1947 में हिंदू परिवारों के भारत चले जाने के बाद बंद कर दिया गया था। 1992 में भारत में अयोध्या में ढांचा ध्वस्त होने के बाद कुछ मौलवियों और मदरसों ने इसे आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था। पाकिस्तान हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति के हारून सरबदियाल ने कहा कि गैर-मुसलमानों के लिए धार्मिक महत्व की ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। जबकि दूसरी तरफ कट्टरपंथी लगातार हिन्दुओं को निशाना बनाने से नहीं चुक रहे है।

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इब्राहिम ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूर्वजों से इस मंदिर के बारे में अनेक कहानियां सुनीं थी, उन्होंने कहा कि ‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि लैंडी कोटाल में ‘खैबर मंदिर’ नाम का एक धर्मस्थल था।’ पाकिस्तान हिंदू मंदिर प्रबंधन समिति के हारून सरबदियाल ने जोर देकर कहा कि गैर-मुसलमानों के लिए धार्मिक महत्व की ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करना जिला प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है।

गैर मुस्लिमों पर अत्याचार की लिस्ट :

बीते वर्ष पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें ईद-अल-अजहा के दौरान अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने से न सिर्फ रोका गया, बल्कि 600 से ज्यादा लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था। वहीँ इसाई, बलूच, सिक्ख, कश्मीरी, सिन्धी, अहमदिया, लगभग सभी प्रताड़ित है, इनकी बहु बेटियों का अपहरण कर जबरन निकाह करवाया जाता है, बच्चियों पर अत्याचार और बलात्कार, संपत्तियों को नुकसान पहुँचाना, जबरिया घर में घुसकर मारपीट करना, उनकी आस्था पर चोट करना ये सब पाकिस्तान में थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले वर्ष क़ुरान के कथित अपमान की घटना को लेकर “आरोप लगने के तुरंत बाद आगजनी शुरू कर दी गई। बाईबल जला दी गई और चर्चों को जलाना शुरू कर दिया। लोगों के घर भी जलाए गये और लोग अपने ही घरों में सुरक्षित नहीं हैं और वो सुरक्षित जगहों पर चले गये।”

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