इसराइल/ईरान युद्ध : ईरान ने रविवार को इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया है। उसके इस हमले का इजरायल भी जवाब देने को तैयार है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वो इससे दूर रहे। दमिश्क में ईरान के दूतावास पर हवाई हमले के कुछ दिनों बाद ईरान ने रविवार को इज़राइल पर पहला सीधा हमला किया है। ईरान ने इज़राइल की ओर ड्रोन और मिसाइलों की बौछार कर दी, जिससे मिडल ईस्ट क्षेत्र में एक बड़े संकट का खतरा पैदा हो गया है, जो गाजा में युद्ध के कारण पहले से ही तनाव में है। इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान से खतरों के खिलाफ इजरायल की रक्षा में मदद करने की कसम खाते हुए, इज़राइल की सुरक्षा के लिए अपने “आयरनक्लाड” समर्थन की पुष्टि की है।
सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर इजराईली हमले में ईरान के दो जनरल और पांच अधिकारी मारे गए हैं। ईरानी अधिकारियों की तरफ से यह जानकारी दी गई है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इजराइल की तरफ से ईरान के सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं। इजराईल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद माना जा रहा है कि अब मध्य पूर्व में टकराव और बढ़ेगा। ईरान और उसके सहयोगी इजरायल को निशाना बना सकते हैं। इस बीच यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी इजराइल की ओर लंबी दूरी की मिसाइलें दाग रहे हैं। जवाबी कार्यवाही में इसराईल आक्रामक रुख में है।
क्या करता है ईरान :
यहां यह भी जानना जरूरी है कि, ईरान गाजा और लेबनान में इजराइल से लड़ने वाले आतंकी समूहों का समर्थन करता है। गाजा में करीब छह महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद से लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्ला के लड़ाकों और इजराइल के बीच संघर्ष बढ़ा है। गाजा पर शासन करने वाले हमास ने सात अक्टूबर को इजराइल पर हमला किया था। हमास को भी ईरान का समर्थन हासिल है। हमास एक आतंकवादी संगठन है, जबकि गाजा में आम लोग मारे जा रहे है।
इजराइल ने किया इनकार :
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इजराइल ईरानी ठिकानों पर हमले को बमुश्किल ही स्वीकार करता है। उसने सीरिया में हुए इस हमले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि सेना के एक प्रवक्ता ने दक्षिण इजराइल में एक नौसेना अड्डे पर सोमवार तड़के हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इस बवाल के बाद युद्ध में अन्य देश भी कूद सकते है। युद्ध में क्षमता के हिसाब से ईरान इसराईल से ज्यादा सक्षम है, खाड़ी देशों में ईरान ही सबसे ज्यादा मजबूत इस्लामिक देश है, जिसके कूदने के बाद भारत भी धर्म संकट में आ गया है। अब तक ईरान इन मामलों में शिया-सुन्नी विवाद के कारण हमेशा अलग रहा है, यह इसराईल के लिये अब बड़ी मुसीबत में डालने वाली बात है।



