नगद राशि लेकर निकलने से क्यों डर रहे है लोग, सामने आई ये खास वजह….।

रायपुर : चुनावी आचार संहिता लगते ही नगद लेकर निकलने वालों पर पुलिस की कार्यवाही तेज हो गई है। ऐसा हर बार चुनाव के समय होता ही है, लेकिन लोगों के लिये मुसीबत खड़ी हो जाती है, हालांकि ऐसा वर्षभर नहीं होता है, तो सवाल उठता है आचार संहिता में ऐसा क्यूँ होता है? इसका जवाब है नेताओं द्वारा धन खर्च कर चुनाव को प्रभावित ना किया जाये। अब इसका इसका असर राजधानी में जमीन और मकानों के बड़े सौदों पर पड़ रहा है। बीते एक माह से रायपुर में 50 लाख से अधिक की संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हुई है।

कारण यह है कि शहर में कई क्षेत्रों की जमीन का बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से दो से तीन गुना तक पहुंच गया है। शहर के 60 फीसदी क्षेत्रों में जमीन का गाइडलाइन रेट 1200 रुपए वर्गफीट के भीतर है। जबकि, जमीन की कीमत दो हजार से तीन हजार तक पहुंच गई है। मकान की बात करें तो उसका बाजार मूल्य अभी भी 2000 रुपए प्रति वर्गफीट के आसपास है। जबकि, बाजार में कीमत अभी 4300 से अधिक चल रही है। गाइडलाइन दर बढ़ने के पहले मार्च में जमकर रजिस्ट्री हुई, लेकिन फिर भी बड़े सौदे नहीं हुए है। वहीँ ज्यादा रकम होने पर पुलिस पकड़कर सवाल करती है, संतुष्टिजनक जवाब ना मिलने पर पुलिस रकम को जब्त भी कर लेती है।

त्योहारी सीजन से रहती है उम्मीद :

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पंजीयन विभाग को चैत्र नवरात्रि में जमीन और मकान की रजिस्ट्री ज्यादा होने की उम्मीद रहती है। हर बार कार्यालय का समय और एडवांस बुकिंग का स्लॉट भी बढ़ाया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं देखा गया। रेरा प्रोजेक्ट और शासकीय एजेंसियों के भवनों और प्लॉट की रजिस्ट्री को छोड़कर यहां होने वाले सौदे में गाइडलाइन में तय राशि का चेक से भुगतान होता है। स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए रजिस्ट्री में भी उसकी कीमत गाइडलाइन दर से दिखाई जाती है। जबकि असल में सौदा दोगुने में होता है। जिससे सरकार को अरबों रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है।