कस्टम मिलिंग घोटाला : मुख्य अभियुक्त रोशन चंद्राकर अभी तक गिरफ्त से बाहर, मनोज सोनी ने सांठगाँठ कर दिया था घोटाले को अंजाम।

रायपुर : बीते 5 साल की सत्ता में कांग्रेस के शासन में काफी घोटाले सामने आ गये है, जिसमें से वर्तमान में कस्टम मिलिंग घोटाले में मनोज सोनी फंसा हुआ है। मार्कफेड और नान के एमडी रहे मनोज सोनी की गिरफ्तारी के बाद ईडी ने एक बयान जारी किया है। जारी बयान के मुताबिक मनोज सोनी सरकार में प्रतिनियुक्ति पर थे और अक्टूबर, 2022 से अक्टूबर, 2023 तक राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात थे।

अपने पद पर रहते हुए मनोज सोनी ने राइस मिलरों को कस्टम मिलिंग के लिए डीओ जारी करने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर राइस मिल एसोसिएशन के साथ साठगांठ कर चावल घोटाले को अंजाम दिया है। मार्कफेड के एमडी के कार्यकाल में मनोज सोनी ने राइस मिलरों से अवैध वसूली करने एक संगठित प्रणाली विकसित की थी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इसमें रोशन चंद्राकर की मिलीभगत भी सामने आ रही है, उसे पूर्व मुख्यमंत्री का खास बताया गया है, मामले में रोशन चंद्राकर से भी पूछताछ की गई है, लेकिन वह अभी तक गिरफ्त से बाहर है। वहीँ इस मामले में दबी जुबान से बताया जा रहा है, कि रोशन चंद्राकर ही मुख्य घोटालेबाज है, जबकि मनोज सोनी सिर्फ घोटाले को अंजाम देने वाला मोहरा है।

ईडी ने आईटी के इन्वेस्टिगेशन विंग द्वारा दायर अभियोजन शिकायत के खुलासे के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि छत्तीसगढ़ राइस मिल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ लिमिटेड (मार्कफेड) के अधिकारियों के साथ मिलीभगत की और दुरुपयोग की साजिश रची। विशेष प्रोत्साहन और करोड़ों रुपये की रिश्वत अर्जित की। बयान में सोनी की वसूली की पूरी प्रणाली को बताया गया है। ईडी ने आईटी ने अभी इस मामले में कुछ भी बयान जारी नहीं किया है और मामले की जाँच जारी है।

दर बढ़ाने के बाद कमीशन का खेल :

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खरीफ वर्ष 2021-22 में कस्टम मिलिंग करने पर राइस मिलरों को 40 रुपये प्रति क्विंटल राज्य सरकार भुगतान करती थी। इसके बाद कस्टम मिलिंग की राशि तीन गुना 120 रुपये कर दिया गया। ईडी ने जांच में पाया कि कस्टम मिलिंग की दर बढ़ाए जाने के बाद मनोज सोनी ने राइस मिल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ मिलकर कस्टम मिलिंग के लिए डीओ जारी कराने नकद राशि में कमीशन लिया गया।

आरोप है कि कस्टम मिलिंग की दर जब 40 रुपये थी, तब मनोज सोनी राइस मिलर एसोसिएशन के साथ मिलकर नकद में 20 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन लेता था। नकद राशि का भुगतान करने वाले चावल मिलर का विवरण जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन द्वारा संबंधित जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) को भेजा गया था। मिलर के बिल प्राप्त होने पर डीएमओ ने संबंधित जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन से प्राप्त विवरण की जांच की। फिर यह जानकारी मार्कफेड के मुख्य कार्यालय को दी गई। मार्कफेड एमडी ने केवल उन्हीं राइस मिलर के बिलों के भुगतान की मंजूरी दी, जिन्होंने एसोसिएशन को नकद राशि दी थी। दर बढ़ने के बाद कस्टम मिलिंग में प्रति क्विंटल 60 रुपये कमीशन लिया गया। इस तरह से मनोज सोनी ने राइस मिल एसो. के पदाधिकारियों के साथ मिलकर सौ करोड़ रुपये वसूल किए है। इस घोटाले में 100 करोड़ का घपला सामने आया है।

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