स्वास्थ्य : गर्मी अपने चरम पर है, जहाँ गहरे रंग के कपडे ही बीमार बनाने के लिये पर्याप्त है, वहीँ लोग भीषण गर्मी में काम करने को मजबूर है, ज्यादा गर्मी से एसी भी फटने लगे है। वहीँ उत्तर भारत में इस समय सबसे ज्यादा भीषण गर्मी पड़ रही है। दिल्ली के कई क्षेत्रों में तापमान 52 डिग्री के पार पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि सूरज सुबह से ही आग उगलने लगता है। लोगों का गर्मी से बुरा हाल हो रहा है। अस्पतालों में गर्मी से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हीटवेव से मानसिक समस्याओं से परेशान लोगों की संख्या जाता बढ़ती ही जा रही है। हीट स्ट्रैस, गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक का खतरे के बारे में तो आप जानते होंगे, लेकिन अत्यधिक गर्मी मानसिक स्वास्थ्य को भी खराब कर रही है। गर्मी के कारण अस्पतालों में सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। ये ऐसी स्थिति होती है जब हमारा दिमाग शरीर को सिग्नल नहीं भेज पाता है। इससे शरीर किसी प्रतिकूल मौसम के हिसाब से काम नहीं कर पाता है। ये स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
गर्मी से दिमाग खो बैठता है कंट्रोल :
कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय में हुए द कन्वरसेशन इस बात का जिक्र किया गया है कि कैसे बढ़ती गर्मी मानसिक बीमारियों को ट्रिगर कर रही है। जिसमें सिज़ोफ्रेनिया वाले लोगों के लिए अस्पताल में भर्ती होने और यहां तक कि गर्म परिस्थितियों में मौत की संभावना बढ़ रही है। द कन्वरसेशन में कहा गया है कि निचले सामाजिक आर्थिक समूहों, नस्लीय लोगों और बेघर लोगों को गर्म परिस्थितियों के संपर्क में आने का अधिक खतरा होता है। नीचले तबके के लोग इसके ज्यादा शिकार हो रहे है, वहीँ कूलर भी वातावरण को ठंडा कर पाने में असमर्थ है।
क्या है सिज़ोफ्रेनिया? :
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सिज़ोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी है जो दिमाग तक सूचना के पहुंचने को बाधित करती है। मस्तिष्क का जो हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित होता है, उसमें हमारे थर्मोरेगुलेटरी कार्य भी होते हैं। यह वह हिस्सा है जो हमें बताता है कि हम बहुत गर्म हैं और हमें पसीना आने लगता है या हम बहुत ठंडे हैं और गर्म रहने के लिए हमें कांपना चाहिए। ये सब बातों का सिग्नल भीषण गर्मी के कारण दिमाग तक नहीं पहुँच पाता है।
क्यों खतरनाक है सिज़ोफ्रेनिया? :
सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग नॉर्मल लोगों की तरह अत्यधिक गर्मी पर प्रतिक्रिया करने में सक्षम नहीं होते हैं। उनका शरीर उन्हें सावधानी बरतने के लिए नहीं कहता है। इसके अलावा, सिज़ोफ्रेनिया के इलाज में जिन दवाओं का उपयोग किया जाता है वो दवाएं भी शरीर के मुख्य तापमान को बढ़ाती हैं। इसका मतलब यह है कि दवा लेते समय, सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग नॉर्मल लोगों की तुलना में हीट स्ट्रैस और स्ट्रोक के खतरे के पास होते हैं। जिससे इनकी मौत भी हो जाती है।
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