मुस्लिम शरणार्थी हसन 10 साल से रह रहा था भारत में, जब पुणे पुलिस ने उसे भारत छोड़ने का नोटिस दिया तो चला गया कोर्ट, और फिर….।

मुंबई (महाराष्ट्र) : एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में सबसे ज्यादा ज्यादा अवैध शरणार्थी भारत में रहते है। यह भारत देश को दुनिया में सबसे अधिक अवैध अप्रवासियों वाला देश बनाता है। बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान, व्यापक बलात्कार और नरसंहार से शरण लेने के लिए कम से कम 1 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में घुस आए, जो आज तक रह रहे है, जिससे देश की संप्रभुता को काफी खतरा भी है। भारतीय गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले दशक में ही कम से कम 1 करोड़ चालीस लाख बांग्लादेशी भारत में घुस आए है। वीजा खत्म होने के बाद भी याचिकाकर्ता खालिद गोमेई मोहम्मद हसन भारत में निर्धारित अवधि से ज्यादा समय से रह रहा है। इस पर पुणे पुलिस ने उसे भारत छोड़ने का नोटिस दिया था।

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इसके चलते जबरन निर्वासन से बचने के लिए खालिद ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और और पुणे पुलिस के ‘भारत छोड़ो नोटिस’ को चुनौती दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारत में अवैध रूप से रह रहे यमन से आये इस मुस्लिम शरणार्थी को कड़ी फटकार लगाई है। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यमनी नागरिक को भारतीय आतिथ्य का अनुचित लाभ उठाने के बजाय पाकिस्तान या किसी खाड़ी देश में चले जाना चाहिए। आपको बता दें कि इस तरह के अप्रवासी शरणार्थी को भारतीय कोर्ट में सामान्यतया याचिका लगाने का अधिकार नहीं है, बल्कि उसके साथ अपराध होने की दशा में वह कानून का साथ ले सकता है।

इस मामले को लेकर जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने कहा, भारत के उदारवादी रवैये का अनुचित लाभ न उठाएं। पीठ ने कहा, “आप पाकिस्तान या किसी खाड़ी देश में जा सकते हैं। भारत के उदार रवैये का दुरुपयोग न करें।” वहीँ क्या किसी देश में कोई बिना नागरिकता लिये स्थायी तौर पर रहने का क़ानूनी अधिकार पा सकता है?

10 साल से भारत में है हसन :

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हसन परिवार के साथ यमन गृहयुद्ध के चलते पिछले दस वर्षों से भारत में रह रहे हैं। इस दौरान दंपति को एक बेटी पैदा हुई। सबसे पहले हसन मार्च 2014 में स्टूडेंट वीजा पर भारत आया और उनकी पत्नी मेडिकल वीजा पर 2015 में भारत आईं। उनके वीज़ा क्रमशः फरवरी 2017 और सितंबर 2015 में समाप्त हो गए। लेकिन इसके बावजूद दोनों ने भारत नहीं छोड़ा। इस साल पुणे पुलिस ने उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस दिया है।

सुनवाई के दौरान हसन ने कम से कम तब तक उन्हें डीपोर्ट करने के खिलाफ सुरक्षा की अपील की जब तक कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के लिए वीजा नहीं मिल जाता। हसन की ओर से तर्क दिया गया कि अभी यमन लौटना अमानवीय होगा। इस पर पुणे पुलिस की ओर से सुझाव दिया गया कि याचिकाकर्ता हसन शरणार्थी कार्डधारकों को स्वीकार करने वाले अन्य 129 देशों में से किसी एक में जा सकते है। गौरतलब है कि यमन में गंभीर मानवीय संकट के चलते 45 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं। अब इस मामले को लेकर खालिद गोमेई मोहम्मद हसन के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जा सकती है।

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