कांकेर : रैबीज एक खतरनाक वायरस है जो प्रायः किसी संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से फैलता है। रैबीज़ वायरस व्यक्ति के मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करता है। शुरुआती लक्षण बुखार जैसे हो सकते हैं और इनमें कमज़ोरी, सिरदर्द और बुखार शामिल हो सकते हैं। रैबीज़ लक्षण उस समय होते हैं, जब रैबीज़ वायरस दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड में पहुंच जाता है, आमतौर पर जब व्यक्ति को किसी जानवर द्वारा काटा जाता है, तो ऐसा 30 से 50 दिनों के भीतर होता है। हालांकि, यह अंतराल 10 दिन से लेकर एक वर्ष से अधिक समय के लिए हो सकता है। इससे बचाव के रैबिज का इंजेक्शन जल्द से जल्द लगवाना बेहतर होता है, ज्यादा से ज्यादा 24 से 48 घंटे के अन्दर इंजेक्शन लगवाना जरुरी होता है।
ऐसे ही पागल कुत्ते द्वारा गाय को काटने का एक मामला कांकेर जिले के पखांजूर से मामला सामने आया है। यह मामला काफी हैरान करने वाला है। जानकारी के अनुसार पी व्ही 4 गांव के एक युवक ने ग्रामीणों की जान संकट में डाल दी है। दरअसल, जिन दो गायों को पागल कुत्ते ने काटा था उस युवक ने उनके दूध से बनी मिठाई को प्रसाद के रूप में पूरे गांव को खिला दिया था। इसके बाद उसने खुद रैबीज का इंजेक्शन लगवा लिया था।
जब उन दोनों बीमार गायों की मौत हो गई तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ और पूरे गांव में हड़कंप मच गया। गायों की मौत के कुछ दिनों के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि जो गायें स्वर्ग सिधार गईं हैं, उनका जिम्मेदार एक कुत्ता है, क्योंकि गायों को पागल कुत्ते ने काटा था। क्योंकि जिस वक्त गायें रैबीज का शिकार हुईं उस वक्त उनका मालिक उनका दूध निकालकर लोगों को ना सिर्फ बांट रहा था, बल्कि सोसायटी में बेच भी रहा था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को जानकारी हुई तो विभाग ने आनन-फानन में गांव में शिविर लगाकर सभी ग्रामीणों को रैबीज का इंजेक्शन लगवाया है। इसमें कुछ और लोगों के बारे जानकारी जुटाई जा रही है।
1 जून को गांव के तीन घरों में हुई थी पूजा :
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मामले को लेकर सामने जानकारी आई है कि 1 जून को गांव के तीन घरों में पूजा हुई थी। तब ग्रामीणों ने प्रसाद के रूप में मिठाई खाई थी। इस पूजा के दो महीने बाद दोनों गायों की मौत हो गई थी। तब ग्रामीणों को पता चला कि, इन दोनों गायों को पागल कुत्ते ने काटा था और प्रसाद बनाने के लिए उन्होंने उनका ही दूध खरीदा लिया था, जिसकी जानकारी पशु पालक को थी। फिर यह बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और स्वास्थ्य अमले को सूचना मिली। तब स्वास्थ्य विभाग ने गांव में शिविर लगाकर ग्रामीणों को रैबीज का इंजेक्शन लगाया है।
पशु पालक के खिलाफ नहीं की गई कार्यवाही :
घटना के बाद अभी तक ग्रामीणों के शरीर में किसी तरह का कोई इंफेक्शन नहीं देखा गया है एहतिहात बरतने के लिए इंजेक्शन लगवाया गया है। वहीं अभी भी यह पता लगाया जा रहा है कि, पूजा में अन्य कौन-कौन शामिल हुआ था, जिनको इस बात की जानकारी नहीं है। ऐसे में इस बड़ी लापरवाही से संक्रमण फैल सकता था और हो सकता था कि किसी की संक्रमण से जान भी चली जाती। हालांकि, अब तक पशु पालक के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वहीँ इस घटना के बाद किसी अनहोनी को लेकर ग्रामीण डरे हुये है।
सामने आया ये पूरा मामला :
इस मामले में हैरान करने वाली बात ये है कि पशु मालिक को ये जानकारी थी कि गायों को डॉग ने काटा है, उसने फिर भी उनका इलाज करवाने के बजाए खुद चोरी छिपे अस्पताल पहुंचकर रैबीज का इंजेक्शन लगवा लिया। गांव वालों को इन सभी बातों की जानकारी लगने के बाद उन्होंने हंगामा करना शुरु किया।
ग्रामीणों ने कहा :
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”दोनों गाय को लगभग दो माह पहले पागल कुत्ते ने काटा था, लेकिन गांव के लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी। इसका पता तब चला जब उन दोनों लोगों की गायों की मौत हो गई। तब जाकर इसकी जानकारी हुई। तब तक गाय मालिक सोसायटी में दूध बेचकर पैसे कमाता रहा।”
अब इस मामले के सामने आने के बाद अब पूरा गांव दूध बेचने वाले के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहा है, क्योंकि यदि उसने वक्त रहते लोगों को इस बात की जानकारी दे दी होती तो इस तरह की परेशानी किसी को नहीं उठानी पड़ती।
हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि रैबीज इंफेक्टेड पशु के दूध से वायरस नहीं फैलता है, फिर भी एहतियातन सभी को रैबीज इंजेक्शन का एक-एक डोज लगा दिया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण सहम गये है।
”इससे कोई बीमारी नहीं होती. रैबीज वायरस न फैले और लोगों की सुरक्षा के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है। इसकी जानकारी बीते दिनों ग्रामीणों द्वारा दी गई थी।”- प्रीतिलता दास,आरएमए,कापसी स्वास्थ्य केंद्र



