रायपुर : रेलवे में विस्तार को लेकर कई बार ट्रेने रद्द हो चुकी है, तो कई बार यात्री परेशान हो चुके है वहीँ रेल यात्रियों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। झारखंड में रेल हादसे के बाद आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें पहले से ही रद्द है, वहीं अब राजनांदगाव-कलमना रेल खंड के बीच तीसरी रेलवे लाइन को कलमना रेलवे स्टेशन से जोड़ने इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और प्री नान-इंटरलॉकिंग का काम कराने रेलवे ने एक साथ 72 एक्सप्रेस व मेमू ट्रेनों को चार से 20 अगस्त तक रद्द कर दिया है। बार – बार किस चीज का काम हो रहा है, ये यात्रियों की समझ से परे है। वहीँ वहीँ रेलवे विभाग मालगाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा है।
अब रेलवे के इस फैसले ने रक्षाबंधन में घर जाने की तैयारी कर चुके यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। सबसे अधिक प्रभाव बिलासपुर से नागपुर के बीच चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस के रद्द होने से पड़ेगा। वहीं मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत आसपास के अन्य राज्यों में जाने वाले यात्रियों को परेशान होना पड़ेगा। राजनांदगांव-नागपुर तीसरी रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत 228 किलोमीटर तीसरी रेल लाइन का निर्माण 3540 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। निर्माण कार्य कब चलेगा कह पाना मुश्किल है।
पिछले तीन महीने से ट्रेनें लगातार रद्द :
बीते दो वर्षों से रक्षाबंधन पर ही ट्रेनें रद्द होने से त्यौहार मनाने वालों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेनों के रद्द होने का सिलसिला लंबे समय थम नहीं रहा है। कभी दूसरी तो कभी तीसरी लाइन को जोड़ने समेत अधोसंरचना का काम कराने के नाम पर रायपुर से गुजरने वाली ट्रेनों को पिछले तीन महीने से लगातार रद्द किया जा रहा है। इस बार एक साथ 72 ट्रेनों (416 फेरे) को रद्द होने से पांच लाख से ज्यादा यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ेगी, वहीँ लगातार काम होने के बावजूद इतने साल हो गये फिर भी काम खत्म नहीं हो रहा है, वही सवाल यात्रियों के मन में है। राजनांदगांव – कलमना को लेकर हमेशा जानकारी सामने आती रहती है।
अब जिन यात्रियों की यात्रा रद्द हो गई है, उन्हें कंफर्म टिकट का रिफंड लेने के लिये अलग से दौड़ भाग करना होगा। रायपुर से गुजरने वाली हर मार्ग की ट्रेनें पहले से पैक हैं। ऐसे में लंबी दूरी की ट्रेनों के रद्द होने के बाद यात्रियों के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। उन्हें यदि अपनी यात्रा करनी है तो बस, विमान या फिर निजी वाहन से जाना होगा। इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करना पड़ेगा और जाने-आने में असुविधा भी होगी। ऐसे मौके का फायदा बस संचालक भी उठाते है।
28.86 करोड़ रुपए होंगे रिफंड :
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72 ट्रेनों के रद्द होने और पांच को रास्ते में समाप्त और 20 ट्रेनों के परिवर्तित मार्ग से चलाने के रेलवे के फैसले कारण लगभग चार लाख 32 हजार टिकटें रद्द हुई है। इससे रेलवे को लगभग 28 करोड़ 86 लाख रुपए रिफंड करना पड़ेगा। सात से 20 अगस्त तक ट्रेनों के पहिए थमने से लाखों यात्रियों को अपना सफर रद्द करना पड़ा है। यह सिर्फ आरक्षित टिकट वालों का आंकड़ा है। त्यौहार को लेकर यात्रीगण पहले से ही मुसीबत में है।
इसके अलावा जनरल टिकट लेकर इन ट्रेनों में सफर करने वालों की संख्या 20 लाख से अधिक होगी, वहीँ इसमें तो 10 गुना ज्यादा मुसीबत खड़ी हो गई है, क्यूंकि रेलवे लोकल डब्बे बंद कर चुका था बाद में यात्रियों के आक्रोश के कारण फिर से लगाना शुरू कर रह है, जिसमें समय लगेगा। महीनों पूर्व इन यात्रियों ने टिकट आरक्षित कराई थी, लेकिन इन्हें अब अपनी पूरी योजना बदलनि पड़ी है। ऐसे हालात में रेलवे को कोसते हुए यात्री टिकट काउंटर और अफसरों के कार्यालय में जाकर पूछने लगे हैं कि साहब कौन सी ट्रेन चलेगी? यह तो बता दो। यह सुनकर अफसर भी ठीक से जवाब नहीं दे पा रहे है।
नहीं मिल रहा दूसरे ट्रेनों में कंफर्म बर्थ :
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थोक में ट्रेनों के नहीं चलने की सूचना मिलते ही यात्री दूसरी ट्रेनों में आरक्षित बर्थ खंगालने में जुट गए हैं, लेकिन अधिकांश ट्रेनों में पहले से सभी बर्थ फुल होने से राखी पर्व पर उनका घर जाना आसान नहीं है।जनरल टिकट लेकर इन ट्रेनों में सफर करने वालों की संख्या 20 लाख से ज्यादा है,जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी, छत्तीसगढ़ और गीताजंली एक्सप्रेस जैसी अहम ट्रेनें के साथ मेमू ट्रेनों को रद्द होने से लोकल में यात्रा करने वाले लोग भी हलाकान हो रहे है। मुसीबत काफी बढ़ गई है।
वहीँ नाइट एक्सप्रेस व पैसेंजर आठ अगस्त तक किरंदुल नहीं जायेगी। आंध्रप्रदेश व ओडिशा में हो रही भारी बारिश और नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के चलते रेलवे ने यह फैसला लिया है। दंतेवाड़ा से किरंदुल तक यात्री रेल सेवा बंद रहेगी। यह नाइट एक्सप्रेस व पैसेंजर दंतेवाड़ा तक चलाई जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 8 अगस्त तक दोनों ट्रेनों को दंतेवाड़ा से किरंदुल तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
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