कोरबा : चर्चित सलमा सुल्ताना हत्याकांड के मुख्य आरोपी मधुर साहू को बिलासपुर हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। मामले में हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर आरोपी को नियमित जमानत दी है। इस केस को लेकर राज्य काफी हलचल हुई थी। अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट के जज पार्थ प्रतीम साहू के न्यायालय ने मधुर साहू को जमानत को दी है। कोर्ट में आरोपी मधुर साहू के वकील ने कहा कि उनके आवेदक मधुर साहू को फंसाया गया है। कोरबा पुलिस ने आरोप पत्र के साथ डीएनए टेस्ट रिपोर्ट भी दाखिल की थी। जांच रिपोर्ट में 13 में से केवल 1 एसटीआर डीएनए से मैच हुआ। मधुर को जमानत मिलने का यही सबसे बड़ा कारण बना। दरसअल, कोरबा के कुसमुंडा क्षेत्र की रहने वाली न्यूज एंकर सलमा सुल्तान रहस्यमयी ढंग से 2018 में लापता हुई थी, इसके 2 महीने बाद सलमा के परिजनों ने कुसमुंडा पुलिस थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की जांच और तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चल पाया था।
ये हुई थी घटना :
इस घटना को पूरे 5 साल गुजर गए, लेकिन इसके बीच सलमा का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच सलमा के फ्रेंड और जिम संचालक बिलासपुर के रहने वाले मधुर साहू के साथ सलमा के प्रेम संबंध की जानकारी पुलिस को मिली। पुलिस को पता चला कि मधुर बिलासपुर से आकर कोरबा में जिम चला रहा था। साथ ही उसकी जान पहचान सलमा से भी थी। इसके बाद पुलिस ने मधुर की नौकरानी से पूछताछ की तो उसने पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठाते हुए मामले का पूरा खुलासा कर दिया और बताया कि सलमा की हत्या 2018 में की गई थी। इस हत्याकांड में सलमा का दोस्त जिम संचालक सहित कुछ दूसरे युवक भी शामिल थे। इसी आधार पर पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में ले लिया।
फिर कड़ाई से पूछताछ में संदेहियों ने सलमा की हत्या कर उसके शव को कोरबा-दर्री मार्ग पर स्थित भवानी मंदिर के पास दफनाने की बात कबूल की थी। इस घटना को अंजाम देने के बाद से ही मुख्य आरोपी जिम संचालक फरार हो गया था। जून महीने में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि जिस जगह पर सलमा को दफनाया गया था, अब उस जगह पर फोरलेन सड़क बन गई है। पुलिस ने शव निकालने के लिए कोर्ट से परमिशन लिया और फिर खुदाई कर कंकाल को निकालकर DNA के लिए भेजा गया था।
सलमा हत्याकांड में मधुर साहू को जमानत, न्यूनतम 8 एसटीआर का डीएनए से मेल खाना जरूरी :
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इस मामले को लेकर मधुर साहू की ओर से एडवोकेट देवर्षि ठाकुर तो शासन की ओर से अधिवक्ता केशव कुमार गुप्ता ने पैरवी की। आरोपी मधुर साहू के अन्य अधिवक्ता कमलेश साहू ने बताया कि ”आपराधिक मामलों में फॉरेंसिक उपयोग में डीएनए प्रोफाइलिंग का सबसे आम प्रकार “एसटीआर” (शॉर्ट टेंडम रिपीट) विश्लेषण कहलाता है। एसटीआर डीएनए के अलग-अलग तत्व होते हैं। आवश्यकता के अनुसार डीएनए परीक्षण के लिए जिस व्यक्ति का सैंपल लिया गया है, उसके साथ मृतक के डीएनए का कम से कम 8 एसटीआर मैच होना चाहिए, तभी दो लोगों के बीच के मातृत्व या पितृत्व के संबंध को स्थापित किया जा सकता है। ”
मौजूदा मामले में 13 एसटीआर में से केवल एक ही मैच हुआ है:
”कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता कि जो कंकाल बरामद हुए थे वह तथाकथित मृतका सलमा के हैं।” यह दलील सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को बेल दे दी है। आरोपी को ₹25000 का बांड भरने को भी कहा गया है, हालांकि कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित पक्ष असंतुष्ट है। आरोपी की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है। इस केस में सबूतों के आभाव के चलते आरोपी को जमानत मिल गई है।
”इस मामले में पुलिस के पास कोई ऐसा सबूत नहीं था जिससे बिना पर ये कहा जाए कि जो हड्डियां मिली और जो हत्या हुई वो मेरे पक्षकार ने की. इस संबंध में अन्वेषण करते हुए जिन हड्डियों को ये बताने का प्रयास किया गया कि हड्डियां सलमा सुल्ताना की है, उसके संबंध में पुलिस के द्वारा जो डीएनए कराया गया. उसकी माता के डीएनए से मैच कराने का प्रयास किया गया. वो डीएनए के जो एसटीआर हैं, एक व्यक्ति का जब डीएनए होता है तब जो एसटीआर मिलते हैं. जो संरचना मिलती है अनुवांशिकता के तौर पर जो माता पिता होते हैं. उस एसटीआर में केवल एक ही एसटीआर मैच हुआ”. : कमलेश साहू, अधिवक्ता
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