महिंद्रा का मोहम्मद से सामने आया कनेक्शन? ऐसा क्या हुआ था इतिहास में? जानें इस खबर में।

नई दिल्ली : महिंद्रा एंड महिंद्रा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो इंडस्ट्री में से एक बन चुकी है. इस कंपनी की नींव आजादी से पहले ही पड़ चुकी थी। तब से अब तक महिंद्रा देश-विदेश के बाजारों में अपनी कई गाड़ियां उतार चुकी है। इस कंपनी के ट्रैक्टर और ट्रक भी भारतीय बाजार में कंपनी की शान बढ़ा रहे हैं। इस समय कंपनी की कमान चेयरपर्सन आनंद महिंद्रा के हाथों में है। महिंद्रा समूह के वर्तमान अध्यक्ष आनंद महिंद्रा , हरीश चंद्र महिंद्रा के पोते हैं। स्पोर्ट यूटिलिटी वाहनों, ट्रकों और कृषि ट्रैक्टरों का प्रमुख उत्पादक, यह कंपनी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय है।

महिंद्रा का मोहम्मद से गहरा नाता :

महिंद्रा एंड महिंद्रा का मोहम्मद से काफी गहरा रिश्ता है। ये बात उस समय की है जब इस कंपनी की शुरुआत हो रही थी। शुरुआत में इस कंपनी का नाम महिंद्रा एंड मोहम्मद था। देश की आजादी के समय कुछ ऐसा हुआ कि कंपनी को अपना नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा करना पड़ा। इस समूह की स्थापना 1945 में एक स्टील ट्रेडिंग कंपनी के रूप में की गई थी। इसकी स्थापना जगदीश चंद्र महिंद्रा, उनके भाई कैलाश चंद्र महिंद्रा, पार्टनर गुलाम मोहम्मद और मुंबई नामक शहर ने की थी।

कैसे हुई महिंद्रा कंपनी की शुरुआत?

देश की आज सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी में से एक महिंद्रा एंड महिंद्रा की शुरुआत 2 अक्टूबर, साल 1945 में हुई थी।पंजाब के लुधियाना शहर में इस कंपनी की नींव पड़ी। उस समय इस कंपनी के तीन पार्टनर्स थे – केसी महिंद्रा, जेसी महिंद्रा और गुलाम मोहम्मद। कंपनी में गुलाम मोहम्मद कीहिस्सेदारी कम थी, लेकिन कंपनी का नाम रखते समय उनके नाम को भी कंपनी के नाम में शामिल किया गया था। इस तरह महिंद्रा एंड महिंद्रा का सबसे पहले नाम महिंद्रा एंड मोहम्मद था।

1947 में बदल गया इतिहास :

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साल 1947 में जब भारत में आजादी का समय आया, तो उस समय देश दो भागों में बंट गया- भारत और पाकिस्तान। एक तरफ जहां केसी महिंद्रा और जेसी महिंद्रा भारत में ही रहे। वहीं गुलाम मोहम्मद में पाकिस्तान जाना उचित समझा। गुलाम मोहम्मद के पाकिस्तान जाने के साथ ही उनका इस कंपनी से नाता टूट गया। गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री बने थे। इसके बाद साल 1951 में गवर्नर भी रहे। आजादी के बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुलाम मोहम्मद साल 1955 में भारत की यात्रा पर आए थे।

महिंद्रा एंड महिंद्रा की दास्तां :

जब तक देश का विभाजन हुआ था, तब तक महिंद्रा एंड मोहम्मद के नाम से कंपनी के लेटरहेड, बिल आदि कुछ बन चुके थे।कंपनी के ये सभी दस्तावेज एम एंड एम के नाम से छपे थे। सब कुछ बदलने में कंपनी की काफी स्टेशनरी खराब हो जाती। इसी के चलते कंपनी के नाम को M & M ही रहने दिया गया और बाद में ये कंपनीमहिंद्रा एंड महिंद्रा के नाम से जानी जाने लगी। वर्तमान में महिंद्रा ग्रुप का बिजनेस 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है और इसमें कुल 137 कंपनियां रजिस्टर हैं. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा हैं जो करोड़ों के मालिक हैं। फोर्ब्स के मुताबिक आनंद महिंद्रा की कुल संपत्ति 2.4 अरब डॉलर की है।

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