राजधानी के दुकानों में होगी गुमास्ता लाइसेंस की जांच, निगम को मिला राजस्व वसूली का टारगेट।

रायपुर : लम्बे समय से शांति से बैठे हुये निगम प्रशासन को अब जाकर गुमास्ता लाइसेंस की जांच करने जहमत उठानी पड़ी है। जब तक प्राशासन को राजस्व की जरूरत नहीं होती तब तक वो शांति से बैठे रहते है, वहीँ अब अचानक से गुमास्ता की जांच को लेकर सवाल उठना तो लाजिमी है, लेकिन अब उन दुकानदारों के लिये मुसीबत खड़ी होगी जो इससे अनभिज्ञ बैठे थे, जिसमें अधिकतर छोटे दुकानदार है। अब इस मामले को लेकर नगर निगम ने राजस्व वसूलने में पूरा जोर लगाने का प्लान तैयार कर लिया है। इस वित्तीय वर्ष में 500 करोड़ का टारगेट तय करते हुए गली, मोहल्लों और कॉलोनियों में खुलने वाली दुकानों पर ज्यादा फोकस है, इससे इन दुकानदारों के लिये मुसीबत बढ़ेगी, जहाँ व्यापार चौपट है वहीँ सरकार रोज राजस्व वसूली के लिये लगातार कदम उठा रही है। शहर के ऐसे सभी 70 वार्डों में जोन स्तर पर गुमास्ता लाइसेंस की जांच करने के साथ ही दुकानों का कमर्शियल टैक्स वसूलने का फरमान जारी किया गया है। क्योंकि निगम आयुक्त की बैठक में ऐसी 40 हजार दुकानों का मामला सामने आया है, उन सभी के गुमास्ता लाईसेंस की जांच होगी।

इस मद को लेकर निगम प्रशासन ने मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्रों में दुकानें, होटलें चलाने वालों और बकायादारों से ज्यादा नुकसान होने का अनुमान लगाया है। ऐसी खामियां भी सामने आईं कि ऐसे क्षेत्रों में बिना गुमास्ता लाइसेंस के ही व्यावसायिक कारोबार चल रहा है, इसके लिए निगम से कोई अनुमति भी ले रहा है। ऐसी सभी जगहों की जांच की जिमेदारी निगम आयुक्त ने राजस्व विभाग के अमले के लिए तय की है। ताकि निगम की माली हालत को सुधारा जा सके। पिछले साल 285 करोड़ रुपए राजस्व मिलने पर प्रोत्साहित स्वरूप लाखों रुपए खर्च कर राजस्व अमले को केरल भेजा गया था। लेकिन प्रापर्टी टैक्स वसूली में ऐसे सैर-सपाटों से ज्यादा फायदा निगम को हो नहीं रहा। जिससे यह कहा जा सके कि राजस्व वसूली शत प्रतिशत होने की दिशा में आगे बढ़ी है। वहीँ निगम ने बीते 5 साल में राजधानी की व्यवस्था के सुधार को लेकर कोई खास काम नहीं किया है। लगातार शहर में गड्ढे और गंदगी बढ़ी है। आम आदमी लगातार परेशान चल रहा है, हर साल बारिश आते ही निगम गड्ढे खोदना शुरू कर देता है।

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इधर निगम आयुक्त अबिनाश मिश्रा ने अभी हाल ही में निगम के अधिकारियों की बैठक ली थी। इस बैठक में उन्होंने 500 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए है। इससे वार्डों में बुनियादी सुविधाओं पर भी काम हो सके। आयुक्त ने जोन कमिश्नरों, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारियों को सभी वार्डो में फील्ड में उतरकर गुमास्ता लाइसेंस जांचने कहा गया है। खासतौर पर आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक कारोबार करने वालों से पूरा टैक्स वसूली अनिवार्य है, जिसे राजस्व रेकॉर्ड में भी अपडेट करना होगा। इसके साथ ही अवैध नल कनेक्शनों को वैध करने से भी राजस्व मिलेगा। वहीँ व्यापारियों को सुविधा देने के नाम निगम ने कुछ भी नहीं किया है?