सोना एक ऐसी धातु है जो नहीं जलता, फिर सोने की लंका कैसे जली? यशोदीप देवधर ने वाल्मीकि रामायण पर की चर्चा।

रायपुर : राजधानी में आज बुधवार काे नवप्रवेशित बी.टेक और बी.आर्क छात्रों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरपर्सन डॉ. सुरेश हावरे, और निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, की गणमान्य उपस्थिति रही। इस दौरान रजिस्ट्रार, डॉ पी वाय ढेकने, सभी डीन, अन्य फैकल्टी और नवप्रवेषितछात्र उपस्थित रहे। वहीँ अब बात करते है रामायण की, हर किसी ने रामानंद सागर द्वारा निर्मित रामायण देखी है। आज की पीढ़ी ने इसे कोविड के दौरान दूरदर्शन में देखा होगा। बुधवार को डीडीयू ऑडिटोरियम में एनआईटी का इंडक्शन प्रोग्राम हुआ। जिसमें बेंगलूरु के यशोदीप देवधर ने वाल्मीकि रामायण पर चर्चा की।

इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था – लाइफ ऑफ लेसन फ्रॉम रामायण। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि जब प्रश्नोत्तर का राउंड शुरू हुआ तो कई सवाल सामने आए। यशोदीप ने सबके जवाब भी दिए लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद लगभग घंटेभर तक छात्रों ने उनसे बातचीत की। यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक यशोदीप अपनी कार में रवाना नहीं हुए।

वाल्मीकि रामायण के आधार पर यशोदीप ने दिए जवाब :

छात्रों ने कई रोचक सवाल पूछे जिसका वाल्मीकि रामायण के आधार पर यशोदीप ने जवाब दिया। उनका कहना था कि हमने जो चीजें टीवी पर देखी हैं वह वाल्मिकी रामायण पर आधारित नहीं हैं। दूसरी तरफ रामानंद सागर ने बड़ी ही बारीकी से चारों रामायण का अध्ययन कर रामायण को सारांश स्वरुप में बनाया था। इस कार्यक्रम में एनआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष सुरेश हावरे और डायरेक्टर एनवी रमना राव समेत पूरा स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

एक किताब ने बदल दी दुनिया :

यशोदीप ने बताया कि आईआईटी बॉम्बे और आईआईएम पासआउट के बाद 6 साल जॉब की और 12 साल तक व्यापार किया। पिछले छह साल से वे वाल्मिकी रामायण पर रिसर्च कर रहे हैं। वे यूट्यूब चैनल 21 नोट्स के जरिए भी वाल्मीकि रामायण के प्रसंग पोस्ट करते हैं।

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उन्हाेंने बताया कि माधवराव चितले की एक किताब जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित थी। उसका संपादन मेरी मां ने किया था। इसलिए वह किताब मेरी नजर में आई और मैंने पढ़ ली। मुझे पता चला कि जिस रामायण के बारे में हम जानते हैं, वैसा तो उसमें कुछ भी नहीं है। इसलिए मैंने पूरी की पूरी वाल्मीकि रामायण पढ़ ली। अब मैं युवाओं के बीच जाकर रामायण से जुड़ी बातें शेयर कर रहा हूं।

आप संस्कृत जानते हैं? :

  • मैं कई नेशनल इंस्टीट्यूट में लेक्चर देने जाता हूं, वहां देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थी आते हैं। इसलिए मुझे अंग्रेजी में बात रखनी पड़ती है। जरूरत पड़ने पर हिंदी और संस्कृत में भी चर्चा करनी होती है।
  • मैंने वाल्मीकि रामायण और इससे जुड़ी अन्य लेखकों की भी रामायण पढ़ी। कई प्रसंगों में अंतर पाया है। अब चूंकि मेरा पूरा दिन रामायण पर रिसर्च या चर्चा पर ही जाता है, इसलिए मैं पूरी तरह सात्विक हो गया हूं। मेरे मन में स्थिरता आ गई है। ऐसा लगता है कि मुझे स्वयं प्रभू राम ने इस काम के लिए चुना है।
  • वाल्मीकि रामायण पर ही 6 साल लग गए है। महाभारत पर 30 साल लग सकते हैं। उतना टाइम भी मेरे पास नहीं रहेगा। इसलिए मैं चाहता हूं कि नई पीढ़ी इस काम को करे। मुझे अभी रामायण पर ही काम करना है।

छात्रों ने पूछे सवाल :

सवाल – अंगद अपनी पूंछ से रावण से भी ऊंचा आसन बनाकर बैठ जाते हैं, ये कैसे हुआ?

जवाब – जब हम श्लोक में यह प्रसंग पढ़ते हैं तो अंगद का आत्मविश्वास नजर आता है। आप वीडियो में उसका आत्मविश्वास कैसे दिखाएंगे? इसलिए पूंछ को बड़ी कर रावण के बराबर बिठाकर वह सीन दिखाया गया है।

सवाल – सीताजी के पास घास के तिनके कौन सी शक्तियां थीं?

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जवाब – उनके पास किसी तरह की कोई शक्ति नहीं थीं और न ही कोई सुरक्षा। उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि श्रीराम कहां हैं, इसके बावजूद वे विचलित नहीं हुईं।

सवाल – विज्ञान के अनुसार सोना एक ऐसी धातु है जो नहीं जलता, फिर सोने की लंका कैसे जली?

जवाब – लंका पूरी सोने की नहीं बनी थी, उसमें सोने की परत थी। बाकी सब तो लकड़ी वगैरह लगे थे, इसलिए जलना स्वाभाविक था।

सवाल – शबरी ने जूठे बेर खिलाए थे या नहीं?

जवाब – वाल्मीकि रामायण में शबरी माता की कोई कहानी नहीं है। बाद में कुछ संतों ने भी इसे माना। हालांकि मैं इसे गलत नहीं मानता।