रायपुर : अपने मनोरंजन के लिये भगवान का मजाक बनाकर अपमान करना कहाँ तक उचित है, आस्था और विश्वास के नाम पर भगवान से मजाक करना कितना सही है? वहीँ धर्म चिन्हों से मजाक बनाने के कारण कई बार दंगे – फसाद भी हो जाते है। ऐसे में भगवान को मात्र मनोरंजन का साधन बनाना कितन उचित है? भगवान श्री गणेश सहज, सरल और दयालू स्वाभाव के माने जाते हैं। भक्तों पर कृपा करते हैं और मन, वचन और कर्म से की गई पूजा- अर्चना से प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान गणेश को भले ही उतना महत्व ना दिया जाता हो, जिसके कारण उनके साथ खिलवाड़ किया जाता है, लेकिन भगवान गणेश के बिना कोई भी शुभ कार्य फलीभूत नहीं होता और इसलिये उन्हें प्रथम देवता के तौर पर माना गया है
लेकिन कहते हैं न, भव बिन हो न प्रीत। कुछ ऐसा ही लोग फिर से करने लगे हैं। गणेश स्थापना से पहले कुछ लोग मूर्तिकारों को आर्डर देकर विकृत और मजाकिया प्रतिमाएं बनवा रहे हैं, जिससे धर्म का अपमान तो हो ही रहा है, आस्था के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है। किसी ने गणेश जी को सिक्स पैक में दिखा दिया है। किसी ने उन्हें राधा- कृष्ण के स्वरूप में प्रतिमाएं बनवा ली हैं। इतना ही नहीं, एक मूर्तिकार ने गणेश जी को पतंग उड़ाते हुए दिखाया है। बॉडी बिल्डर बनाकर रखा है। किसी भी देवी देवता के स्वरूप से खिलवाड़ अनिष्ट को बुलावा देता है। फिर लोगों में भगवान के नाम पर प्रेम और आस्था के बजाय डर बैठ जाता है।
उल्लेखनीय है कि, श्री गणेश आरती में उनका स्वरूप का अलौकिक वर्णन है। आरती में कहा गया है कि-एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी। अर्थ है कि श्री गणेश भगवान गणेश एक दांत वाले और दयालु हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। उनके माथे पर सिंदूर (लाल रंग )शोभा देता है और वे मूषक (चूहे) की सवारी करते हैं। करीब एक दशक पहले हिंदूवादी संगठनों ने श्री गणेश प्रतिमाओं के साथ मजाक को लेकर अभियान चलाया था। उस समय हिंदू संगठनों ने तीव्र विरोध किया और ऐसी प्रतिमाएं बनाने वाले कलाकारों के खिलाफ एफआईआर कराई। उसके बाद यह चलन समाप्त हो गया था। यह अब फिर से जोर पकड़ने लगा है।
इस तरह की गई है प्रतिमा विकृत दांत गायब, दो हाथ बनाए :
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माना में आराध्य देव गणेश का बाल स्वरूप में दांत गायब व चार की जगह दो हाथ वाली प्रतिमा देखने को मिली, यहां दो हाथ व अधूरे स्वरूप में गणेश को आदिवासी स्वरूप भी दिया गया है। इसी तरह श्रुति मूर्तिकला केन्द्र में गणेश को पर्वत उठाते हुए हनुमान के साथ अधूरे स्वरूप में दिखाया गया है। इतना ही नहीं, भगवान शिव के स्वरूप में भी गणेश प्रतिमा को आकार दिया गया है। भगवान को दूसरे भगवान के स्वरूप में प्रदर्शित करना भी पाप है।
20 शेड में हो रहा निर्माण, मूर्तिकारों ने कहा :
मूर्तिकारों ने बताया कि, हम आर्डर पर काम करते हैं। बुकिंग कराने वाली समिति के लोगों को नया लुक देना कितना भारी पड़ सकता है। इसे बताने और समझाने का भी प्रयास किया जाता है। इसके बाद भी लोग नहीं मानते और मूल पूजा के लिए अलग प्रतिमा रखने की बात करके बुकिंग कराते हैं। कलाकारों ने बताया कि माना में छोटे-बड़े मिलाकर 20 जगह कारीगर मूर्ति निर्माण करते हैं। इस बार सभी शेड में मिलाकर करीब 6 सौ से ज्यादा छोटी बड़ी मूर्तियों और झांकी को आकार दिया जा रहा है। इनमें रायपुर ही नहीं, बलौदा बाजार के लिए भी बुक करवाई गई हैं। वहीँ हम लोग मजबूरी में यह काम करते है।
अधूरी प्रतिमा ध्यान योग्य नहीं :
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रायपुर बोरियाकला प्रभारी शंकराचार्य आश्रम डॉ. इंदुभवनानंद महाराज ने बताया कि , किसी भी आराध्य देवी-देवता की अधूरी प्रतिमा आराधना एवं ध्यान योग्य नहीं होती है। अगर किसी मूर्तिकार द्वारा आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। संबंधित मूर्तिकारों की जानकारी दिजिए, ऐसे लोगों के खिलाफ हिन्दू समाज विरोध करेगा। अगर झांकियां बनवानी है तो अन्य पात्रों पर बनवाई जा सकती है, आराध्य की प्रतिमा से छेड़छाड़ गलत है।
एक दशक बाद फिर विकृत प्रतिमाएं :
एक दशक बाद मूर्तिकारों द्वारा श्री गणेश के मूल स्वरूप से फिर छेड़छाड़ करते हुए प्रतिमा बनाई जा रही हैं। मूर्तिकार किस समिति ने उन्हें विकृत स्वरूप देने के लिए आर्डर किया है, बताने के लिए तैयार नहीं हैं। मूर्तिकारों के शेड में जाने के बाद लोगों ने कतार में सजाई गई मूल प्रतिमाओं के बीच छिपाई गई विकृत एवं अधूरे स्वरूप वाली प्रतिमाओं का जायजा लिया। तीन अलग-अलग मूर्तिकारों के पास 15 से 20 ऐसी गणेश प्रतिमा देखने को मिलीं, जिनके स्वरूप को पूरी तरह बदला गया है, जो कि किसी भी तरह से आस्था के योग्य नहीं है। राजधानी में सात सितंबर से जहां प्रथम पूज्य श्री गणेश की स्थापना के लिए तैयारियों का दौर तेज होने लगा है, वहीं दूसरी तरफ मूर्तियों का निर्माण करने वाले मूर्तिकारों ने अब निर्माण स्थल के।
मूल स्वरूप बिगाड़ना पाप :
रायपुर भागवताचार्य एवं वेदाचार्य पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि, भगवान श्री गणेश के स्वरूप को देखकर हंसने का कृत्य चंद्रमा ने किया था। इससे श्री गणेश के श्राप स्वरूप गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन पाप की श्रेणी में आता है। भूलकर भी इस दिन चन्द्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिये। वहीँ स्वरूप बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा का स्थापना से पहले विसर्जन कर दें।
जहाँ भगवान गणेश विराजते है वहां बजाये जाते है फ़िल्मी गीत :
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जब माचिस मीडिया ने पड़ताल की तो सामने आया कि प्रतिवर्ष छोटे पंडालों जहाँ भगवान को विराजित किया जाता है, वहां फ़िल्मी गीत, अश्लील गीत और कव्वालियाँ भी बजाई जाती है, वहीँ जब विसर्जन के लिये युवा निकलते है तो 11 दिन पूरे हो जाने के बाद भी भगवान को 20-25 दिनों तक कई जगह पर जबरदस्ती विराजित करके रखा जाता है और DJ की धून पर दारू और नशे में अश्लील और गंदे गाने बजाते हुये प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है, नशे के कारण हमेशा दो गुट आपस में उलझ जाते है और चाकूबाजी की घटनायें हो जाती है, वहीँ इस मामले में गौसेवक ओमेश बिसेन ने कहा ये सब बर्दाश्त के बाहर है, इससे युवा धर्म का नाम ख़राब कर रहे है।



