जगदलपुर : आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म से अलग करने का षड्यंत्र रचा गया है, जिससे कि आदिवासी समाज खुद को हिन्दुओं से अलग माने। घटना में सामने आया है कि आदिवासी बाहुल्य बस्तर में कुछ लोगों ने आदिवासियों को भगवान गणेश का पर्व नहीं मनाने का फरमान जारी किया है। उन्होंने ग्रामीणों को धमकी दी है कि, अगर कोई गणेश बैठाता है तो उस पर 10 हजार 51 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। इस फरमान के बाद अब ग्रामीणों में भय व्याप्त है। इसकी जानकारी होने के बाद सांसद महेश कश्यप ने कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है। इससे ग्रामीणों में डर बैठ गया है, ये फरमान जारी अकरने वाले कौन है, स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि, हमारे पूर्वजों ने हमारी परंपरा को संरक्षित करने का काम किया है। पिछले कुछ वर्षों से कुछ अलग – अलग तरीके के लोग काम कर रहे हैं। चाहे वह सेवा शिक्षा के नाम से धर्म को बदलने की बात हो, चाहे आदिवासी हिंदू नहीं है, हम रावण के वंशज हैं। इस प्रकार से आदिवासी समाज को बदलने का काम किया जा रहा है। जबकि, हमारा आदिवासी समाज अपने नाम में आयतुराम, बुदलूराम और संतुराम के नाम से राम नाम लिखते हैं। दूसरी बात हमारे यहां आदिवासी समाज के लोग बूढ़ादेव को मानते हैं। बूढ़ादेव शंकर जी का ही एक रूप है और भगवान गणेश उनके पुत्र गणेश जी हैं। कई सालों से गणेश जी को पूजा जा रहा है और पहाड़ों में भी उनकी प्रतिमा का उल्लेख मिलता है। इसका मतलब है कि, हमारे पूर्वज सदियों से सनातन परंपरा को मानते रहे हैं। आदिवासी समाज हिंदुत्व का हम हिस्सा है। वहीँ भोले-भाले ग्रामीण आदिवासियों को लोभ-लालच देकर मतांतरित करवाया जा रहा है।
ऐसे लोगों के खिलाफ की जाएगी क़ानूनी कार्यवाही :
राम से बड़ा है राम का नाम , रोज सुने यह धुन , लिंक पर करें क्लिक : https://www.youtube.com/watch?v=TIkGGHYTb_Y
मामले को लेकर सांसद ने आगे कहा कि, वर्तमान में कुछ तथाकथित समाजसेवी लोगों के द्वारा, जिन्हें राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त है। उनके द्वारा हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हमारे युवा पीढ़ी गणेश जी की पूजा करने के लिए उत्सुक रहती है और इससे गांव में भी अच्छा वातावरण रहता है। लेकिन उसको भी कुछ लोगों द्वारा फरमान जारी कर उसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह का मामला मुझे भी सुनने को मिला है। ऐसे समाज को तोड़ने वालों के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की जायेगी। आपको बता दें कि भोले – भाले आदिवासियों को लगातार प्रलोभन देकर और माइंड वाश करके धर्मान्तरित किया जा रहा है। जिससे क्षेत्र की डेमोग्राफी में लगातार बदलाव हो रहा है और ग्रामीण आपस में झगड़े कर रहे है।



