भुबनेश्वर (ओड़िशा) : असम में लगभग 19 हजार अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या की जानकारी सामने आई है, जो कि डेमोग्राफी बदलकर राष्ट्र और राज्य के लिये खतरा पैदा कर रहे है, वहीँ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हें बाहर करने का निर्देश दे दिया है, 2019 में असम में NRC लागू की गई थी, अब उस पर कार्यवाही शुरू हो गई है, अब इसके बाद ओडिशा सरकार ने भी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने अधिकार क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को विधानसभा में भाजपा विधायक भास्कर माधेई को एक लिखित जवाब में कहा कि जिला कलेक्टरों और एसपी को राज्य में रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने के लिए कहा गया है। ज्यादातर घुसपैठिये बरगढ़, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, मलकानगिरी, नबरंगपुर और भुवनेश्वर शहरी पुलिस जिलों में रह रहे हैं। इनको लेकर अब जांच शुरू की जायेगी और उन्हें हिरासत गृह भेजा जायेगा।
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए ब्लॉक, तहसील और पुलिस स्टेशन स्तर पर समितियां जिम्मेदार होंगी। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है जहां अधिक बंगलादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं, खासकर केंद्रपाड़ा, भुवनेश्वर और पुरी में। सरकार की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न जिलों में 3,740 बांग्लादेशी घुसपैठिये रह रहे हैं। सभी को जांचकर उन्हें डिपोर्ट करने की कार्यवाही की जायेगी तब तक उन्हें हिरासत गृह में रखा जायेगा, जिसे डिटेंशन सेंटर कहा जाता है।



