डाटा लीक करने वाली कंपनी पर भी कसेगा शिकंजा, क्या आप जानते है, आपकी निजी जानकारियां कहाँ तक जा रही है?

रायपुर : कभी आपकी निजी जानकारी किसी वेबसाईट दिख जाये? आपकी फोटो अथवा विडियो पोर्न वेबसाईट में दिख जाये, या फिर आपका कुछ ऐसा डाटा अथवा जानकारी जो निजी हो वो सार्वजनिक हो जाये तो आपको कैसा लगेगा? ऐसी ही कई चीजें आपको बड़ा तनाव दे सकती है, सोशल मीडिया में आपके द्वारा अथवा किसी वेबसाईट पर आपकी जरुरी जानकारी अपलोड की हो तो आपको अंदाजा नहीं है उसका कितना बड़ा दुरुपयोग हो सकता है? ऐसा ही एक मामला दिल्ली की मान्या नारंग के साथ घटित हुआ, ऐसे ही कई मामले अधिकतर आम लोगों के साथ हो रहे है, जिससे वो आत्महत्या तक का घटक कदम भी उठा लेते है। वहीँ एक तरफ साईबर ठगी तो एक सामान्य बात हो चुकी है। अब साइबर ठगी के मामलों पर नियंत्रण के लिए पुलिस अब और सख्ती करने जा रही है। पुलिस अब तक ठगी करने वाले अपराधियों को पकड़ रही थी। मगर, अब डाटा लीक या चोरी करने वालों पर भी शिकंजा भी कसा जायेगा।

पुलिस अब ऐसी कंपनियों और एजेंसियों को भी साईबर ठगी का आरोपी बनाएगी, जिनसे लीक हुए डाटा की मदद से उपभोक्ता से ठगी हुई है। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में साईबर क्राइम सेल ने ठगी के मामलों में जिन आरोपितों को पकड़ा है, उनसे पूछताछ में यह बात सामने आई है कि उन्हें यह डाटा डार्कवेब के जरिए मिला है। ये ऐसी वेबसाईट है जो अलग- अलग तरीके से ऑनलाईन आपका डाटा संग्रहित करती है, इनके पास आपके नाम पते, मोबाईल, नंबर पारिवारिक जानकारी सब कुछ है, जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। ऐसे ही कई अपराधियों को भी आपका डाटा ऐसी ही वेबसाईटों से चन्द पैसों में मिल जाता है।

कंपनी के कर्मचारी ही चुराते हैं डाटा :

आपको बताते चलें कि डार्कवेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जहां लोग पहचान और लोकेशन छुपाकर अवैध काम करते हैं, उसे डार्क वेब कहा जाता है। पुलिस की पड़ताल में यह भी सामने आया कि डार्कवेब पर डाटा उपलब्ध कराने के लिए कंपनियों के सर्वर को हैक कर पेशेवर हैकर उपभोक्ताओं की निजी जानकारी चुरा रहे हैं, यह जानकारी उन तक ऐसे पहुँचती है कि आम आदमी सोच भी नहीं सकता।

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कई मामलों में कंपनी का ही कोई कर्मचारी यह डाटा चुराकर बेच देता है, जहाँ आपका बैंक खाता हो, इंश्योरेंस हो, अथवा कहीं से आपने सामान लेते समय कोई जानकारी दी हो, इन सभी जानकारियों को लेकर आपका पूरा बायोडाटा मैच कर और बनाकर रख लिया जाता है। चोरी किया गया यह डाटा 35 से 50 रुपये में प्रति उपभोक्ता के रेट पर डार्कवेब में बेचा जा रहा है। पुलिस का मानना है कि अगर कंपनियां डाटा की सुरक्षा के प्रति सजग रहें, तो ऐसी चोरी रोकी जा सकी है।

कंपनियों को 6 घंटे में करानी होगी रिपोर्ट :

  • नियमानुसार संस्थाओं को अपने यहां एक मुख्य दूरसंचार सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करना होगा। अगर उनके यहां हैकिंग या डाटा चोरी की घटना का पता चलता है तो छह घंटे के भीतर इसकी जानकारी जांच एजेंसियों को देनी होगी, ऐसा नहीं करने पर कार्यवाही की जा सकेगी।
  • घटना के 24 घंटे के भीतर चोरी हुए डाटा से प्रभावित उपभोक्ता की जानकारी, भौगोलिक क्षेत्र, इस चोरी का संभावित प्रभाव और उपभोक्ता को किसी अपराध से बचाने के लिए किए जा सकने वाले उपाय सहित सभी जानकारी बतानी होगी। ऐसा नहीं करने पर उन पर कार्यवाही हो सकती है।

नए दूरसंचार कानून ने दी कार्यवाही की ताकत :

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अब तक जांच एजेंसियां डाटा चोरी के लिए कंपनियों की लापरवाही को जिम्मेदार तो मान रही थीं। मगर, कार्यवाही का अधिकार उनके पास नहीं था। नए दूरसंचार कानून ने कार्यवाही की ताकत दी है। साइबर अपराधों में यदि किसी कंपनी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्तता है, तो उस पर कार्यवाही हो सकती है। अब जांच में यह साफ़ हो गया है, कि आपका डाटा बेचा जा रहा है, जिसको जरूरत है उसके पास आपकी जानकारी जा रही है।