रायपुर : उत्तर प्रदेश के लिये राजधानी रायपुर से महत्वपूर्ण ट्रेन सारनाथ ही है, जिससे आम यात्री बनारस, प्रयागराज, शंकरगढ़, बलिया जैसे शहरों को जाते है, इस ट्रेन के अलावा राज्य गरीबरथ भी जाती है जो लखनऊ और कानपूर के लिये सप्ताह में दो दिन ही चलती है और दुर्ग नवतन्वा, भी नियमित नहीं है, साथ उ.प्र. से होते हुये बिहार जाने वालली गोंदिया बड़ोनी भी अपनी लेट लतीफी के कारण इस मार्ग के आम यात्रियों के लिये मजबूरीवश है। ऐसे में सारनाथ का एक दिन अंतर करके रद्दीकरण आम जनता के साथ खिलवाड़ है, वो भी तब जब प्रयागराज कुम्भ शुरू होने वाला है। ऐसे में आस्था के आगे आखिरकार रेलवे प्रशासन को झुकना पड़ा। दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस मंगलवार 17 दिसंबर से फिर से नियमित रूप से दौड़ेगी। इस ट्रेन का संचालन करने की घोषणा रेलवे को प्रयागराज में लगने जा रहे कुंभ मेले को ध्यान में रखकर करना पड़ा है।
रेलवे ने पिछले दिनों उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड और कोहरे का हवाला देते हुए दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस को दो दिसंबर से 27 फरवरी तक अलग-अलग दिनों में रद्द कर दिया था। रेलवे के इस फैसले का विभिन्न संगठनों के अलावा यात्रियों ने विरोध करते हुए इस ट्रेन की नियमित सेवा की मांग की थी। चौतरफा दवाब पड़ने पर रेलवे प्रशासन को यह फैसला वापस लेना पड़ा है। वहीँ सामान्य रूप से प्रयागराज और बनारस के लिये ट्रेनों की काफी कमी भी है।
13 जनवरी से 26 फरवरी तक लगेगा कुंभ मेला :
13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में कुंभ मेला लगने जा रहा है। ऐसे में रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे की 77 ट्रेनों के साथ छत्तीसगढ़ से प्रयागराज जाने वाली सारनाथ को भी कोहरे के कारण 76 दिन तक(तीन माह के लिए) अलग-अलग दिनों में रद्द किया था। अब फिर से सारनाथ के चलने से यात्रियों को राहत मिलेगी। संगठनों और नेताओं ने रेलवे के इस फैसले पर आभार व्यक्त किया है। साथ ही भविष्य में भी सारनाथ एक्सप्रेस को कोहरे के कारण रद्द न करने की मांग की है। रेलवे की चरमराई हुई व्यवस्था से आम यात्री लगातारपरेशानी उठा रहा है।
दुर्ग, बिलासपुर और राजगढ़ से तीन कुंभ स्पेशल ट्रेन चलेंगी :
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इसके अलावा महाकुंभ के दौरान दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के तीन मुख्य स्टेशन दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ से तीन कुंभ स्पेशल ट्रेन भी चलेगी, जिसका लाभ श्रद्धालु उठा सकेंगे। महाकुंभ के दौरान प्रयागराज जाने और आने वाले लोगों की आवाजाही ज्यादा होगी। ऐसे में पुण्य की डुबकी लगाने वालों को अधिक से अधिक कंफर्म बर्थ मिलेगा। इसका लाभ सभी श्रद्धालु उठा सकेंगे।



