जगदलपुर : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस समय नक्सलियों के गढ़ में तीन दिवसीय प्रवास पर रहे, यहाँ उन्होंने आत्सममर्पण कर चुके नक्सलियों के एक समूह से रविवार को हुई मुलाकात में कहा कि सरकार के प्रयासों के सफल होने के कारण आज वह खुद को सबसे ज्यादा खुश मानते हैं। उन्होंने पूर्व नक्सलियों से कहा, ”मैं आज सबसे ज्यादा खुश हूं, आपसे या आपके परिवार से भी ज्यादा, क्योंकि आपको आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए मनाने के हमारे श्रमसाध्य प्रयास सफल हुए हैं।” शाह ने कहा कि यहां आयोजित कार्यक्रम में छह राज्यों-छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम के आत्मसमर्पण करने वाले लगभग 30 नक्सली और विद्रोही शामिल हुए. उन्होंने कहा कि भले ही यह छोटा कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह उन्होंने काफी ख़ुशी जताई।
गृहमंत्री ने आगे कहा कि, ”मुझे बहुत संतुष्टि हो रही है कि देश के युवा हमारी अपील का जवाब दे रहे हैं, हिंसा की निरर्थकता को समझ रहे हैं और आत्मसमर्पण कर रहे हैं।” शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी तो उन्होंने सोचा कि जो लोग सशस्त्र आंदोलनों में शामिल हैं, उन्हें हथियार डालने, आत्मसमर्पण करने और शांतिपूर्ण जीवन जीने का मौका दिया जाना चाहिए। जिससे उनके जीवन में सुधार भी हो सके।
उन्होंने कहा, ”हमारी पहल के बाद, पूर्वोत्तर में 20 शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और 9,000 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया.” गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीतियां बनाई हैं, जिनमें हिंसा में घायल होने वाले भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए 15,000 घरों की मंजूरी दी गई है, जिससे वो सम्मान पूर्वक अपना जीवन भी जी सकें।, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ऐसे परिवारों के लिए कम से कम एक गाय या भैंस उपलब्ध करायेगा ताकि वे हर महीने 15,000 रुपये से 20,000 रुपये कमा सकें।
अमित शाह ने कहा, ”आप सभी को अपने पूर्व सहयोगियों को यह संदेश देना चाहिए कि हिंसा आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है।सभी नक्सलियों को आगे आना चाहिए और आत्मसमर्पण करना चाहिए. सरकार उनकी जरूरतों का ध्यान रखेगी।” उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों से यह भी कहा कि वे केंद्रीय गृह सचिव को एक साधारण पोस्ट कार्ड भेजें और उनकी समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा। उनका आवश्यक निपटान भी किया जायेगा।
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गृहमंत्री ने कहा कि सरकार 2036 में अहमदाबाद में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की तैयारी कर रही है और 2025 की शुरुआत में लगभग 35,000 युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा ताकि भारत अधिक से अधिक पदक जीत सके। उन्होंने कहा, ”मैं चाहता हूं कि 2036 के ओलंपिक में बस्तर से कोई कम से कम एक पदक जीते।” शाह के साथ बातचीत में पूर्व नक्सलियों ने बताया कि वे पुलिस और निजी क्षेत्र में नौकरियों तथा अपना उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से किस तरह लाभान्वित हो रहे हैं। इस तरह नक्सलियों के आत्मसमर्पण को लेकर कई योजनायें चलाई जा रही है।
काडर शादी करना चाहते हैं उन्हें ‘नसंबदी’ करानी पड़ती है : समर्पण करने वाले नक्सलियों ने शाह को बताया :
माओवादियों की शब्दावली में ”नसबंदी” एक बहुत ही आम शब्द है। काडर के जो सदस्य शादी करना चाहते हैं, उसे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ आकाओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर किया जाता है। तेलंगाना के एक पूर्व माओवादी को शादी से पहले इस प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था। सालों बाद, जब उसने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया, तो उसने इस प्रक्रिया को उलटने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई, और अंतत? एक लड़के का पिता बना।ऐसे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। वह अकेला नहीं था, बहुत से लोग जो हथियार डालकर मुख्यधारा में आ जाते हैं, वे भी इसी तरह परिवार शुरू करने के लिए प्रक्रिया को उलटने का विकल्प चुनते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
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तेलंगाना के पूर्व माओवादी ने अमित शाह से बातचीत करते हुए कहा, ”जब मैं भाकपा(माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे ‘नसबंदी’ करानी पड़ी थी, लेकिन जब मैंने हथियार छोड़ दिए और मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक और ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं। दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बना।” उसने बताया कि प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के बीच यह धारणा है कि बच्चों की देखभाल से उनका ध्यान भटकेगा और इससे उनके आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा। यह भी आशंका है कि शादी करने वाले कार्यकर्ता आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं। इसकी वजह से विवाह करने वाली किसी भी काडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है। ऐसे में कई मुश्किलें भी खड़ी हो जाती है।
पुरुष नसबंदी एक शल्य प्रक्रिया है जो वीर्य में शुक्राणु के प्रवाह को रोकती है जिससे स्थायी जन्म नियंत्रण (गर्भनिरोधक) होता है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली मरकम दुला ने बताया कि, ”नक्सली कार्यकर्ताओं के लिए शादी करने से पहले नसबंदी करवाना अनिवार्य है। नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य अपनी संतानों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े। इसलिए आगे का रास्ता ‘नसबंदी’ है।” पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी के एक अन्य पूर्व माओवादी ने भी ऐसी ही कहानी बयां की। सुकांति मारी ने बताया, ”मेरे साथी काडर से विवाह करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करानी पड़ी।” मारी का पति पुलिस मुठभेड़ में मारा गया जिसके बाद उसने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
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आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के समूह के साथ बातचीत के दौरान शाह ने कहा कि उन्हें इस बात से बेहद संतोष है कि देश के युवाओं को हिंसा की निरर्थकता का एहसास हो गया है और उन्होंने हथियार डाल दिए हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है। शाह के साथ बातचीत में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने उन्हें बताया कि किस प्रकार वे पुलिस, निजी क्षेत्र में नौकरियों और अपना उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही नक्सलियों की इन बातों से अमित शाह संतुष्ट दिखे।



