स्वास्थ्य : बढ़ती ठण्ड में आप गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते है, ऐसे में आपको सावधानी बरतना जरुरी है। सर्दियों के मौसम में ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़े पहनते हैं और गर्म खाना खाते हैं लेकिन इसके बावजूद भी कुछ ऐसे अंग हैं जहां सबसे पहले ठंड लगती है। दरअसल, हमारे शरीर के कुछ ऐसे हिस्से हैं जहां ज़्यादा सर्दी लगती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर के कुछ अंग संवेदनशील होते हैं और उन तक सर्दी या गर्मी आसानी से पहुंच जाती है। इसक पीछे तर्क ये है कि ठंड का अहसास तब शुरू होता है जब त्वचा में तंत्रिकाएँ त्वचा के तापमान के बारे में मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं।
इन संवेदनशील अंगों में सबसे पहले लगती है ठंड :
- हाथ और पैर : रक्त संचार आपके शरीर को गर्म रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। जब आपका शरीर ठंडा हो जाता है, तो सबसे पहले आपकी हाथों और पैरों पर असर पड़ता है। दरअसल, हाथों और पैर की उंगलियों की केशिकाएं पतली होती हैं। नतीजतन, आपके हाथ और पैर सबसे पहले ठंडे हो जाते हैं। यानी ये आपके शरीर के ऐसे अंग हैं जिन्हें ठंड से सबसे अधिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
- नाक और कान : हाथ और पैर के बाद सबसे ज्यादा ठंड आपके चेहरे के अंग नाक और कान में लगती है। दरअसल, ये अंग सबसे ज्यादा खुले रहते हैं और तापमान के संपर्क में जल्दी आते हैं। इसके अलावा सर्द हवा इनके जरिए शरीर में आसानी से प्रवेश भी कर सकती है जिससे फेफड़ों तक ठंडक पहुंचती है और व्यक्ति ठंडक ज्यादा महसूस करता है। इसलिए इन अंगों के लिए आपको इन उपायों को अपनाना चाहिए जो कि सर्दी लगने से हमें बचा सकते हैं। इन सभी संवेदनशील अंगों को ढंकना जरुरी है।
ऐसे करें ठंड से अपना बचाव?
सर्दी में अपना बचाव करने के लिए सबसे पहले अपने हाथ और पैरों में दस्ताने और मोजे पहनकर रखें। साथ ही अपने शरीर को कड़कड़ाती ठंड से बचाने के लिए कपड़ों की परतें दुगुनी करें। दुगुने कपड़े चेहरे और शरीर को ठंडा होने से बचाते है। दूसरा सर्दियों में अपना कान ढंककर रखें। हमेशा टोपी या शॉल ओढ़कर बाहर निकलें। इस प्रकार से आप खुद को ठंड लगने से बचा सकते हैं और कई बीमारियों से बच सकते हैं। कपड़े कॉटन अथवा ऊन के बेहतर है।
ज़्यादा ठंड से कई तरह की समस्यायें हो सकती हैं :
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- हाइपोथर्मिया : जब शरीर का तापमान 95°F (35°C) से कम हो जाता है, तो हाइपोथर्मिया हो सकता है। यह एक जानलेवा स्थिति है, इसके लक्षण ये हो सकते हैं :
- कंपकंपी
- थकान
- सांस लेने में दिक्कत
- बोलने में दिक्कत
- मानसिक क्षमता प्रभावित होना
- हाथ-पैरों में सुन्नपन
- हार्ट अटैक का खतरा बढ़ना : ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए हृदय को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। रक्त संचार धीमा और ठंडा हो सकता है।
- विटामिन बी12 की कमी, शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने से भी ज़्यादा ठंड लगती है। इसके अलावा, थकान, दस्त, भूख न लगना, कब्ज़, या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्यायें भी हो सकती हैं।
- एनीमिया : खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर एनीमिया होता है। इससे आलस, चक्कर, और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- ठण्ड में आइसक्रीम या कोल्डड्रिंक के सेवन से टाईफाईड का खतरा।
अगर आपको ज़्यादा ठंड लग रही है, तो तुरंत सचेत हो जायें और उचित उपचार करें। ठण्ड में ठंडी तासीर की चीजों का सेवन करने से बचें और भूलकर भी आईसक्रीम जैसी चीजों का सेवन ना करें।



