नई दिल्ली : आम मोबाईल प्रयोगकर्ता के लिये 4 की गति पर्याप्त है, वहीँ 5G की गति ने घर-घर क्रांति ला दी है, ऐसे में अब 6 G का क्या फायदा होगा? ये जानना जरुरी है। भारत में अभी 5G नेटवर्क का रोलआउट जोरों-शोरों से चल रहा है। Jio और Airtel ने रिकॉर्ड समय में देश के सभी जिला मुख्यालयों में 5G नेटवर्क पहुंचा दिया है। वहीं, Vodafone-Idea और BSNL भी अपनी 5G नेटवर्क पैन-इंडिया लेवल पर लॉन्च करने की तैयारी में है। 5G में प्रयोगकर्ता को 1gbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलती है, जो पिछली जेनरेशन से लगभग 10 गुना तेज है। 5G के लॉन्च होने के बाद दुनियाभर में इंटरनेट की क्रांति आ गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (ML) आदि का नया दौर शुरू हो गया है। 5G का एडवांस वर्जन आने वाले कुछ समय में लॉन्च किया जायेगा, जिसके बाद कनेक्टिविटी और भी बेहतर हो जायेगा। सभी कम्पनियाँ इसी दौड़ में लगी हुई है। साथ ही पूरी दुनियां में 6G लांच करने वाला पहला देश भारत ही होगा।
क्या है 6G तकनीक?
6G को छठी जेनरेशन की वायरलेस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी कहा जाता है। जहां 5G का मुख्य फोकस मोबाईल ब्रॉडबैंड और IoT डिवाइसेज को बेहतर करने पर है। वहीं, 6G इसे एक और लेवल पर लेकर जायेगा। इसमें मोबाईल इंटरनेट डेटा की स्पीड 1Tbps तक पहुंच जाएगा और लैटेंसी 100 माइक्रोसेकेंड तक हो जाएगी यानी आप रीयल टाइम में बिना किसी लैग के दुनिया से वर्चुअली कनेक्ट हो सकेंगे। 6G मौजूदा MHz या GHz स्पेक्ट्रम बैंड पर काम नहीं करेगा। इसके लिए नया टेट्राहर्ट्ज (THz) स्पेक्ट्रम बैंड की जरूरत होगी। इसके अलावा नई जेनरेशन की टेक्नलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंटिग्रेशन से लैस होगी। साथ ही, यह 5G के मुकाबले बेहतर सिक्योर होगी। इसका आने वाले समय में बड़ा लाभ मिलेगा। इन्टरनेट की स्पीड प्रयोगकर्ताओं के बीच में बंट जाती है, उस आधार पर इसका बड़ा लाभ मिल सकेगा।
लम्बे समय में 6G कब होगा लॉन्च?
दुनियाभर में 6G टेक्नोलॉजी को लेकर रिसर्च और डेवलपमेंट की जा रही है। जापान में इसकी सफल टेस्टिंग की जा चुकी है। वहीं, भारत भी इस रेस में किसी से पीछे नहीं रहने वाला है। पीएम मोदी ने 2023 में 6G के लिए टेस्ट बेड लॉन्च किया था। पिछले दिनों केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दावा किया है कि 6G लॉन्च करने में भारत दुनिया के सबसे पहले देशों में से एक होगा। उम्मीद की जा रही है कि इसे 2030 तक लॉन्च किया जा सकता है, जिसको लेकर विभिन्न देशों म प्रतिस्पर्धा भी शुरू हो गई है।
6G के आने के बाद मोबाईल टेक्नोलॉजी एक नए शिखर पर पहुंच जायेगा, जिसमें यूजर्स को इंटरनेट एक्सेस करने में जीरो लैटेंसी यानी किसी भी तरह का लैग नहीं मिलेगा। यह एक ऐसा दौर होगा, जिसमें सीमलेस कनेक्टिविटी मिलेगी और आप बिना किसी नेटवर्क डिसकनेक्शन के दुनिया के साथ वर्चुअली कनेक्टेड रह सकेंगे। स्मार्ट सिटी और इंडस्ट्री के लिए यह टेक्नोलॉजी एक वरदान साबित हो सकती है। इससे किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आयेगी।
6G की भारत में क्या है तैयारी?
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भारत ने 6G के लिए अभी से रिसर्च और डेवलपमेंट करना शुरू कर दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 6G टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप (6G-TIG) की स्थापना की है, जो भारत में 6G की संभावनाओं को तलाशने का काम करेगी। इसके लिए DoT ने अकेड्मिक्स, इंडस्ट्री और गर्वमेंट बॉडी के साथ साझेदारी की है, ताकि भारत में 6G टेक्नोलॉजी को विकसित किया जा सके। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मानें तो 5G की तरह 6G का डिप्लॉयमेंट आसान नहीं होगा। स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर चुनौतियां पैदा हो सकती है क्योंकि सरकार को 6G सर्विस के लिए नया THz स्पेक्ट्रम बैंड अलोकेट करना होगा। यह एक हाई फ्रिक्वेंसी बैंड है, जिसकी बैंडविथ काफी ज्यादा है। इस बैंड पर ज्यादा क्षमता के साथ हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलती है। जिसका फायदा भी बड़े स्तर पर मिलेगा।
6G इवोल्यूशन के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने की जरूरत होगी। टेलीकॉम ऑपरेटर्स को बड़ी मात्रा में स्मॉल सेल डिप्लॉयमेंट, एज कम्प्यूटिंग कैपेबिलिटीज और एडवांस एंटिना टेक्नोलॉजी के लिए निवेश करना होगा। सरकार ने इसके लिए नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन और डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की घोषणा की है। ये दोनों 6G के डिप्लॉयमेंट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण किरदार निभायेंगे। साथ ही 2g से 3g और 4g में आसानी से बड़ा बदलाव हो गया, लेकिन 5g में तकनिकी खर्च में बढ़ोत्तरी हुई है।



