हाउसिंग बोर्ड के मकान – दुकान डंप, नहीं बिक रहे, इसलिये अब दे रहे 30 फीसदी तक छूट।

रायपुर : छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के 19 जिलों में लगभग तीन हजार से ज्यादा मकान और दुकानें डंप पड़े हुये हैं। इनके खरीददार नहीं मिलने से ये कंडम हो रहे है। अब इस मामले को सरकार ने भी गंभीरता से लिया है और रविवार को हुई साय कैबिनेट की बैठक में इस पर बड़ा फैसला करते हुए मकान-दुकानों पर 10 से 30 फीसदी तक छूट देना मंजूर कर लिया है। पांच वर्ष से अधिक समय से लगभग 3445 मकान, आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति का विक्रय नहीं हो सका है। इसका एकमुश्त निपटान के लिए लागत मूल्य (आधारभूत दाम) से 10 से 30 फीसदी प्रतिशत छूट देकर विक्रय करने का निर्णय कैबिनेट ने लिया है। इस तरह अब इन्हें कम दामों पर बेचा जायेगा।

हाउसिंग बोर्ड के ये मकान 19 जिलों में हैं। हाउसिंग बोर्ड द्वारा रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल के दौरान बनाए गए इन आवासों और व्यावसायिक संपत्तियों की लागत लगभग 506 करोड़ रुपए से अधिक है। इन आवासीय संपत्तियों में डब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी आवास शामिल हैं। बताया जाता है कि हाउसिंग बोर्ड के मकानों की निर्माण की गुणवत्ता के कारण अधिकतर लोग इसे खरीदने से पीछे हट जाते हैं। शहर से दूर आउटर क्षेत्रों में बने मकानों को लोग पहुंच के साधन और अन्य कारणों से नहीं खरीदते है। साथ ही ये काफी छोटे भी है।  

पहले भी छूट देकर इन्हें बेचने का प्रयास किया जा चुका है:

हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित 29051 मकानों में से 25603 मकानों को बिक्री के बाद 3445 मकान बिक नहीं पाए है। हाउसिंग बोर्ड की ओर से इन मकानों को बेचने कई प्रयास किए गए है। इसके तहत प्रचार-प्रसार के अलावा भवनों की बिक्री मूल्य में छूट प्रदान कर बिक्री का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं बिक पाये। भाजपा सरकार ने फिर से लागत मूल्य में 10, 20 और 30 प्रतिशत छूट देकर इन्हें बेचने का निर्णय लिया है। अब इसका लाभ खरीददार ले सकते है।

प्रमुख शहरों में भी नहीं बिके मकान :

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हाउसिंग बोर्ड ने प्रदेश के 19 जिलों में वहां की आवश्यकता का आकलन करते हुए ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी मकानों का निर्माण कराया। इनमें बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, जशपुर, कोरिया, सरगुजा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी मकानों का निर्माण कराया गया, जो अब तक नहीं बिक पाए हैं। रायपुर जिले में 460 ईडब्ल्यूएस, 299 एलआईजी, 640 एमआईजी और 472 एचआईजी को मिलाकर कुल 1867 मकान आज भी खाली पड़े हुये हैं। दुर्ग जिले में 524 मकान अब तक भी नहीं बिक पाए हैं। वहीं बिलासपुर में 333 मकान नहीं बिक सके हैं। अब इन सभी मकानों को बेचने का प्रयास हाउसिंग बोर्ड द्वारा किया जा रहा है।