वैष्णवी दुबे नाम की हिन्दू युवती, मुस्लिम युवक सैयद से शादी को राजी, फिर भी मुस्लिम युवक की जमकर हो गई पिटाई।

भोपाल (म.प्र.) : लिव इन रिलेशनशिप समाज में बढती बुराई है, जहाँ आजकल लड़कियों को समानता का अधिकार मिल रहा है, वहीँ अब वो इसका दुरुपयोग भी करने लगी है। सामने आया मामला है 7 फरवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोर्ट परिसर के अन्दर कुछ लोगों ने एक मुस्लिम नौजवान की जमकर पिटाई कर दी। नौजवान सैय्यद पर आरोप लगा है कि वो किसी हिन्दू लड़की से कोर्ट में शादी करने के लिए वह भोपाल लेकर आया था। सैयद नाम का युवक नरसिंहपुर जिले के पिपरिया का रहने वाल बताया जा रहा है। वहीँ लड़की वैष्णवी दुबे भी उसी क्षेत्र की रहने वाली बताई गई है।

शुक्रवार की सुबह जब दोनों भोपाल के जिला अदालत में अपनी शादी के लिए पहुंचे तो हिंदूवादी संगठन के कुछ लोगों ने उन दोनों को पकड़ लिया और फिर उन लोगों ने लड़के की जमकर पिटाई कर दी और उससे माफ़ी मंगवाई की अब से वह लव जिहाद नहीं करेगा। वहीँ इस मामले में युवती ने कहा कि वह खुद इस शादी के लिये राजी है।

वहीँ जब उन दोनों को MP नगर पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए लाया गया , तो पुलिस के सामने लड़की ने बयान दिया कि वो तीन साल से लड़के के साथ रिलेशनशिप में रह रही है और अपनी मर्ज़ी से उससे शादी करना चाहती है। उस पर कोई जोर ज़बरदस्ती नहीं की गयी है। वह उसके साथ लम्बे समय से रही है, इसलिये वह उसे जानती है।

वकीलों द्वारा सूचना दी गई : ACP अक्षय चौधरी :

इस मामले में ACP अक्षय चौधरी ने बताया कि न्यायालय से वकीलों द्वारा सूचना दी गई थी दो अलग-अलग समुदाय के युवक-युवती घूम रहे हैं। वकीलों की सूचना पर दोनों को थाने लाया गया है। यानी हिन्दूवादी संगठनों को भी सूचना वकीलों ने ही दी होगी। इस पूरे मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने कोर्ट परिसर में मुस्लिम युवक की लव जिहाद के नाम पर पिटाई पर ऐतराज जताया है। पटेल ने कहा कि पिटाई करने का अधिकार किसने दिया है।

पिटाई पर कांग्रेस के विरोध पर भाजपा का पलटवार :

इस मामले पर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा,  “धर्मांतरण और लव जिहाद को बढ़ावा देने का काम कांग्रेस के लोग करवा रहे हैं। इनके पीछे कांग्रेस के लोगों का हाथ होता है। ऐसे में कई हिन्दू युवतियां बलि चढ़ चुकी है। ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार का अभियान जारी है।” 

अंतर धार्मिक शादियों पर क्या कहता है कानून ? 

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देश का कानून किसी भी बालिग़ लड़के या लडकी को अपनी मर्ज़ी का जीवन साथी चुनने का अधिकार देता है। अगर उनमे से किसी के साथ कोई जोर – ज़बरदस्ती या छल-कपट नहीं किया गया हो, तो वो आपसी रजामंदी से शादी करने के लिए स्वतंत्र है, चाहे उन दोनों का जाति या मजहब अलग-अलग ही क्यों न हो? कानून के इसी प्रावधानों का लाभ उठाकर हिन्दू लड़के या पुरुष मुस्लिम लड़कियों से शादी कर रहे हैं। बड़े- बड़े और अमीर मुसलमान भी इसी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हिन्दू लड़कियों से शादी करते हैं। कोर्ट ऐसी शादियों पर होने वाले खतरे के मद्देनज़र उन अंतरधार्मिक जोड़ों को पुलिस सुरक्षा भी मुहैया करता है, लेकिन अगर कोई शादी करने वाला कोई गरीब मुसलमान हो और लड़की हिन्दू हो तो कोर्ट, वकील, पुलिस और आम नागरिक सभी खिलाफ हो जाते हैं। वहीँ कुछ राज्यों में मुस्लिम युवक और हिन्दू युवती की शादी को लेकर क़ानूनी मान्यता नहीं है।