रायपुर : अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये बड़ा खतरा है, ऐसे में शहर में अवैध रूप से रहने वाले तीन बांग्लादेशी मो. इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन के पकड़े जाने के बाद बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है, जो मिनटों में हर वो दस्तावेज बनाकर दे देता है, जिससे कोई भी स्थानीय निवासी बन जाता है, जिसकी पकड़ करना भी बहुत ही मुश्किल काम है। शहर के किसी भी स्कूल में पढ़ाई किए जाने की अंकसूची, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक पासपोर्ट व वीजा भी बनवाकर देता है। इस गिरोह ने रायपुर में कई लोगों के फर्जी दस्तावेज बनाए हैं। गिरोह में कम्प्यूटर सेंटर, ट्रेवल्स एजेंसी जैसे पेशे से जुड़े लोग शामिल हैं। फिलहाल मामले की जांच एटीएस और रायपुर पुलिस टीम कर रही है। इसमें कई और लोगों के भी पकड़े जाने की संभावना है। मात्र कुछ रुपयों में ही ये लोग फर्जी दस्तावेज बनाकर देते है।
नागपुर, मुंबई के बाद बांग्लादेश भी जा चुके :
फर्जी दस्तावेज बनाने के बाद तीनों युवकों का कभी रायपुर, नागपुर तो कभी मुंबई में रहना होता था। बीच-बीच में ये लोग बांग्लादेश भी जाते थे। 26 जनवरी 2025 को तीनों हावड़ा-मुंबई ट्रेन से मुंबई पहुंचे, वहां से इराक जाने वाले थे। इसी बीच मुंबई के नागपाड़ा एटीएस को इनके दस्तावेज फर्जी होने की सूचना मिली। मुंबई एटीएस ने रायपुर एटीएस को जानकारी दी। इसके बाद तीनों को पायधुनी क्षेत्र से पकड़ा गया। तीनों से पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड के साथ ही बगदाद जाने का वीजा भी बरामद हुआ। जांच में सभी दस्तावेज फर्जी निकले। तीनों के खिलाफ टिकरापारा थाना रायपुर में अपराध दर्ज किया गया है। तीन दिन की रिमांड पर लेकर इनसे पूछताछ की जा रही है
ये हैं फर्जी दस्तावेज बनाने वाले :
फर्जी दस्तावेज बनाने में मुख्य भूमिका शेख अली की बताई जा रही है। अली ने ही सत्कार कम्प्यूटर के संचालक मो. आरिफ से मिलकर तीनों आरोपियों के लिए शंकर नगर स्थित एक निजी स्कूल की अंकसूची भी बनवाई। आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडीकार्ड भी बनवाया। इसके बाद ट्रेवल्स एजेंट इरफान ने तीनों के लिए पासपोर्ट और इराक जाने के लिए वीजा भी बनवाया। इरफान, अली, मो. आरिफ तीनों फरार हैं। इसमें अन्य लोगों के शामिल होने का पता चला है। बताया जाता है कि आरोपियों ने कई लोगों का इसी तरह से फर्जी दस्तावेज बनाया है और वो सभी इराक चले गए हैं। सभी फरार आरोपियों की खोज में पुलिस और एटीएस जुटी हुई है।
आधार, पैन और वोटर आईडी कॉर्ड भी बनवाया :
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आरोपियों के पिता शमशुद्दीन, मां रशीदा, भाई अजगर, बहन सुरैया, इस्माइल की पत्नी यास्मीन और दो बेटियां बांग्लादेश के खुलना प्रांत के जिला जैसोर के नाभरन में रहते हैं। तीनों युवक भी वहीं रहते थे। कुछ सालों से टिकरापारा में कबाड़ी का धंधा कर रहे थे। इस दौरान तीनों ने रायपुर के पते से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, अंकसूची भी बनवा ली थी, जिसके जरिये वो लोग यहाँ आसानी से रहते थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा :
बांग्लादेशियों का इस तरह शहर में घुसपैठ करना और आसानी से इराक, सीरिया या पाकिस्तान चले जाना, सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा है। इससे पहले भी मुंबई एटीएस ने टिकरापारा के संजय नगर में छापा मारा था। उस समय हज यात्रा पर गया युवक वापस नहीं लौटा और सीरिया चला गया था। सिमी का बड़ा नेटवर्क भी यहां सक्रिय रह चुका है। राजधानी में बड़े – बड़े आतंकी संगठन से जुड़े लोग और स्लीपर सेल्स पकड़ा चुके है।
पुलिस वेरीफिकेशन में भी नहीं पकड़े गए :
आरोपियों का पासपोर्ट रायपुर कार्यालय से ही बनवाया गया है। आरोपियों ने रायपुर के किसी भी स्कूल में पढ़ाई नहीं की है, लेकिन फर्जी अंकसूची के आधार पर उनकी जन्म तिथि प्रमाणित हो गई। इसी से आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज भी बन गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पासपोर्ट बनाने के दौरान पुलिस वेरीफिकेशन होता है। इन तीनों का भी पुलिस वेरीफिकेशन टिकरापारा थाने से हुआ होगा? उस समय भी यह फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आया। मिश्राबाड़ा के मकान मालिक ने भी संदिग्ध होने की जानकारी थाने में नहीं दी है, वहीँ पुलिस वेरिफिकेशन में लापरवाही पुलिस पर भी सवाल उठाती है।
मामले में खुली बड़ी कहानी :
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एटीएस ने जिन तीन बांग्लादेशी सगे भाइयों को इराक भागने की फिराक में मुंबई से गिरफ्तार किया है, उनके रायपुर में पिछले आठ वर्षों से रायपुर में रहने की जानकारी एटीएस तथा पुलिस टीम को मिली है। एटीएस ने तीनों को उनकी भाषा, रहन-सहन के आधार पर लंबे अरसे से निगरानी करने के बाद गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। एटीएस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर तथा शेख साजन ने किसी शेख अली के माध्यम से रायपुर में अपना ठिकाना बनाया था। टिकरापारा टीआई विनय सिंह बघेल के मुताबिक, इस्माइल तथा उसके भाई रायपुर में रहकर कबाड़ी का काम कर रहे थे। तीनों संतोषी नगर सहित शहर के अलग-अलग इलाकों में घूम-घूमकर कबाड़ी खरीदी-बिक्री का काम कर रहे थे। तीनों भाई रायपुर में रहने के दौरान धरमपुरा के बाद मिश्रा बाड़ा में किराए पर मकान लेकर रह रहे थे। तीनों भाइयों के मोबाइल फोन जब्त कर पुलिस बांग्लादेशी नागरिकों के कॉल डिटेल खंगाल रही है।
एटीएस ने तीनों बांग्लादेशी नागरिकों के मोबाइल फोन जब्त कर टिकरापारा पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस को आशंका है कि बांग्लादेशी नागरिकों ने मोबाइल से कई महत्वपूर्ण डेटा को डीलिट कर दिया है। डीलिट डेटा को रीकवर करने पुलिस मोबाइल की फोरेंसिक जांच करने लैब भेजेगी। पुलिस को जो जानकरी मिली है, उसके मुताबिक कई बांग्लादेशी नागरिक रायपुर से इराक, बगदाद वीजा लेकर पूर्व में जा चुके हैं। रायपुर से कितने बांग्लादेशी नागरिक इराक गए हैं, पुलिस के पास इस बात की कोई सटीक जानकारी फिलहाल नहीं है। इस संबंध में गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिकों से पूछताछ के बाद कुछ बता पाने की बात कह रहे हैं।
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एटीएस तथा पुलिस ने जिन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, उन लोगों ने पूछताछ में बताया है कि उनका कोलकाता के साथ नागपुर आना-जाना लगा था। गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिकों के ज्यादातर रिश्तेदार नागपुर के साथ कोलकाता, मुर्शिदाबाद में निवासरत हैं। पुलिस ने जिन तीन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, उनके दादा की देश विभाजन के पूर्व मुर्शिदाबा में कृषि भूमि थी। विभाजन के बाद इस्माइल के दादा पश्चिमी पाकिस्तान (बांग्लादेश)चले गए। तब से उनकी चोरी छिपे भारत में आवाजाही हो रही है। पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इस्माइल के पिता और उसके परिजन स्कूल सर्टिफिकेट बनवाने के बाद बांग्लादेशी नागरिकों ने आधार तथा वोटर आईडी कार्ड बनाने लगाए जाने वाले शिविर में पहुंचकर भारतीय नागरिकता के प्रमाण के लिए वोटर आईडी, आधार कार्ड बनवाए। वोटर आईडी, आधार के माध्यम से तीनों ने पैन कार्ड बनवाए।
देश में यूनिफार्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू होने के बाद बांग्लादेशी नागरिकों को अपने पकड़े जाने का डर सताने लगा। साथ ही उन्हें उनके बारे में पुलिस को भनक लगने की जानकारी मिल गई थी। इसे देखते हुए तीनों ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। पासपोर्ट बनने के बाद तीनों इराक के रास्ते बगदाद जाने वीजा भी बनवाया।



