रायपुर : अश्लील सीडी काण्ड में भूपेश की कोई संलिप्तता नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें राजनैतिक शिकार बनना पड़ गया था, अब इसके बाद कोर्ट ने उन्हें पूर्ण रूप से बरी कर दिया है, तो वहीँ अब अश्लील सीडी कांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किले फिर बढ़ सकती है। बघेल के खिलाफ पिछले दिनों विशेष न्यायाधीश ने बघेल पर लगाए गए आरोपों को हटाने का आदेश देते हुए साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई ने बुधवार को जिला न्यायाधीश की कोर्ट में रिवीजन फाइल की है,जिसे सुनवाई के लिए जिला जज ने सीबीआई की विशेष कोर्ट को भेज दिया है। इसकी सुनवाई चार अप्रैल को होगी। वहीँ सवाल ये भी उठ रहा है कि सार्वजनिक तौर पर सीडी लहराना अपराध था या साजिशन जिसने सीडी बनवाई वो अपराधी था?
- वहीँ अब इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई की ओर से दाखिल किए गए रिवीजन फाइल पर बहस होगी यदि सीबीआई की विशेष कोर्ट इस रिवीजन को स्वीकार कर लेता है तो भूपेश बघेल को कोर्ट में उपस्थित होने नोटिस जारी किया जायेगा।
- इसके बाद इस मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। गौरतलब है कि अश्लील सीडी कांड मामले में पिछले हफ्ते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विनोद वर्मा और कैलाश मुरारका सीबीआई की विशेष अदालत में दूसरी बार पेश हुए थे।
- भूपेश बघेल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने कोर्ट में दलील रखते हुए कहा कि बघेल को झूठे मामले में फंसाया गया है।
- भूपेश ने कोई सीडी नहीं बनवाई और न ही सीडी बांटी है। उन्होंने किसी तरह का अपराध नहीं किया है। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी धाराओं को हटाते हुए कहा था कि भूपेश बघेल के खिलाफ मुकद्दमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है।
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उपरोक्त आधार पर भूपेश के लिये मुश्किलें बढ़ सकती है, हालाँकि राजनैतिक स्तर पर कैलाश मुरारका का नाम इस मामले में प्रमुख तौर से उठ रहा है, लेकिन सबूतों के अभाव के कारण कुछ पाना मुश्किल है, हालाँकि कोर्ट में केस अब भी लंबित है।



