रायपुर : ग्राहकों की मंजूरी के बिना उनके बैंक खातों के लाखों रुपए निकालकर गबन करने वाले बैंक मैनेजर के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्जकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने एचडीएफसी बैंक के पूर्व ऑपरेशन मैनेजर नितिन देवांगन को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक अन्य मामले में कोरोना काल में किश्त अनियमित होने पर आईसीआईसीआई बैंक के एक ग्राहक की ज्वैलरी नीलाम करने के आरोप में बैंक अफसरों पर केस दर्ज किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक के पूर्व ऑपरेशन मैनेजर देवांगन ने 2020 से 23 तक अपने कार्यकाल के दौरान छह खाता धारकों को बगैर सूचना दिए चेक के माध्यम से 82.83 लाख रुपए का गबन किया था। मामले में ब्रांच मैनेजर रविश साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह एचडीएफसी बैंक के देवेंद्र नगर शाखा में ब्रांच मैनेजर के पद पर 2024 से कार्यरत हैं। पूर्व में बैंक के ऑपरेशन मैनेजर नितिन देवांगन ने 2020 से 23 के बीच छह खाता धारकों के बैंक चेक का कूटरचित तरीके से उपयोग कर उनके माध्यम से अपने अलग खातों में 82.83 लाख रुपए का आहरण निजी उपयोग के लिए किया था। इस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस नितिन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
बैंकिंग प्रक्रिया का हुआ उल्लंघन :
इस संबंध में ग्राहकों द्वारा बैंक में शिकायत मिलने पर जांच पड़ताल की गई थी। इसमें नितिन देवांगन ने शिव कुमार अग्रवाल के खाते की चेक बुक चोरी करने की रिक्वेस्ट दर्ज कराई और नई चेक बुक शाखा में मंगवाई। इसी चेक बुक से नितिन ने ट्रांजेक्शन किया था। चेक बुक संबंधित कोई भी एंट्री बैक के सिस्टम में जानबूझकर नहीं दिखाई गई है। वहीँ ग्राहक शिव कुमार अग्रवाल और अन्य पांच खातों की राशि हेराफेरी की गई और बैंकिग प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है, जिसमे ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी हुई है।
किश्त अनियमित होने पर नीलाम की ज्वैलरी :
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उधर, एक अन्य मामले में सिविल लाइन पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारियों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया है। गोल्ड लोन के बदले बंधक रखे गए गहने बैंक ने नीलाम किए थे। गहनों की कीमत 17 लाख 21 हजार 681 रुपये थी। देवेंद्रनगर के रहने वाले अंकित अग्रवाल ने कोर्ट में आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड के गोल्ड लोन विभाग, शाखा सिविल लाइन रायपुर और बैंक के उच्च अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दायर किया था। अंकित ने 28 जनवरी 2024 को बैंक से परिवार के सोने और हीरे के गहने गिरवी रख कर लोन लिया था। जिसको लेकर ज्वेलरी नीलामी की बात भी सामने आई है।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर :
कोरोना के दौरान वे किश्त का भुगतान नहीं कर पाए थे। अंकित ने जुलाई 2021 में बैंक से फोन के माध्यम से सूचना मिलने के बाद किश्त का भुगतान कर दिया था। बावजूद इसके बैंक ने उन्हें उनकी बंधक ज्वेलरी की नीलामी के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई थी। सितंबर 2021 में अंकित को यह पता चला कि उनकी ज्वेलरी को नीलाम कर दिया गया था। उन्होंने बैंक और पुलिस से शिकायत की, कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस पर उन्होंने कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताता चलें कि नियमानुसार तीन या उससे अधिक किश्त का भुगतान नहीं होने के बाद नीलामी हो सकती है।



