इन्दू गोधवानी/मेहमान सम्पादक : योगासन एक प्राचीन जीवन शैली है..जो दिमाग को स्वस्थ और शरीर को तंदुरुस्त रखती थी..योग ध्यान और व्यायाम का एक रुप है..जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है..योग की मुद्राओं से न केवल भौतिक शरीर को लाभ होता है..वरन् इससे व्यक्त़ि को आध्यात्मिक और मानसिक शांति की भी प्राप्ति होती है..योगासन की विभिन्न शाखाएं योग की विभिन्न विशेषताओं से संबंधित विभिन्न अद्वितीय रुपों का प्रतीक है। भारत ने दुनिया भर में योग का प्रचार-प्रसार किया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग को खास पहचान दिलाई है। योग को पूरी दुनिया में फैलाने और इसके फायदों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र ने 21 दिसंबर 2014 को घोषित किया कि हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाया जाएगा.!
21 जून को साल का सबसे लंबा दिन माना जाता है। जिसे ग्रीष्म संक्रांति भी कहते हैं। ये दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है। इसके बाद सूर्य दक्षिणायन में प्रवेश करता है। इस दिन को योग और अध्यात्म के लिए बेहद खास माना जाता है। यही वजह है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाने का फैसला लिया गया। समत्वं योग उच्यते:-मन का समभाव ही योग कहलाता है। योग आसन के अभ्यास से शरीर में शक्त़ि और लचीलापन विकसित होता है..साथ ही आपकी नसों को आराम मिलता है..और आपका मन शांत होता है..योग आसन मांसपेशियों..जोड़ों और त्वचा और पूरे शरीर-ग्रंथियों..तंत्रिकाओं..आंतरिक अंगों..हड्डियों..श्व़सन और मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। योग के भौतिक निर्माण खंड आसन और श्व़ांस हैं।
योग भी एक प्रकार से संगीत की तरह ही है, जो कि हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क को साधकर हमारी आत्मा को शुद्ध करता है। 21 जून को ही विश्व़ संगीत दिवस भी मनाया जाता है। अतः हर इंसान को योग और संगीत के तालमेल को जीवन में अपनाकर लंबा जीवन जीना चाहिये।
शरीर की लय
मन की मधुरता और
आत्मा के सद्भ़ाव मिलकर
जीवन को एक सुर में
पिरोते है।
हमारी प्राचीन योग विद्या अद्भ़ुत ज्ञान का भंडार हैं..योग से जुड़ना मतलब अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है..योग से ना केवल तनाव को दूर किया जा सकता है वरन् दैनिक जीवन में योग को अपनाकर समाज में युवाओं में कोढ़ की तरह फैल रही नशे की लत से निजात दिलाने के लिए भी योग एक अच्छी एवँ अचूक रामबाण दवा के रुप में भी कारगर सिद्ध हो सकती है..वर्तमान में योग की शक्ति से नशे से मुक्ति की दिशा में सार्थक प्रयास किये जा रहे है।
जो योग को अपनाएगा अपना जीवन सफल बनाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक सफल पहल है..जो युवाओं को सक्रिय रुप से स्वस्थ होने के लिए अपने दैनिक जीवन में योग का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कर रही है।
करें योग
मिले सहयोग
भागे रोग
हर बीतते वर्ष के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को विश्व़ के हर देश से प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है, और आज दुनिया के लगभग हर देश के लोगों ने योग को अपनाया है। योग दिवस का आयोजन हर साल किसी खास थीम को ध्यान में रखते हुए ही किया जाता है। इस साल यानि 2025 योग दिवस “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” थीम के तहत, इस वर्ष का आयोजन समग्र कल्याण और पर्यावरण सद्भ़ाव को बढ़ावा देने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है।
“मन के अंदर ही मंदिर है और अंदर जाने का रास्ता केवल योग ही है।”
भगवान “शिव” से बड़ा कोई “योगी” नहीं हुआ। किसी भी परिस्थिति से खुद को दूर रखते हुए उस पर पकड़ रखना आसान नहीं होता है। महादेव एक बार ध्यान में बैठ जाएं तो दुनिया इधर से उधर हो जाए लेकिन उनका ध्यान कोई भंग नहीं कर सकता है। शिव का यह ध्यान हमें जीवन की जटिल परिस्थितियों पर नियंत्रण रखना सिखाता है। पिछले एक दशक में, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक विश्व़व्यापी आंदोलन के रुप में विकसित हुआ है, जिसने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए योग के अभ्यास में लाखों लोगों को एकजुट किया है।



