खेड़ा (गुजरात) : ज़िले के मातर कस्बे के हुसैनी चौक में लगे एक बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बोर्ड पर लिखा था कि दरगाह, मदरसा, कब्रिस्तान और मस्जिद के आसपास गरबा खेलने और गाना गाने की मनाही है।” यह बात हिंदू संगठनों को खासा पसंद नहीं आई है और इसे वे भावनाएं आहत होने के तौर पर देख रहे हैं। जिसके बाद मामले में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है।
जानकारी के मुताबिक, यह बोर्ड पिछले छह साल से लगा हुआ है। वहीँ मुस्लिम समुदाय का कहना है कि शादी-ब्याह जैसे मौकों पर कुछ लोग कब्रिस्तान और दरगाह के पास गरबा खेलने लगते थे। इसे पवित्र स्थलों की गरिमा से जोड़ते हुए समुदाय ने बोर्ड लगाया था, ताकि धार्मिक आस्थाओं को ठेस न पहुंचे। लेकिन अब इसके कारण विवाद खड़ा हो रहा है।
वहीं, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस बोर्ड का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह संदेश हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं का अपमान है। वीएचपी नेता राजेश आचार्य ने कहा, “यह हमारी संस्कृति पर सीधा हमला है। हमने मातर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।”
मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा?
उधर बिस्मिला खान पठान का कहना है कि ये बोर्ड इसलिए लगाया गया था कि यहां मौजूद कब्रिस्तान, मस्जिद और मदरसे की तौहीन न हो। इस्लाम में नाचने गाने की मनाही है, लेकिन, हम सभी त्यौहारों का सम्मान करते हैं और यह बोर्ड कई साल पुराना है। लेकिन अभी बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्यवाही की। डीएसपी विमल वाजपेयी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मातर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। शिकायतकर्ता ने छोटी भागोल पंचायत के दो लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 54 के तहत आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्यवाही जारी है।



