नई दिल्ली : कई मामलों में सुप्रीमकोर्ट के फैसलों पर आम लोगों ने सवाल उठाये है, ऐसे में एक मामले को लेकर एक वकील ने गुस्से में आकर चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने की कोशिश की। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में तरह – तरह की प्रतिक्रियायें भी सामने आई है। वहीँ मामले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की गई, जिसके बाद आरोपी वकील को हिरासत में ले लिया गया। आरोपी पेशे से वकील है। आरोपी शख़्स का नाम राकेश किशोर है। जूता फेंकने की कोशिश से पहले वकील ने चिल्लाते हुए कहा, ‘सनातन का अपमान नहीं चलेगा।’ उसने अपने बयान में कहा है कि मैंने यह कृत्य नशे में नहीं किया है, बल्कि हिन्दू धर्म से सबंधित मामलों में कोर्ट के अपमान जनक व्यवहार से आहत होकर किया है, उनका एक इंटरव्यू दिनभर सोशल मीडिया में वायरल होता रहा।
ऐसी घटनाओं से नहीं पड़ता फर्क – बीआर गवई
इस दौरान जस्टिस गवई पूरी तरह शांत रहे। वकील राकेश किशोर को कोर्ट स्टाफ ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद जस्टिस गवई ने कहा कि उन्हें इस तरह की घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता है। आप लोग अपनी दलीलें जारी रखें। वहीँ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई दिल्ली जिले के DCP देवेश माहला के साथ सुप्रीम कोर्ट सिक्योरिटी के DCP जितेंद्र मनी भी मौजूद रहे। घटना को लेकर आरोपी वकील से पूछताछ भी की गई।
सीनियर वकील कर रहे इस घटना की निंदा :
सीजेआई पर हमले की कोशिश की कड़ी निंदा की जा रही है। आरोपी वकील के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग उठ रही है। सीनियर वकील इंदिरा जैसिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘इस मामले की विस्तृत जांच की आवश्यक है। आरोपी वकील के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर एक स्पष्ट जातिवादी हमला प्रतीत होता है। सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा इसकी निंदा की जानी चाहिए कि न्यायालय वैचारिक हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। न्यायालय की गरिमा के अनुरूप, सीजेआई गवई ने बिना किसी स्पष्ट व्यवधान के न्यायिक कार्य किया है।’
शांत रहे सीजेआई, जारी रखी कोर्ट की सुनवाई :
सीनियर वकील अनीस तनवीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘आज कोर्ट में उस समय थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश पर हमला करने की कोशिश की। बाहर निकाले जाने के दौरान, वकील ने कहा, ‘सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।’ इस दौरान सीजेआई गवई शांत रहे और कोर्ट की सुनवाई जारी रखी।’ वहीँ इस कृत्य को लेकर प्रधानमंत्री ने भी नाराजगी जताई है।
खजुराहो के जवारी मंदिर से जुड़ा मामला :
बता दें कि 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची मूर्ति के पुनर्निर्माण और पुनः स्थापना के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका खारिज कर दिया था। इस याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने इसे प्रचार हित याचिका करार दिया था। तब चीफ जस्टिस गवई ने कहा, ‘यह पूरी तरह से प्रचार हित याचिका है, जाइए और स्वयं भगवान से कुछ करने के लिए कहिए। यदि आप कह रहे हैं कि आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं तो आप प्रार्थना कीजिए और थोड़ा ध्यान भी कीजिए।’ उनके इसी तरह के जवाब से वकील अपने पर नियंत्रण नहीं रख सके और उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि दूसरे धर्म के मामलों में कोर्ट के ऐसे अपमानजनक जवाब नहीं होते।



