दुर्ग स्टेशन नन अरेस्ट केस, महिला आयोग की तीसरी पेशी में भी आरोपी पक्ष गैरमौजूद, अब मामले में सामने आई ये जानकारी….।

रायपुर : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण का मामला फिर चर्चा में है। ननों की गिरफ्तारी और मानव तस्करी का मामला राज्य महिला आयोग में रखा गया थ। इस मामले में पीड़ित तीन युवतियों ने आरोप लगाया था कि पिछले महीने जब दो ननों व एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उस समय राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) थाने में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनसे छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया था। पीड़ित युवतियों ने इस संबंध में राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर केस की तलवार लटक गई थी।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बताया था कि युवतियों की शिकायत के बाद आयोग ने 20 अगस्त को मामले की सुनवाई की गई थी। इसमें तीनों युवतियां मौजूद थी। हालांकि प्रतिवादी पक्ष इस दौरान उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद दुर्ग जिले और जीआरपी के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर अगली सुनवाई में उपस्थित कराने के लिए कहा गया।

वहीँ अब यह बहुचर्चित नन अरेस्ट मामला एक बार फिर चर्चा में है। मानव तस्करी और धर्मांतरण से जुड़े इस गंभीर प्रकरण की सुनवाई राज्य महिला आयोग में चल रही है। तीसरी पेशी में भी आरोपी पक्ष अनुपस्थित रहा, जबकि तीसरी बार भी पीड़ित आदिवासी युवतियां व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने पेश हुईं। आयोग ने आरपीएफ, जीआरपी और डीआरएम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सीसीटीवी फुटेज छिपाने की कोशिश की जा रही है। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्यवाही के संकेत दिए हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मानव तस्करी को लेकर दुर्ग स्टेशन पर आरोपी ननों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की थी।

न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना :

वहीँ राज्य महिला आयोग में नन अरेस्ट मामले की तीसरी सुनवाई रखी गई थी। नारायणपुर की तीनों आदिवासी पीड़िताएं इस बार भी व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने पेश हुईं, लेकिन आरोपी पक्ष यानी अनावेदक लगातार तीसरी बार नदारद रहा। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि बार-बार पेशी से बचना न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना है। जिसको लेकर डॉ. किरणमयी नायक ने इस मामले पर नाराजगी जताई है।

रेलवे पर साक्ष्य छुपाने का आरोप:

महिला आयोग को डीआरएम कार्यालय से एक पेनड्राइव प्राप्त हुई है, जिसमें केवल दुर्ग रेलवे स्टेशन के एक गेट की सीसीटीवी फुटेज दी गई थी। डॉ. किरणमयी नायक ने सवाल उठाया है कि क्या पूरे स्टेशन में केवल एक ही कैमरा लगा है? उन्होंने इसे साक्ष्य छिपाने की साजिश करार दिया है। आयोग ने चेतावनी दी कि यदि पूरी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो आयोग स्वयं कार्रवाई तय करेगा.

जीआरपी और डीआरएम दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं. डीआरएम का कहना है कि यह मामला जीआरपी के तहत आता है, जबकि जीआरपी का कहना है कि यह रेलवे प्रशासन के अधीन है। यह केवल जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है, लेकिन आयोग अब सख्ती से काम करेगा। – डॉ किरणमयी नायक, अध्यक्ष, महिला आयोग, छत्तीसगढ़

आयोग का अगला कदम : 

वहीँ अब डॉ. किरणमयी नायक ने कहा है कि यदि रेलवे या जीआरपी पूरी सीसीटीवी फुटेज नहीं देते है, तो आयोग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कार्यवाही करेगा। उन्होंने कहा, रेलवे के अधिकारी या तो गुमराह कर रहे हैं या फिर कुछ छुपा रहे हैं, लेकिन अब कार्यवाही तय है। इस मामले में रेल्वे अधिकारियों पर मामले को कमजोर करने के आरोप लग रहे है।

पीड़िताओं का आरोप :

आयोग में पेश हुई पीड़ित युवतियों ने बताया था कि उनके साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और गैंगरेप तक की धमकी तक दी गई। हैरानी की बात यह है कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ। इसके साथ ही आरोप है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकाया और एक महिला ने उनके साथ मारपीट भी की।

पेशी से आरोपी रहते हैं गायब: पीड़ित युवतियो के साथ पहुंचे नारायणपुर कम्युनिस्ट पार्टी के असिस्टेंट सेक्रेटरी फूल सिंह कचलाम ने बताया कि वे लोग तीसरी बार महिला आयोग पहुंचे हैं। लेकिन दूसरा पक्ष जो अनावेदक हैं, वह एक बार भी नहीं आए हैं, गुमराह कर रहे हैं। इससे साफ़ जाहिर है कि जबरन फंसाया जा रहा है।

मैं महिला आयोग से निवेदन करता हूं, कि यदि वह तीसरी बार भी सुनवाई में शामिल नहीं होते है, तो निर्णय हमारे पक्ष में दे दिया जाए। यदि हम नहीं आते तो हमें तुरंत नोटिस भेज दिया जाता। – फूल सिंह कचलाम, असिस्टेंट सेक्रेट्री, कम्युनिस्ट पार्टी, नारायणपुर

तीन सदस्यों को हटाने की मांग:

फूल सिंह कचलाम ने बताया कि पीड़िता ने राज्यपाल को पत्र लिखकर महिला आयोग की तीन सदस्याओं को हटाने की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि वे अनावेदक पक्ष का बचाव कर रही हैं। वहीँ दूसरी तरफ युवतियों के साथ नारायणपुर भीम आर्मी भी पहुंची थी। उनके जिला महासचिव प्रभाकर सोनी ने कहा कि प्रशासन लगातार मामले को इधर-उधर घुमा रहा है। डीआरएम और एसपी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।

अनावेदक महिला आयोग को हल्के में ले रहे हैं और सत्ता के बल पर 3 बार पेशी से बच निकले हैं। – प्रभाकर सोनी, जिला महासचिव, भीम आर्मी, नारायणपुर

रायपुर से दिल्ली तक चर्चा :

दुर्ग का यह नन अरेस्ट मामला पहले भी देशभर में सुर्खियों में रहा है। मानव तस्करी, धर्मांतरण और पुलिस की भूमिका को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया था। वहीँ अब महिला आयोग कीकार्यवाही से यह प्रकरण एक बार फिर राज्य से लेकर दिल्ली तक तूल पकड़ सकता है। अब जब आरोप लगाने वाले ही गायब है तो ऐसे में यह मामला संदिग्ध हो रहा है, जिसको दबाने के लिये अब मामला उल्टा पड़ सकता है।