रायपुर : चुनावी वायदे करते समय पार्टियाँ कुछ भी नहीं सोचती है, वहीँ जब उन कार्यों के क्रियान्वयन की बारी आती है, तो बिना सोचे समझे अनावश्यक विकास कार्यों को मंजूरी दे दी जाती है। जहाँ आम जनता पर पूर्व कांग्रेस सरकार ने अंधाधुंध यूजर चार्ज लगाया था तो विपक्षी भाजपा इ आवश्यक विरोध नहीं किया था, वहीँ अपनी राजनीति की रोटियां सेंकने के लिये भाजपा ने यूजर चार्ज की छूट की बात कही थी, जिसको लेकर आम जनता को दो साल की छूट का नुकसान हो गया है। तो वहीँ बिजली बिल की राहत भी समाप्त कर दी गई है। ऐसे में आम जनता सरकारी टैक्स से लगातार त्रस्त हो रही है। अपने शुरुआती दौर में ही निगम की नई सत्ता में काबिज महापौर पहले ही फंड की कमी की बात कह चुकी है, ऐसे में यह विकास कैसे होगा और आम जनता को राहत कैसे मिलेगी?
वहीँ अब सवाल उठता है कि जब राजधानी की हर सड़क बदहाल है, सड़क में गड्ढे है या गड्ढों में सड़क समझ ही नहीं आता। आये दिन वाहन दुर्घटना ग्रस्त हो रहे है, ऐसे में जो पहले से ही तैयार है उसका मेंटेनेंस नहीं हो रहा है तो, ऐसी में नये प्रोजेक्ट शुरू करने का क्या लाभ है? वहीँ अब फिर से रायपुर में विकास की रफ्तार को और गति देने के लिए नगर निगम की सामान्य सभा में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इसमें पचपेड़ी नाका से टिकरापारा सिद्धार्थ चौक होते हुए बिजली ऑफिस चौक तक गौरवपथ-2 के निर्माण की स्वीकृति शामिल है। यह गौरवपथ शंकर नगर से कलेक्टोरेट चौक तक बने गौरवपथ की तर्ज पर विकसित किया जायेगा। इसी के साथ तेलीबांधा चौक के पास एक आधुनिक टेक्निकल टॉवर बनाया जाएगा, जहां युवाओं को एक ही जगह पर बैठकर काम करने की सुविधा मिलेगी।
तो वहीं, महादेवघाट को भी कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे यह क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन जाएगा। वहीँ स्काईवाक का कम भी फिर से शुरू होगा। स्काई वाक का विशिष्ट जनों से लेकर आम जनता तक विरोध कर चुकी है, फिर भी आम जनता के पैसे का दुरूपयोग करने पर नेता जुटे हुये है।
वहीँ निगम की सामान्य सभा में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और जानकारी के अनुसार अगले महीने से इन पर कार्य शुरू हो जाएगा। आगामी एक से दो वर्षों में इन योजनाओं के पूरा होने पर रायपुर शहर के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। ऐसे में सवाल उठता है, जो सड़कें बदहाल है, उनका क्या होगा? इस सभा के दौरान महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी सहित सभी एमआईसी सदस्य और पार्षद मौजूद रहे।
वहीँ पूर्व नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू भी करीब 20 मिनट की देरी से बैठक में पहुंचे। तब तक प्रश्नकाल शुरू हो चुका था और उनका नाम पहले ही पुकारा जा चुका था। जब वे पहुंचे तो अपनी बात रखने का मौका देने की मांग पर अड़ गए, जिस पर सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। महापौर मीनल चौबे ने कहा कि सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए हैं। जल्द ही शहरवासियों को नई सुविधाएं मिलेंगी। सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि उनके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद समान हैं। नेता प्रतिपक्ष का चयन विपक्षी पार्टी द्वारा किया जाता है, न कि निगम द्वारा। ऐसे में संदीप साहू ने नाराजगी जताई। वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने विकास से जुड़े अच्छे प्रस्तावों को समर्थन दिया और गलत प्रस्तावों का विरोध किया है।
इंदौर मॉडल पर होगी शहर की साफ-सफाई :
वर्तमान में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है, तो वहीँ महापौर मीनल चौबे ने अपनी बात रखते हुये कहा कि शहर विकास के साथ ही युवाओं और महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम होगा। ऐसे एजेंडों पर नगर सरकार काम करेगी। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है। इंदौर के मॉडल पर शहर की साफ-सफाई का भी प्रमुख एजेंडा पेश किया। जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाली रामकी कंपनी की गाडि़यों की निगरानी कराने और जनजागरूकता अभियान चलाने के लिए एनजीओ पर नगर निगम करीब 8 करोड़ खर्च करेगा। इस एजेंडे पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बड़ा सवाल उठाते हुए रामकी कंपनी और निगम के बीच हुए एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि इस कंपनी को सभी 251 गाडि़यों में जीपीएस सिस्टम लगाना है।
सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लेने सहित शहर के लोगों को जागरूक करना है। इन शर्तों को पालन क्यों नहीं कराया जाता है। जो काम रामकी कंपनी को करना चाहिए, उस काम पर 8 करोड़ का भार निगम पर क्यों डाला जा रहा है। इस कंपनी के कामकाज पर कांग्रेस पार्षद अंजुमन ढेबर, शेख मुनीर सहित भाजपा पार्षदाें ने भी सवाल उठाए। राजधानी के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था का हाल बदहाल है, जहाँ सफाई भी हो रही है तो, महज खानापूर्ति।



