रायपुर : राज्य में धर्मान्तरण लगातार हो रहा है, अब इसके विरोध में नक्सली भी खड़े हो गये हो गये, जो गरीब आदिवासियों की पीड़ा से नाराज है, वहीँ एक मामले में छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने ग्रामीणों को साथ मारपीट की है। यह आरोप ईसाई समुदाय के लोगों ने लगाया है। इस मामले में रायपुर में सुकमा के सिमली गांव के लोगों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया है कि सिमली गांव में आदिवासी समुदाय के लोग 25 सालों से रह रहे हैं। वे यहां बाईबिल पढ़ने के साथ ही प्रार्थना सभा करते आ रहे हैं। वहीँ इस मामले में गांव वालों ने आरोप लगाया कि यह कार्य सिमली गांव के सरपंच को पसंद नहीं था। इसलिए उसने इसकी शिकायत नक्सलियों से कर दी गई, जिसके बाद नक्सलियों ने यह कदम उठाया है।
मामले में आरोप है कि 3 नवंबर की शाम को नक्सली और भीड़ ने ग्राम सिमली के 14 परिवारों के घर को उजाड़ कर आग लगा दी। इसके साथ ही उनसे मारपीट भी की गई है, जिसके बाद से सिमली के ग्रामीण भटकने को मजबूर हैं। अभी भी जंगल का सफर काट रहे हैं। इन 14 परिवारों में लगभग 80 सदस्य शामिल है। इन परिवारों के साथ दुखद घटना ये भी है कि पीड़ित परिवार रिपोर्ट दर्ज कराने जगरगुंडा थाना गए थे, लेकिन उनकी एफआईआर नहीं लिखी गई। जिसके बाद उन लोगों ने राजधानी में अपनी बात रखी।
इस मामले में सिमली गांव के पीड़ित देवा मंडावी ने बताया कि 3 नवंबर की शाम 4 बजे 5 नक्सली और लगभग 200 की संख्या में भीड़ में आकर जिस जगह पर ग्रामीण प्रार्थना किया करते थे, उस जगह को जलाने के साथ ही घरों को भी जला दिया गया। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को धमकी भी दी गई है कि अगर पुलिस में इसकी सूचना दोगे तो तुम्हें जान से मार दिया जाएगा। तीन दिनों तक बिना खाए पिए जंगल में रहे हैं। वे लगातार डर के साय में जीते रहे।
5 नवंबर को हम लोग घटना की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जगरगुंडा थाना आए थे, लेकिन हमें थाने के स्टाफ के द्वारा कहा गया कि आप लोगों के आधार कार्ड में क्रिश्चियन का उल्लेख नहीं है। इस तरह के सवाल किए गए. हमें कहा गया कि अगर आपके पूरे डॉक्यूमेंट में क्रिश्चियन धर्म का उल्लेख होता है तभी रिपोर्ट दर्ज हो सकेगा – देवा मंडावी, पीड़ित
ईसाई समुदाय के अध्यक्ष ने क्या कहा ?:
छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने बताया कि सुकमा जिले के ग्राम सिमली के 14 परिवार हैं जिसमें 80 सदस्य हैं, जो पिछले 25 सालों से एक झोपड़ी में बैठकर प्रार्थना करने के साथ ही बाईबिल पढ़ते हैं। वहीँ गांव के सभी पीड़ित धर्म परिवर्तन नहीं किए हैं। सभी पीड़ित परिवार 25 साल से गांव में शांति से रह रहे हैं। अरुण पन्नालाल ने कहा कि गांव का सरपंच सन्ना को इन ग्रामीणों से कोई ना कोई परेशानी है। तो सरपंच ने कहा कि ये लोग क्रिश्चियन हैं और इन्हें गांव से निकाला जाए। जिसके कारण यह मामला हुआ।
सरपंच ने इस मामले में पंचायत भी बुलाई थी लेकिन पंचायत में सरपंच अकेला पड़ गया। इसके बाद सरपंच ने ग्रामीणों को धमकी दी और कहा कि मैं नक्सलियों को बुलाकर लाता हूं। दूसरे दिन यानी 3 नवंबर को सरपंच ने नक्सलियों को सिमली गांव बुलाया। पांच लोग नक्सलियों की वर्दी में थे और पीछे पिट्ठू बैग भी लगाए हुए थे, लेकिन नक्सली हथियार नहीं रखे थे। पांच नक्सलियों के साथ लगभग 200 की भीड़ भी थी। ग्रामीणों से मारपीट की गई। – अरुण पन्नालाल, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम
इसके साथ ही अरुण पन्नालाल ने बताया कि घटना के बाद सिमली गांव के पीड़ित ग्रामीण जगरगुंडा थाना भी गए थे, लेकिन ग्रामीणों को थाने में घुसने के लिए मना कर दिया गया। यहां से फोन किया गया तब उन्होंने बताया कि आधार कार्ड में क्रिश्चियन लिखवा कर लाइए। पीड़ित ग्रामीण ने जब अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया है तो ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्रिश्चियन कैसे लिखवा सकते हैं। पुलिस का यह रवैया आपत्तिजनक है। पहले हम भारतीय नागरिक हैं इसलिए इन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।
वहीँ इस मामले ने लोगों को हैरान कर दिया है कि पहली बार नक्सली धर्मान्तरण के खिलाफ सामने आये है, और उन्हें बुलाने सरपंच की नक्सलियों से सांठगांठ है, यह भी स्पष्ट हो सकता है, बाकि मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।



