मौलवी के घर में मिले अमोनियम नाइट्रेट का वीडियो वायरल,सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।

फरीदाबाद (उ.प्र.) : दिल्ली में बम ब्लास्ट होने के बाद से जांच एजेंसियां सतर्क है, वहीँ 9 नवंबर को फरीदाबाद में एक मौलवी के घर से 2,600 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिलने का वीडियो एक बार फिर सामने आया है। यह वीडियो 10 नवंबर को लाल क़िले के बाहर हुए कार ब्लास्ट से एक दिन पहले शूट किया गया था, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। इस वीडियो में एक सुनसान क्षेत्र में बने घर के अंदर अमोनियम नाइट्रेट से भरे बोरे नजर आते हैं। इस मामले में बताया गया है कि यह कमरा 1,500 रुपये महीने के किराए पर लिया गया था। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि इसको लेकर जांच चल रही है।

अमोनियम नाइट्रेट भरा कमरा :

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर शहीन शाहिद और मुज़म्मिल शकील ने क्या कई गाड़ियां किसी बड़े सीरियल ब्लास्ट प्लान के तहत खरीदी थीं। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि दोनों ने कई कारें इंतजाम की थीं या उनकी फंडिंग की थी, जिन्हें VBIED यानी ‘व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाना था। इसी बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पंपोर निवासी आमिर को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर सुसाइड बॉम्बर उमर उन नबी के साथ मिलकर इस हमले की साजिश में शामिल था। सामने आई एक खबर के मुताबिक आमिर दिल्ली आया था ताकि i20 कार खरीदने में मदद कर सके, जिसे बाद में VBIED में बदलकर ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया था।

एजेंसी ने उमर से जुड़ी एक और कार भी जब्त की है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इसमें विस्फोटक पदार्थ, फिंगरप्रिंट और डिजिटल सबूत तलाशे जा रहे हैं। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी से जुड़े शहीन और शाक़िल ने पहले से पकड़ी गई गाड़ियों के अलावा और कितनी कारें जुटाई थीं। सभी की जांच की जा रही है।

इस बीच, एनआईए ने गुरुवार को तीन डॉक्टरों और एक मौलवी को हिरासत में ले लिया है, जिन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लाल क़िले के बाहर 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किया था। इस घटना को लेकर गिरफ्तार लोगों में मुज़म्मिल गनई, अदील राथर, शाहीना सईद और मौलवी इरफान अहमद वगाय शामिल हैं। एनआईए के प्रवक्ता के अनुसार, “इन सभी ने इस हमले में अहम भूमिका निभाई, जिसमें कई निर्दोष लोगों की मौत हुई।” एजेंसियों को शक है कि गिरफ्तार किए गए दो डॉक्टर शाहीन शाहिद और मुजम्मिल शकील इस विस्फोटक सामग्री और कई कारों की खरीद में शामिल थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि ये दोनों 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर हमले की तैयारी में मदद कर रहे थे।