रायपुर : सत्ता किसी की भी आये, आम जनता के पैसे दुरुपयोग कैसे होता है, वो मामले हमेशा सामने आते ही रहते है, जैसे ही सत्ता बदलती है या नई सत्ता आती है, तो निगम का पैसों की कमी का रोना शुरू हो जाता है, जल्द ही संपत्ति कर वसूली की तैयारी शुरू हो जाती है, नये टैक्स लगाने की कवायद शुरू हो जाती है। आम जनता की आर्थिक रूप से परेशान जनता की जेबें ढीली करने के लिये निगम नये-नये नियम लागू करता जाता है। वहीँ अब फिर आम जनता के पैसों का दुरुपयोग सामने आया है। अपने चहेतों को बचाने के चक्कर में रायपुर नगर निगम के कर्ता-धर्ता निगम के कोष को खाली करने में जुट गये हैं। यही नहीं इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश की भी अवहेलना की जा रही है। तो वहीं सबकुछ जानने के बाद भी निगम के उच्चाधिकारी मौन धारण किए हुए है। ऐसा लगता है राज्य सरकार के दबाव में निगम का काम चल रहा है। महापौर के हाथ में कुछ नहीं है।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दो महीने पहले जारी ट्रांसफर लिस्ट को निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी पूरी तरह नजरअंदाज किए गए हैं। जिसका नतीजा ये हुआ कि एक ही पद पर दो-दो कर्मचारी तनख्वाह ले रहे हैं, जबकि जिन निगमों में इन अधिकारियों को जाना था, वहाँ महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिसकी वजह से जनता को भारी परेशानी हो रही है, जनता का कम भी नहीं हो रहा है और तनख्वाह भी दुगुनी जा रही है।
रवि लावण्य ज़ोन स्वास्थ्य अधिकारी का कोरबा नगर निगम में ट्रांसफर हुआ है, तो संतोष वर्मा राजस्व उपनिरीक्षक का राजनांदगांव, रोशन देव रात्रे उप अभियंता का जगदलपुर नगर निगम, उमेश नामदेव जोन स्वास्थ्य अधिकारी का जगदलपुर नगर निगम, प्रदीप यादव कार्यपालन अभियंता मैकेनिकल रायपुर का रायगढ़ नगर निगम में ट्रांसफर हुआ है। मामले में सूत्र बताते हैं कि इन सभी अधिकारियों की रायपुर में पहली पोस्टिंग थी, और वर्षों से यहीं डटे हुए थे। ट्रांसफर के बाद भी इन्होंने रिलीविंग नहीं ली है, जबकि इनकी जगह ट्रांसफर होकर आए नए कर्मचारी ज्वाइन कर चुके हैं। ऐसे में आम जनता के लिये परेशानियाँ तो बढ़ी ही है।
वहीँ ट्रांसफर के बाद भी रायपुर निगम में जमे अधिकारियों के संबंध में नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप ने कहा कि इन ट्रांसफर को लेकर हमने शासन से मार्गदर्शन मांगा है। अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, तो वहीं अपर आयुक्त कृष्णा खटीक ने कहा कि ट्रांसफर तो हो गया है, लेकिन इन लोगों को रिलीव नहीं किया गया है। निगम में पहले से ही कई पद खाली हैं, जबकि खाली पदों पर भी सैलरी भुगतान हो रहा है। जिनकी जगह नए लोग आ गए हैं और ज्वाइन कर चुके हैं, जानकारी मिली है कि इनमें से कुछ लोग कोर्ट गए हैं। वहीँ आम जनता के काम भी नहीं हो पा रहे है।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी का इस मुद्दे पर कहा कि ये पूरी तरह संरक्षण का मामला है। महापौर और कमिश्नर को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। एक पद पर दो-दो लोग कैसे काम करेंगे और दो-दो सैलरी कैसे लेंगे? नगर निगम पहले से दिवालिया होने की कगार पर है, ऐसे में जनता का पैसा इस तरह बर्बाद करना सरासर भ्रष्टाचार है। जिन निगमों में ये अधिकारी नहीं पहुँचे, वहाँ की जनता को भारी नुकसान हो रहा है। शासन-प्रशासन पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।
जनता पूछ रही है सवाल :

इन अधिकारियों से नए पोस्ट पर ज्वाइनिंग नहीं करने पर कोरबा, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव की जनता पूछ रही है कि हमारे शहर के महत्वपूर्ण पद महीनों से खाली पड़े हैं, ऐसे में काम कौन करेगा? अब देखना यह है कि शासन इस मामले में कब सख्ती दिखाता है, या रायपुर निगम के ये अनमोल रत्न फिर से ट्रांसफर पॉलिसी को धता बताते रहेंगे। इस मुद्दे पर रायपुर महापौर मीनल चौबे से संपर्क किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। मीनल चौबे की नीतियाँ लगातार आम जनता के लिये परेशानी का सबब बन रही है, राजधानी में हर तरफ गड्ढे और गंदगी बिखरी पड़ी है। आम लोगों को संपत्ति कर का भुगतान समय से पहले करने के लिये कहा जा रहा है। वहीँ सड़क किनारे ठेले वालों पर भी ट्रेड लाइसेंस के नाम पर भुगतान माँगा जा रहा है।



