खल्लारी मंदिर में रोप-वे का केबल टूटा, 6 श्रद्धालु हुए घायल, सामने आई ये जानकारी….।

महासमुंद : जिले के खल्लारी स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में आज सुबह बड़ा हादसा हुआ है। यहाँ मंदिर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। इस घटना के समय ट्रॉली में 6 श्रद्धालु सवार थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे आई और इसमें बैठे कई श्रद्धालु घायल हो गए।

चैत्र नवरात्र के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। वहीँ इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन मंदिर प्रबंधन और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 5 से 6 श्रद्धालु गंभीर और मामूली चोटों के साथ घायल हुए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल, महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज किये जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीँ प्रशासन ने इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

बताया जा रहा है कि इस हादसे में कुल 8 श्रद्धालु जख्मी हुए हैं, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद लोगों, मंदिर प्रबंधन और पुलिस ने तुरंत स्थिति संभाली और राहत कार्य शुरू किया। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। सुरक्षा के मद्देनजर रोप-वे संचालन को तत्काल बंद कर दिया गया है।

आपातकालीन व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी :

खल्लारी मंदिर क्षेत्र छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए रोप-वे सुविधा चलाई जाती है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को काफी सहूलियत मिलती है। विशेषकर नवरात्र जैसे पर्वों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। हालांकि, रोप-वे जैसी सुविधाएं जहां एक ओर यात्रा को आसान बनाती हैं, वहीं इनके संचालन में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोप-वे संचालन के लिए तय मानकों का कड़ाई से पालन, नियमित तकनीकी परीक्षण और आपातकालीन व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है। खासकर भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।