रायपुर : आम व्यक्ति जब नया वाहन खरीदता है तो उस पर वाहन से सम्बंधित एसेसरीज खरीदने का दबाव डाला जाता है, जिसकी कीमत शोरूम में ढाई-तीन गुणा तक ली जाती है, जबकि बाहर ये काफी कम दामों पर मिलते है। वहीँ अब नये वाहन की खरीदी के दौरान अब ग्राहकों पर वाहन विक्रेता बीमा और एसेसरीज क्रय करने के लिए अनावश्यक दबाव नहीं डाल पाएंगे। इस मामले में छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने सभी पंजीयन प्राधारिकारियों को निर्देश हैं, जिसके तहत बीमा, एसेसरीज के लिए दबाव डालने की शिकायत पर संबिधत डीलर के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये। जिसमें केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 34 से 44 तक के प्रावधानों में कार्यवाही हो सकती है।
प्रदेश में कई वाहन डीलर उनके शोरूम से गाड़ी खरीदने पर ग्राहकों से बीमा, एसेसरीज लेने के लिए दबाव बनाते हैं, इसको लेकर दवा व्यापारी संजय कुमार रावत ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने के बाद परिवहन विभाग को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये गये है।
शिकायत मिली तो डीलरों की खैर नहीं :
अब इसको लेकर परिवहन विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी वाहन खरीदार को इंश्योरेंस, एसेसरीज किसी विशेष डीलर या स्रोत से लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, यह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो विधि सम्मत नहीं है। ऐसे में ग्राहकों पर किसी प्रकार का दबाव या अनिवार्यता नहीं थोपने के लिए सभी अधिकृत वाहन विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है। यह भी उल्लेखित किया गया कि अगर कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित डीलरों के खिलाफ मोटरयान नियमों के अंतर्गत कठोर कार्यवाही की जायेगी।
इस आदेश में कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-39 के अनुसार बिना वैध पंजीयन के कोई भी वाहन सार्वजनिक स्थान पर उपयोग नहीं किया जा सकता है, लेकिन पंजीयन के लिए एसेसरीज क्रय करने की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं की गई है। वहीँ केन्द्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 और छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम, 1994 के अंतर्गत केवल निर्धारित सुरक्षा एवं मानक उपकरणों का प्रावधान किया गया है, जिसमें अतिरिक्त एसेसरीज (जैसे सीट कवर, म्यूजिक सिस्टम, क्रैश गार्ड, फुट रेस्ट, साड़ी गार्ड, वाटर गार्ड, पंचर सुधारने, टायरों में हवा भरने की किट आदि) वैकल्पिक प्रकृति की हैं। उनका क्रय पूर्णतः वाहन खरीदार के विवेक पर निर्भर है कि वह अपने वाहन से संबंधित आवश्यक एक्सेसरीज शोरूम से खरीदे या स्थानीय बाजार से। इसके साथ ही भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निदेर्शों के अनुसार बीमा पॉलिसी का क्रय पूर्णतः ग्राहक की स्वयं की पसंद पर आधारित है और किसी भी बीमा उत्पाद को अन्य उत्पाद, सेवा के साथ अनिवार्य से जोड़ना या बाध्य करना अनुमति नहीं है।



