भाजपा-कांग्रेस से सिन्धी समाज का मोहभंग, इस बार विधानसभा में अपना समर्थन देंगे अन्य पार्टियों को, टिकट मांगेंगे आप, JCCJ और अन्य पार्टियों से।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में इस वर्ष चुनाव होने जा रहा है, जिसमें सभी समाज अपने सामाजिक प्रतिनिधियों को विभिन्न पार्टियों से टिकट दिलाने की जुगत में लगे हुये है, वहीँ सिन्धी समाज भी इस विषय पर लगातार बैठकें कर रहा है, सिन्धी समाज का कहना है की इस बार सिन्धी समाज ने निर्णय किया है, कि वे भाजपा-कांग्रेस के बजाय अब समाज अपना ध्यान अन्य पार्टियों में दे रहा है, समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि समाज के वोट शुरू से ही भाजपा के पक्ष में रहे है, इसलिये भाजपा की तरफ से उन्हें महत्वपूर्ण स्थान आज तक नहीं मिल पाया है, केंद्र में भाजपा की सत्ता आने के बावजूद सिन्धी समाज को दूरदर्शन का सिन्धी चैनल नहीं मिल पाया और भी कई मांगे आज तक पूरी नहीं हो पाई है, भाजपा को हमेशा यहीं लगता आया है कि सिन्धी समाज कहाँ जायेगा, यही सोचकर समाज के लोगों को पार्टी में उचित योग्य पद भी नहीं दिये गये।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी सिन्धी समाज को उचित महत्व नहीं दिया है, जबकि सिन्धी समाज के सैकड़ों युवा जो भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं है वो सभी कांग्रेस के लिये हमेशा से ही समर्पित रहे है, वे लगातार कांग्रेस पार्टी के लिये अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहे है, बीते वर्ष में छत्तीसगढ़ की सत्ता में परिवर्तन आने के बावजूद कांग्रेस ने सिन्धी समाज के साथ छल किया, अंतिम चुनावी वर्ष में ही सिन्धी अकादमी शुरू की और अंतिम वर्ष में ही चेट्रीचन्द्र पर छूट्टी दी, ऊपर से सिन्धी समाज के सुनील छतवानी को भी बिना किसी सूचना अथवा जानकारी के पद से निकाल बाहर किया, जिससे समाज की भावना को ठेस पहुंची है।

नई पार्टियों को जिताने का तो नहीं लेकिन भाजपा-कांग्रेस के लिये खड़ी कर सकते है मुश्किल :

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जातिगत वोट किसी नेता अथवा पार्टी को पूर्णरूप से जिताने का कार्य तो नहीं कर सकते , लेकिन वोटों का ध्रुवीकरण करके पार्टी अथवा किसी नेता कि जीत को हार में तो बदल ही सकते है, और अब वैसे भी राज्य स्तर पर भाजपा और कांग्रेस की पकड़ लगातार कम होती जा रही है, जिसका फायदा क्षेत्रीय पार्टियों को मिल रहा है, और छत्तीसगढ़ से आम आदमी पार्टी मजबूत अवस्था में आ गई है और JCCJ की भी पकड़ काफी मजबूत है, इसलिये सिन्धी समाज अब इन पार्टियों की ओर रुख करने मजबूर है।