रायपुर : डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने हमेशा इतिहास रचा है, जिन ट्रीटमेंट के लिये लोग राजधानी से बाहर जाते है, वो इलाज राजधानी के इसी अस्पताल में हो जाते है, इस बार शहर के डॉ. भीमराव आम्बेडकर हॉस्पिटल में स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के डॉक्टरों ने एक और कमाल कर दिया है। डॉक्टरों ने 60 वर्षीय महिला का ऑपरेशन के बगैर वाल्व चेंज किया। महिला की दो बार की हार्ट सर्जरी में चार वाल्व बदले जा चुके थे। इसके बाद भी दिल की धड़कन असामान्य गति से चल रही थी। धड़कन को सामान्य करने पेसमेकर लगाया था। फिर भी हार्ट पम्पिंग 20 प्रतिशत से भी कम थी। इसके पहले भी भाप से सर्जरी करके एक बुजुर्ग का हार्ट वोल्व बदला जा चूका है।
गर्दन की नस से लगाया ट्राइकस्पिड वाल्व :
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया, दो वाल्व की एक साथ प्रक्रिया करने से जोखिम कई गुना बढ़ गई थी। साथ ही पुराने पेसमेकर का एक तार खराब हुए वाल्व के बीच में था, जिसके उपचार के दौरान मरीज की धड़कन बंद हो सकती थी। मरीज का हार्ट कम पम्प कर रहा था, इसलिए दवाओं के सहारे हार्ट की पम्पिंग क्षमता को ठीक किया गया। यह बेहद ही कठिन कार्य था , लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने बड़ी मेहनत से संपन्न किया।
डॉक्टरों की टीम में ये रहे शामिल :
मरीज को एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी विभाग में इलाज के लिए प्लॉनिंग की गई। इसमें रेडियोडायग्नोसिस विभाग से डॉ. एएस बी एएस नेताम ने सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी द्वारा वाल्व का सटीक माप निर्धारित करके दिया। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. शशांक ने मरीज़ को बिना बेहोश किए पूरी प्रक्रिया के दौरान अर्धचेतन अवस्था में संभाले रखा। टेक्निकल टीम का नेतृत्व खेम सिंह मंडे व जीतेन्द्र चलकर और कैथ लैब में मुख्य नर्सिंग असिस्टेंट आनंद सिंह ने मरीज़ के ब्लड प्रेशर और धड़कन को मॉनिटर किवा। डॉ. प्रतीक गुप्ता ने इकोकार्डियोग्राफी द्वारा वाल्व की स्थिति दिखाई।