देवास/इंदौर (म.प्र.) : देवास के सोनकच्छ में ग्रामीणों ने एक हिंसक तेन्दुये को पकड़ लिया और उसके साथ ग्रामीण मस्ती मजाक करते हुये गाँव में घुमने लगे, इस घटना का विडियो सोशल मिडिया पर वायरल हो गया है, जिसको लेकर सोशल मिडिया में मस्ती-मजाक भरे तरह-तरह के कमेन्ट शुरू हो गये है, कोई कह रहा है, तेन्दुये ने देसी दारू पी ली है, कोई कह रहा है, नशे में तेंदुआ, ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए तेंदुए के मामले में चौंकाने वाली बात सामने आई है। तेंदुए को इलाज के लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (जू) में लाया गया है। यहां डॉक्टरों ने जांच कर तेंदुए के आसानी से ग्रामीणों की पकड़ में आ जाने के कारण का खुलासा किया है।
डॉक्टरों के अनुसार वायरस की वजह से 10 साल का तेंदुआ बकरी बन गया है, उसके ब्रेन सेल में काफी नुकसान हुआ है। इस वजह से वह अपना हिंसक स्वभाव भूल गया और उसने अपनी पहचान खो दी। यही वजह रही कि न तो वो गुर्राया और न ही इंसानों को देखकर इधर-उधर भागने की कोशिश की, जबकि ग्रामीणों ने उसे घेर लिया था। फिलहाल उसका चिड़ियाघर में इलाज चल रहा है, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है, उसने खाना-पीना छोड़ दिया है। संभावना जताई गई है कि संक्रमित जानवर खाने से उसकी ये हालत हुई है, क्योंकि उसके शरीर पर किसी भी प्रकार के चोट के निशान नहीं मिले हैं।
जाने ये क्या मामला क्या है :
मामला देवास के सोनकच्छ का है। जहां पीपलरावां थाना क्षेत्र के इकलेरा माताजी गांव के पास झाड़ियों में बीती मंगलवार शाम करीब 4 बजे ग्रामीणों को एक तेंदुआ दिखा। पहले तो वे डर गए, लेकिन जब काफी देर तक तेंदुए ने कोई हरकत नहीं की तो कुछ लोग हिम्मत करके उसके पास पहुंचे। छेड़े जाने के बाद भी तेंदुए ने पलटवार नहीं किया तो ग्रामीण बेखौफ हो गए। उनमें से कुछ उसके शरीर पर हाथ फेरने लगे। कुछ उसे उठाने की कोशिश में लग गए।
बात गांव में फैली तो मौके पर भीड़ बढ़ने लगी। जिसे देखकर तेंदुआ उठकर एक तरफ जाने लगा। लोग नहीं माने और तेंदुए के साथ चलने लगे। वे उसे धकेलते रहे। ये नजारा कई ग्रामीणों ने अपने-अपने मोबाईल के कैमरे में कैद कर लिया। जो बाद में वायरल कर दिया गया। सूचना पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बाद में तेंदुए को इंदौर चिड़ियाघर में लाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। जबलपुर की फोरेंसिक टीम ने इंदौर आकर तेंदुए के सैंपल कलेक्ट किए हैं। अब समस्या को जाना जाएगा और उसके बाद आगे का इलाज होगा।
जू प्रभारी बोले – न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में ही इस तरह की स्थिति बनती है
इंदौर जू के प्रभारी डॉ.उत्तम यादव ने बताया कि जब तक सभी प्रकार की टेस्टिंग नहीं हो जाती तब तक कुछ भी कह पाना ठीक नहीं है, हालांकि अभी उसके ताजा सिंप्टम्स के मुताबिक ट्रिटमैंट जरूर दिया है, जिससे उसे रिलीफ भी है। न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है ये बात तो साफ हो चुकी है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन ये किस वजह से हुआ है ये क्लियर नहीं है। क्योंकि ये केराएडिस्टंबर वायरस या फिर रैबीज की वजह से भी हो सकता है। दोनों वायरस ब्रेन को इफेक्ट कर सकते हैं। जिस वजह से उसका जो बेसिक नेचर है वो भी प्रभावित होता है। इंफेक्टेड ऐनिमल को अगर तेंदुए ने खाया होगा तो हो सकता है वायरस के संपर्क में आ गया हो, क्योंकि तेंदुए को जब इंदौर जू में लाए थे तब इसकी बॉडी पर किसी भी तरह के चोट के कोई निशान नहीं थे।
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर क्या होता है जानिए :
– न्यूरोलोजी संबंधी बीमारियों में आमतौर पर शारीरिक असंतुलन, शरीर में अकड़न, कमजोरी, याददाश्त में कमी, उठने, बैठने चलने में परेशानी, शरीर में कंपन, मांसपेशियों का कठोर होना निगलने में कठिनाई आदि लक्षण पाए जाते हैं। न्यूरो संबंधी अधिकांश बीमारियों का इलाज प्रारंभिक अवस्था में पाना संभव होता है।
– तंत्रिका विकार या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर आमतौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले वायरल, जीवाणु, कवक और परजीवी संक्रमण के कारण होते हैं, जिन्हें न्यूरो संबंधित बीमारियां की श्रेणी में शामिल किया जाता है तो वहीं नर्वस सिस्टम की बीमारियों में अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया, मिर्गी, सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक और अन्य सिरदर्द शामिल होते हैं।