फर्जी आईटीसी बिल के जरिए करोड़ों की टैक्स चोरी, गुरुनानक सेल्स का संचालक अनुष गंगवानी गिरफ्तार। 

रायपुर : फर्जी इनवाइस रैकेट की जांच के दौरान जीएसटी विभाग ने 5.53 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी है। बताया जा रहा है कि आरोपी द्वारा पांच फर्मों का संचालन किया जा रहा था और फर्जी तरीके से बिना किसी वस्तुओं की आपूर्ति के और बिना जीएसटी के भुगतान के आरोपी ने 5.53 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया,जहां से उसे 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया।

विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क रायपुर के फेक इनवाइस सेल के अधिकारियों द्वारा यह देखा गया कि दलदल सिवनी निवासी और मेसर्स गुरुनानक सेल्स रायपुर के मालिक अनुष गंगवानी कुछ फर्जी फ़र्में बना कर बिना किसी भी अंतर्निहित वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी आइटीसी को रायपुर ओर आसपास के विभिन्न व्यवसायिओं को वितरित कर रहा है। इससे भारी पैमाने पर जीएसटी की चोरी हो रही है। कुछ के पास एक फर्जी चालान रैकेट था।

इसी क्रम में फेक इनवाइस सेल की टीम ने अनुष गंगवानी के परिसर पर छापा डाल कर तलाशी ली। जांच से पता चला कि अनुष गंगवानी कुल पांच फर्मों का संचालन कर रहा था, जिनके माध्यम से उसने बिना किसी अंतर्निहित वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति के तथा बिना जीएसटी के भुगतान के विभिन्न करदाताओं को 5.53 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट हस्तांतरित की हुई थी।

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार अनुष गंगवानी को को सीजीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 69 (1) के प्रावधानों के तहत केंद्रीय जीएसटी टीम द्वारा 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया जहां सीजेएम अदालत ने आरोपी की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत पर जेल भेज दिया। इस प्रकार का यह पहला मामला नहीं है।

फर्जी कंपनियों की जांच दिसंबर तक चलेगी :

जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि फर्जी कंपनी बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने वाले कंपनियों के लिए जीएसटी विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस तरह से गलत तरीके के इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने लगभग 1.25 लाख फर्जी कंपनियों के खिलाफ दिसंबर अंत तक जांच चलती रहेगी। इस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आखिर किन्हें फर्जी आइटीसी की सप्लाइ की गई है और कितने की जीएसटी चोरी हुई है। ऐसे ही कई व्यापारियों पर GST विभाग लगातार निगरानी बनाया हुआ है, इस मामले में विभाग को ज्यादा कार्यवाही करने की जरूरत नहीं पड़ती क्यूंकि सब ऑन्लाईन डाटा चेक करने पर संदेह के दायरे में आये व्यापारी पर छापा डाला जाता है।

सीएसआर से जुड़े खर्चों के लिए आइटीसी नहीं

जीएसटी के नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। एक अक्टूबर से अब कंपनियां अपने सीएसआर खर्चों में इनपुट टैक्स क्रेडिट(आइटीसी) का दावा नहीं कर सकती। कर विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कंपनियां अपने सीएसआर के खर्चों को भी इसमें शामिल कर देती थी।

सिंडीकेट का गठन

आरोपी कारोबारी द्वारा सिंडीकेट से फर्जी आईटीसी बिल बनाकर बेचने का काम किया जा रहा है। पकड़े जाने के डर से अपने सिंडीकेट में शामिल कारोबारियों को कमीशन लेकर फर्जी बिल बेचा जा रहा था। इसके जरिए करोड़ों रुपए के जीएसटी के चोरी का खेल चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कारोबारी अनुष गंगवानी को सीजीएसटी गिरफ्तार कर 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वहीं आईटीसी बिल खरीदने वाले कारोबारियों के भूमिका की जांच की जा रही है। जल्द ही सभी पर शिकंजा कसा जायेगा।